Ranveer Brar Life Story: शेफ रनवीर बरार के बारे में विकास खन्ना ने मास्टर शेफ इंडिया में कहा था कि इंडियन कुजींस के रिसर्च के मामले में रणवीर का कोई मुकाबला नहीं है। इन्होंने इस संदर्भ में इतनी रिसर्च की है कि आने वाले सालों में इंडियन कुजीन बिफोर रणवीर बरार एंड आफटर रणवीर बरार के तौर पर देखेंगे। यह बात सच जान पड़ती है रनवीर की नॉलेज कमाल की है। शो में भी वो आपको बहुत ज्यादा बोलते हुए नजर नहीं आते। लेकिन जब वो बोलते हैं तो उनका एक-एक शब्द बहुत गहराई लिए होता है। खाना बनाना उनका पैशन है।
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यह बात उनकी बॉडी लैंग्वेज में भी साफ नजर आती है। वो बताते हैं कि उनकी यह नॉलेज दास बाबू की वजह से है। जिनकी लखनऊ में उनके घर के पास किराने की दुकान थी और दास बाबू को मिर्च मसाले की कहानी सुनाने का बड़ा शौक था। जो भी उनसे वो कहानी सुनता था उसे वो एक टॉफी देते थे।
रणवीरकी कहानी
सभी को पता है कि नवाबों की रनवीर नवाबों के शहर लखनऊ में पले-बड़़े हैं। वो अपने दादाजी के साथ हर हफ्ते गुरुदवारे जाते थे लंगर का खाना खाने से ज्यादा उसे बनते हुए देखना उन्हें ज्यादा सुहाता था। यहीं से उन्हें अपने करिअर के लिए एक ईशारा मिला। वो वहां की रसोई में बहुत समय बिताते थे। एक बार उन्हें वहां पर मीठे चावल बनाने का भी मौका मिला था। इसके अलावा जब वो टीनएज में आए फूड जॉइंट्स को भी अपने दोस्तों के साथ एक्सप्लोर करते थे। उन्होंने अपने पिता से कहा कि वो शेफ बनना चाहते हैं लेकिन पिता ने मना कर दिया लेकिन आखिर उनकी जिद के आगे पिता को झुकना पड़ा। उन्होंने होटल मैनजमेंट का कोर्स किया और 25 साल की उम्र में भारत के सबसे यंग शेफ बने। कई बार आप जीवन में गलत फैसले लेते हैं। वो अमेरिका गए अपने दोस्त के साथ पार्टनरशिप में रेस्त्रां खोला अफसोस कि वो एक साल के अंदर ही बंद हो गए। वो शून्य पर आ गए। लेकिन अपनी गलती से सबक लिया दोबारा उठे और आज भारत के सबसे अमीर शेफ में उनकी गिनती होती है।
कुछ न कुछ करना होता है
वो कहते हैं जब आप सफल हो जाते हैं तो यह एक फुल स्टॉप नहीं होता आपको सफल बने रहने के लिए लगातार कुछ न कुछ करना होता है। यह मैंने अपने जीवन से सीखा है। खाना बनाना मुझे पसंद है। यह मेरे लिए मेरी भावनाओं को अभिव्यक्त करने का एक जरिया है। इसे पूरी शिद्दत से ताजिंदगी करना चाहता हूं। यही मेरे लिए मेरा आघ्यात्म भी है। वे कितने जमीन से जुड़े हैं यह बात उनकी इंस्टाग्राम प्रोफाइल से समझ आती है। जहां उन्होंने लिखा है मुसाफ़िर , ज़ायक़े का मुरीद , अदना सा बावर्ची
