इटली के एक नौजवान चित्रकार ने एक बार बहुत ही सुन्दर चित्र बनाया। यह चित्र उसने जिस-जिस चित्रकार को दिखाया उसी ने पसन्द किया। नौजवान पर स्वयं उस चित्र का ऐसा प्रभाव पड़ा कि वह उसे कई घंटों तक देखता रहा, परंतु फिर भी उसकी आँखें न भरीं। उसकी यही इच्छा थी कि वह चित्र उसकी आँखों से ओझल न हो।
दोपहर के समय वह चित्र को शहर के आबाद हुये हिस्से में ले गया और वहाँ उसे लटकाकर उसने उसके नीचे लिख दिया “जो कोई इसमें किसी भी स्थान पर कुछ भी कमी देखे वह उसपर वहीं चिन्ह कर दे। “सायंकाल के समय चित्रकार ने चित्र को देखा तो उसपर लोगों ने इस तरह से चिन्ह कर दिये थे कि वह सारा चित्र काला हो गया था। नौजवान चित्रकार निराश हो गया और रोने लगा।
उसका पिता समझदार था, उसने बेटे से कहा, “तुम एक काम करो। अपने इस चित्र से मिलता जुलता एक चित्र बनाओ और उसे भी वहीं पर लटका दो। परन्तु उसके नीचे यह लिखो कि जो आदमी इसमें कोई कमी पाये उसे ठीक कर दे। “चित्रकार ने ऐसा ही किया परन्तु इस बार उस चित्र पर एक भी चिन्ह न था।
इससे सिद्ध होता है कि दूसरे के दोष निकालना बड़ा सुगम है, परंतु अपने अन्दर गुणों को पैना करना बड़ा कठिन है।
ये कहानी ‘ अनमोल प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं–Anmol Prerak Prasang(अनमोल प्रेरक प्रसंग)
