एक सनकी राजा को अपना चित्र बनवाने का बहुत शौक था। वह था तो बेहद कुरूप, लेकिन चाहता था कि उसका चित्र सुंदर लगे। जो भी चित्रकार उसका चित्र बनाता, वह उसमें कोई न कोई कमी निकाल देता। अगर कोई उसे खुश करने के लिए उसे सुंदर रूप में चित्रित कर देता तो वह उसे चापलूस बताकर अपमानित करता और महल से भगा देता।
एक चित्रकार ने करीब एक सप्ताह तक प्रयास किया, लेकिन उसे संतुष्ट नहीं कर पाया। एक दिन उसने राजा को एक रेशमी कपड़े में लपेटकर एक चित्र भेंट किया और बोला कि महाराज, यह बिल्कुल आप ही जैसा है। राजा ने उत्सुकतावश उसका आवरण अलग किया।
उसने देखा कि वहाँ चित्र के बजाए एक आइना रखा है, जिसमें उसका अक्स नजर आ रहा है। उसे अपनी गलती समझ में आ गई और उसने चित्रकार से क्षमायाचना साथ उसे बहुत सा पुरस्कार देकर ससम्मान विदा किया।
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