32 स्वास्थ्य संबंधी तथ्य: Health Facts
32 Health Facts

Health Facts: 32 ऐसे तथ्य, जो आपके स्वास्थ्य से जुड़े हुए हैं। जानें अपने डॉक्टर से ये तथ्य सच हैं या झूठ।

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यह कथन बिल्कुल झूठ है, क्योंकि कीटाणु आपको बीमार करते हैं न कि मौसम। यदि आप गीले बालों के साथ भी कहीं ठंडी जगह पर जाते हैं और वहां कीटाणु नहीं है तो आप बिल्कुल भी बीमार नहीं पड़ेंगे। परंतु इन दोनों तथ्यों के बीच एक सम्बन्ध है। बीमार करने वाले कीटाणु कम तापमान में ही पनपते हैं।

यह झूठ है। कुछ भी मीठा खाना तुरन्त आपके ब्लड शुगर के लेवल को नहीं बढ़ाता है। पर यह मोटापा बढ़ा सकता है, जो डायबिटीज का एक कारण बन सकता है। इसलिए आप अपनी डाइट को हेल्दी ही रखें।

यह कथन एक दम सही है क्योंकि जले हुए पर बर्फ लगाने से बर्फ आपकी स्किन की सेल्स को नुकसान पहुंचा सकती है और हालत को और भी बिगाड़ सकती है। इसकी बजाय आप ठंडे पानी का प्रयोग कर सकते हैं। 5 मिनट तक ठंडे पानी में अपना जला हुआ अंग रखें और उसके बाद उसे साबुन से धोकर कोई एंटीबायोटिक क्रीम लगा लें। 

यह एक झूठ है। एंटी परस्पिरएंट्स ज्यादा पसीने आने से रोकते हैं। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इनकी वजह से ट्यूमर का खतरा हो सकता है पर एंटी परस्पिरएंट्स और कैंसर के बीच का कोई सम्बन्ध आज तक रिसर्च के द्वारा पता नहीं लगाया गया है।

यह कथन बिल्कुल सत्य है। 2017 में की गई रिसर्च के मुताबिक कार्डिएक अटैक में यदि किसी को माउथ टू माउथ ब्रीदिंग दी जाती है तो उसके बचने के चांस बहुत ही कम हो जाते हैं। इसकी बजाय हमें उसकी सांसों को बिना किसी रोक-टोक के जैसे चल रही है वैसे चलने देना चाहिए।

यह एक झूठ है। रिसर्चर इसको ओवरवेट पैराडॉक्स की बजाए ओबेसिटी पैराडॉक्स कहते हैं। ओबेसिटी यानी कि मोटापा आपके स्वास्थ्य से जुड़ी हुई समस्या है, उसमें आपका जीवन काल कम होने के चांस हैं परन्तु ओवरवेट और ओबेसिटी दो अलग-अलग चीजें हैं। एक रिसर्च के मुताबिक 1 लाख 90 हजार लोगों में से ओवरवेट लोगों का जीवन काल भी उतना ही है, जितना की नॉर्मल लोगों का।

यह सत्य है कि यदि किसी को कोई चोट लग जाती है तो आपको उनको थोड़ी देर के बाद नींद से उठाकर उनकी चोट के लक्षणों को देखना चाहिए न कि सीधे उनको कई घंटों तक सोने देना चाहिए। इसके बाद वह रात में पूरी नींद ले सकते हैं।

यह एक मिथ्या है। सिर टेढ़ा करने से आपको सूजन आ जाती है, जिसकी वजह से पेट में कुछ दिक्कत हो सकती है और आपको उल्टियां भी हो सकती हैं। इसकी बजाए नकसीर आने पर अपने सिर को सीधा रखें और नाक को 10 मिनट के लिए बंद रखें।

यह एक झूठ है। कुछ लोग थोड़ी मात्रा में ही खाना खाते हैं तो कुछ लोगों के लिए कम भोजन पर्याप्त नहीं रहता। यदि आपको ज्यादा भूख लगती है और आप थोड़ी मात्रा में खाना शुरू कर देंगे तो यह आपको उल्टा असर दिखा सकता है। आपको अपने खाने को विभाजित करने की बजाए उससे मिलने वाले पोषण पर ध्यान देना चाहिए।

यह एक मिथ्या है। पुराने समय की तरह मुंह के अंदर चम्मच रखने से जीभ की सूजन को नहीं रोका जा सकता बल्कि इससे जीभ व दांतों को नुकसान पहुंच सकता है। इसकी बजाए आप उस इंसान को ऐसे लिटाएं जिससे उसको उल्टियां न आएं और उसके सिर के नीचे एक तकिया भी लगा दें।

यह कथन झूठ है। गाजर में दृष्टि बढ़ाने वाला तत्त्व बीटा कैरोटीन होता है, जिससे उसका रंग ऑरेंज होता है। बीटा कैरोटीन विटामिन ए में परिवर्तित हो जाता है, जिसकी वजह से हमारी देखने की क्षमता मजबूत होती है। पर ज्यादा मात्रा में गाजर खाने से बीटा कैरोटीन विटामिन ए में परिवर्तित होना बंद हो जाता है। दृष्टि मजबूत करने के लिए हरी सब्जियां खाएं।

यह झूठ है। पेट में फोड़े होने के 2 मुख्य कारण है- एस्पिरिन व बैक्टीरिया से होने वाला इंफेक्शन। स्ट्रेस पहले से ही हुए फोडों को और ज्यादा गम्भीर बना सकता है, पर सटीक तौर से यह नहीं कहा जा सकता कि अल्सर होने का सीधा कारण स्ट्रेस है।

यह सत्य है। हार्ट अटैक के मरीज वर्क आउट न करने का बहाना हार्ट अटैक रोग को बना लेते हैं। बल्कि वर्क आउट आपको करना चाहिए। आपको रोजाना 20 से 30 मिनट तक वर्क आउट करना चाहिए। आप अपने वर्क आउट रूटीन के बारे में डॉक्टर से भी सलाह के सकते हैं। 

यह कथन झूठ है। डिम लाइट में पढ़ने से आपकी आंखों को थकान हो सकती है परन्तु इसके द्वारा आंखों को कोई नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं है। लाइट सीधी आपके स्टडी टेबल पर पड़नी चाहिए न कि आपके शरीर के किसी हिस्से जैसे कंधे आदि पर। इससे लाइट टेबल तक नहीं पहुंच पाती। 

यह बिल्कुल सच है। छोटे बच्चों को ज्यादा देर तक खांसी होने पर उनको उल्टी हो सकती है। क्योंकि बच्चे ज्यादा सेंसिटिव होते हैं परन्तु यह कभी कभार बच्चों के साथ-साथ बड़ों में भी हो जाती है। यह ज्यादा सीरियस समस्या नहीं है पर यदि आप चाहें तो डॉक्टर को दिखा सकते हैं।

यह झूठ है। रिसर्च में यह कहीं भी नहीं पाया गया है कि जोड़ों को चटकाने से गठिया की समस्या हो सकती है। परंतु यदि आप अपनी उंगलियों के पोरों को चटकाते हैं तो आपके कुछ मुलायम टिश्यू टूट सकते हैं।

यह झूठ है। हालांकि यह सच है कि साबुन से जर्म्स एक इंसान से दूसरे इंसान में ट्रांसफर हो सकते हैं परंतु वे ज्यादा देर तक नहीं टिकते। स्टडीज ने साबित किया है कि ये ट्रांसफर होने वाले कीटाणु एक से दो मिनट जीते हैं और इनसे कोई बीमारी फैलने का डर नहीं होता। 

यह सत्य है। किसी भी शोध में यह सिद्ध नहीं हुआ है कि आपको 8 गिलास पानी की ही आवश्कता होती है। आपको 8 से ज्यादा या कम पानी की जरूरत भी हो सकती है। यह आपके शरीर व क्लाइमेट पर निर्भर करता है। परंतु आपको पूरे दिन पानी पीना चाहिए। 

यह कथन बिल्कुल सत्य है। बहुत देर तक एक ही जगह पर बैठना आपकी कमर के लिए अच्छा नहीं होता। इससे आपकी रीढ़ की हड्डी को भी नुकसान पहुंच सकता है इसलिए यदि आपको देर तक बैठना पड़ता है तो अपने पैरों को घुटनों पर चढ़ा कर न बैठें व थोड़ी देर के गैप के बाद थोड़ा सा घूम-फिर लें।

यह एक झूठ है। डार्क स्किन जलती नहीं है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यूवी जैसी हानिकारक किरणों से गहरे रंग की त्वचा पर कोई नुकसान नहीं होगा। सभी तरह की स्किन टोन को सनस्क्रीन लगाने की जरूरत होती है।

यह एक झूठ है। बड़ी उम्र वाले व्यक्तियों को अपनी दवाइयों व स्थिति के कारण कम नींद आती है पर इसका यह मतलब नहीं है कि उनको कम नींद की जरूरत है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए बुजुर्गो को कम से कम 7 घंटों की नींद लेनी चाहिए हालांकि नींद की पर्याप्त मात्रा हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है।

यह बात सच है। जब आपकी बॉडी छींकने को तैयार होती है तो आपके फेफड़ों में एक तरह का प्रेशर बनता है। जब आप छींकने की कोशिश करते हैं तो उस हवा को बाहर जाने का रास्ता चाहिए होता है लेकिन अगर आप अपनी नाक व मुंह को बंद कर लेते हैं तो वह कानों की तरफ जाने लगती है जो खतरनाक हो सकता है।

यह एक सत्य है। एक बार बीमार होना आपको दूसरी बार बीमार होने से नहीं बचा सकता। इसलिए बीमारियों के मौसम में आपको अपना बचाव करना चाहिए, जैसे आपको अपने मुंह व नाक को एक टिश्यू से ढक लेना चाहिए। हाथों को बार-बार साबुन से धोना चाहिए।

यह एक झूठ है। लोगो की ऐसी सोच है कि खाने में मौजूद कोलेस्ट्रॉल आपको ब्लड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है, जो की हृदय रोग से जुड़ा रिस्क है। पर हाल ही में कि गई रिसर्च के मुताबिक 4 लाख लोगों में जो रोज अंडा खाते हैं उनका कोलेस्ट्रॉल लेवल अच्छा होता है और उनमें हृदय रोग होने की संभावना भी 18 प्रतिशत कम होती है।

यह एक झूठ है। यदि आप बिल्कुल स्वस्थ हैं तो भी आपको डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाई खानी चाहिए। लक्षण बीमारी के जाने से पहले भी खत्म हो जाते हैं। मतलब आप दुबारा भी बीमार पड़ सकते हैं। इसलिए लक्षण जाने के बाद भी एंटी बायोटिक लेना जारी रखें।

यह एक झूठ है। जब आप टूथब्रश करने के बाद जब  पानी या माउथ वाश से कुल्ला करते हैं तो जो टूथपेस्ट का फ्ल्यूड आपको टूथ डीके या अन्य बीमारियों से बचाता है। वह धुल जाता है। यदि आपको फिर भी कुल्ला करने की आवश्कता है तो डेंटिस्ट सुझाते हैं कि आपको हल्के से पानी का प्रयोग करना चाहिए।

यह एक झूठ है। रिसर्च के मुताबिक रनर्स को किसी भी तरह के घुटनों में गठिया या अन्य हड्डियों से जुड़ी कोई समस्या के कोई खतरा नहीं रहता है। इसकी बजाए रनिंग से आपकी मसल्स मजबूत होती है, जिनसे आपके घुटने स्टेबल रहते हैं तथा इससे आपको गठिया या अन्य रोग भी नहीं होते। 

यह सत्य है। ऐसा माना जाता है कि कै$फीन से आपके हृदय को नुकसान पहुंचता है लेकिन असल में इसका उल्टा है। एक दिन में 3 कप कॉफी पीने से आपको हृदय रोगों का खतरा बहुत कम होगा। कै$फीन में जो एंटीऑक्सिडेंट्स विद्यमान होते हैं वो हृदय के लिए लाभदायक होते हैं।

यह बिल्कुल सच है। यदि आपकी जॉब ऐसे है जहां आपको पूरा दिन बैठ के काम करना पड़ता है या आप घर में भी पूरा दिन बैठे रहते हैं तो आपके डैथ रिस्क ज्यादा हैं चाहे बेशक आप वर्क आउट करते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वर्कआउट करना बेकार है बल्कि आपको बैठने के दौरान कुछ देर के लिए घूम फिर भी लेना चाहिए। 

यह झूठ है। पुराने जमाने के टीवी में टीवी से आपने वाली किरणों कि मात्रा बहुत अधिक होती थी इसलिए जब आंखों को रिस्क होता था लेकिन मॉडर्न टीवी में ऐसा रिस्क नहीं है। आप यदि नजदीक से भी टीवी देखते हैं तो आपकी आंखों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।

यह सच है। प्रो बायोटिक में मौजूद बैक्टीरिया व यीस्ट आपको डायरिया से लडने में मदद करते हैं। कुछ एंटी बायोटिक्स खाने से डायरिया के लक्षण भी विलुप्त हो जाते हैं। इन बायोटिक्स के कुछ और लाभ जैसे वजन कम होना, सर्दी जुखाम से बचाना आदि भी हैं।

यह एक झूठ है। हालांकि कैंसर की कोशिकाएं बढ़ने के लिए मीठे का सहारा लेती हैं पर इसका यह मतलब नहीं है कि कम मीठा खाने से आप कैंसर से सुरक्षित हैं। जब आप कम मीठा खाते हैं तो शरीर अपना ग्लूकोज स्वयं बना लेता है, जिससे कैंसर होने का खतरा कम होता है। हालांकि मोटापे से कैंसर हो सकता है इसलिए आपको मोटापा कम करने के लिए कम मीठा खाना चाहिए।

मेरा नाम मोनिका अग्रवाल है। मैं कंप्यूटर विषय से स्नातक हूं।अपने जीवन के अनुभवों को कलमबद्ध करने का जुनून सा है जो मेरे हौंसलों को उड़ान देता है।मैंने कुछ वर्ष पूर्व टी वी और मैग्जीन के लिए कुछ विज्ञापनों में काम किया है । मेरा एक...