Guruvar Vrat Katha: गुरुवार को बृहस्पतिवार भी कहा जाता है। गुरुवार का दिन बृहस्पति देव को समर्पित होता है। इस दिन भक्तजन विधि विधान से बृहस्पति देव की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। ऐसा कहा जाता है कि गुरुवार का व्रत रखने और कथा का पाठ करने से घर परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। गुरुवार व्रत की कई कथाएं प्रचलित है, उन्ही में से ही एक कथा आज हम आपको इस लेख के द्वारा बताने जा रहे हैं, तो चलिए जानते हैं।
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गुरुवार व्रत कथा का महत्व

गुरुवार के दिन भगवान बृहस्पति की पूजा का विधान है। गुरुवार का व्रत कथा के बिना अधूरा माना जाता है। गुरुवार को लेकर ऐसी मान्यता है कि गुरुवार के दिन व्रत रखने और कथा का पाठ करने से ज्ञान, बुद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है। इसके अलावा गुरुवार का व्रत रखने और कथा का पाठ करने से गरीबी और कष्ट दूर हो जाते हैं।
गुरुवार व्रत कथा
एक बार की बात है एक गांव में श्रीधर नाम का ब्राह्मण रहता था। वह बड़े भक्ति भाव से गुरुवार के दिन गुरुदेव की पूजा करता था साथ ही व्रत रखता था। एक दिन दरिद्र व्यक्ति ने श्रीधर के पास जाकर भीख मांगी श्रीधर ने अपनी दानशीलता का परिचय दिया और उसे भोजन के लिए अपने साथ बुलाया।
दरिद्र व्यक्ति बहुत खुश हो गया था कि उसे आज भोजन मिलेगा। भोजन के दौरान श्रीधर ने उसे गुरुदेव के प्रति अपनी भक्ति की बातें सुनाई। उसे व्यक्ति ने ब्राह्मण की सारी बातें सुनी। भोजन के बाद दरिद्र व्यक्ति ने श्रीधर से विनती की भगवान में एक गरीब आदमी हूं और मेरे पास और कोई साधन नहीं है कृपया मुझे कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मेरी दुर्दशा ठीक हो जाए और मैं भी जीवन में सफल हो सकूं।
श्रीधर ने उसे गुरुवार व्रत के बारे में बताया और कहा कि गुरुवार के दिन गुरुदेव की पूजा करना, व्रत रखना व कथा सुनना। दरिद्र व्यक्ति ने श्रीधर की सारी बातें ध्यान से सुनी और सभी का पालन किया। ऐसा करने से धीरे-धीरे उसकी दुर्दशा में सुधार होने लगा और जीवन में परिवर्तन आने लगा। एक दिन वह धनवान और सुखी हो गया।
