Postpartum Diet: बच्चे के जन्म के साथ मां का भी दूसरा जन्म होता है क्योंकि डिलीवरी कोई आसान बात नहीं है। डिलीवरी के बाद से ही महिलाओं में कई तरह के शारीरिक बदलाव आने लगते हैं जैसे- कमजोरी आना, मेटाबॉलिज्म स्तर का कम होना, हार्मोन्स में बदलाव होना, बालों का झड़ना व शरीर में कभी अकारण दर्द होना। इसके साथ नई मां खुद में होने वाले मानसिक बदलावों से भी जूझ रही होती है। इसके लिए डिलीवरी के बाद से ही महिलाओं को सही पोषण का ध्यान रखना चाहिए।
प्रेगनेंसी के दौरान शरीर का वजन अधिक बढ़ जाता है लेकिन डिलीवरी के बाद वजन उतनी तेजी से कम नहीं होता है। इस समय नई माता अपने बढ़े हुए शारीरिक भार को लेकर काफी चिंतित रहती है। लेकिन मेरा मानना है कि इस समय मां के शरीर को सही पोषण की जरूरत होती है और उतनी ही नवजात शिशु को भी।
Also read: गर्भवती मम्मी की डाइट तय करती है शिशु का भविष्य, इन्हें जरूर बनाएं भोजन का हिस्सा: Pregnancy Diet
कैसी हो पोस्टपार्टम डाइट

- पानी की मात्रा: डिलिवरी के बाद माता का शरीर कमजोर होता है, ऐसे में पानी की कमी कम ऊर्जा का संचार करती है और जल्दी से थकावट और शरीर आलसी होने लगता है। इसलिए पानी अधिक से अधिक पीना चाहिए, इससे शरीर हाइड्रेट रहता है।
- मैक्रोन्यूट्रिएंट्स: शरीर को ठीक से कार्य करने के लिए तीन आवश्यक पोषक तत्वों की जरूरत होती है जैसे कार्बोहाइड्रेट्स प्रोटीन व वसा।
1.कार्बोहाइड्रेटस-यह शरीर में तुरंत ऊर्जा प्रदान कारते है। इनमें अपने खानपान में शामिल करना आवश्यक है।
2.पौष्टिक कार्ब्स- साबूत अनाज, ओट्स, किनोवा, ज्वार, साबूदाना व शकरकंदी इत्यादि।
3.मिलेट्स- से बनी रागी, चपाती व चिल्ला बनाया जा सकता है। इनमें भरपूर कैल्शियम, आयरन मौजूद होता है। कार्ब्स से फाइबर अधिक रहता है, जिससे माता को कब्ज की शिकायत नहीं रहती है। शुरू के कुछ दिनों में साबुत अनाजों से बनी खिचड़ी अधिक पौष्टिक होती है।
- लीन प्रोटीन : प्रसव के दौरान माताओं का खून अधिक बह जाता है। इसीलिए पोस्टपार्टम डाइट में प्रोटीन की मात्रा अधिक कर दी जाती है जैसे- टोफू, ट्यूना, चिकन, अंडा, दूध व दूध से बने पदार्थ आवश्यक हैं, इनमें मौजूद आयरन खून की कमी को भी ठीक करने में सक्षम है। प्रोटीन में दालें, बिनस, सूखे मावे भी शामिल हैं जो बच्चो के शारीरिक विकास के लिए और मां की डिलीवरी रिकवरी के लिए अतिआवश्यक है।
- हेल्दी वसा : एवोकाडो, नट्स, सिड्स, ऑलिव ऑयल काफी पौष्टिक स्रोत हैं, जो बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए भी आवश्यक है। माता को एक या दो चम्मच देसी घी भी अपने खानपान में शामिल करना चाहिए। इससे नई मां को ताकत मिलती है और अपने बच्चे की स्वयं देखभाल करने में सक्षम रहती है।
- हरी सब्जियां : पालक, ब्रोकली, मेथी, केल और पत्तागोभी जैसे पत्तेदार सब्जियां शरीर में हल्कापन लाती हैं और साथ में आयरन और विटामिन व मिनरल युक्त पोषण भी देता है।
- रंग-बिरंगे फल : पोस्टपार्टम डाइट में संतरा, पपीता, आंवला, आम सभी प्रकार के मौसमानुसार फलों को शामिल करें। इनमें भरपूर विटामिन-सी माताओं की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इनमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट रहते हैं और सभी तरह के विटामिन भी शामिल हैं।
- डेयरी उत्पाद : दूध, दही, पनीर कैल्शियम प्रोटीन के पावरहाउस हैं, ये बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और माता के शरीर को स्वस्थ सुनिश्चित भी करते हैं।
- ओमेगा-3 पौष्टिक उत्पाद : अखरोट, अलसी, चिया सीड्स, अंडे अपनी डाइट में अवश्य शामिल करना चाहिए। यह मां की मांसपेशियों को मजबूत करता है और स्तनपान के दौरान ओमेगा-3 नवजात शिशु में भी प्रवेश करता है, जो कि शीशु की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
- काढ़ा : खाली पेट सौंफ, अजवाइन और मेथी को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पियें। मेथी के पानी में गैलेक्टागॉग होता है, जो वजन कम करने में मदद करता है। सौंफ के पानी से पेट साफ रहता है और अजवाइन का पानी गैस बनने नहीं देता व खाना भी जल्दी से पचता है।
- गोंद के लड्डू : उत्तर भारत में नवजात शिशु की खुशी में व माता की शारीरिक देखभाल करने के लिए गोंद के लड्डू बनाने का प्रचलन है। गोंद के लड्डू काफी पौष्टिक होते हैं। इनमें घी, गोंद, मेथी, सीड्स, नट्स शरीर की कमजोरी को दूर करता है व मौजूद आयरन, कैल्शियम व प्रोटीन शरीर की इम्युनिटी को भी बढ़ाता है।
