दहलीज—गृहलक्ष्मी की कविता
Dehleej

Hindi Poem: दहलीज
हर रिश्ते मे दहलीज होना चाहिए,
चाहे माता पिता से रिश्ता हो,
चाहे भाई बहन का हो,
चाहे दोस्तों का हो,
हर जगह दहलीज होना चाहिए,

जब जब दहलीज पार हुई है,
तब तब तहस नहस हुआ है,
रिश्ते की मर्यादाओं को जंग लग जाती है,
विश्वास का दमन टूट जाता है,
सारे जगत मे बदनाम हो जाते हैं,

जब दहलीज मे रह कर कोइ काम होता है,
तो वो असीम सफ़लता देता है,
जब रिश्ते दहलीज मे रहते हैं
तो असीम प्यार मिलता है,

लेकिन अगर कभी कोइ मुश्किल आती है,
जिसके लिए दहलीज पार करना जरूरी हो ,
तब परिवार के लिए,
देश के हित के लिए,
दहलीज पार करना पढ़े कर लेना चाहिए
क्युकी परिवार और देश से बड़ा कोइ नहीं है

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