हर बहू की सास से होने वाली उम्मीदें
अक्सर सास बहू के रिश्ते को ही परफेक्शन की कमी देकर बदनाम कर दिया जाता है। लेकिन इसके बाद भी हमेशा होने वाली बहू अपनी सास से कुछ ख़ास तरह की उम्मीदें रखती है।
Relationship Tips: सास बहू के रिश्ते को हमेशा से ही नोकझोक वाले रिश्ते की तरह ही देखा जाता है। सास के लिए बहू में परफेक्शन नहीं होता और बहू के लिए सास में परफेक्शन नहीं होता। यूँ तो कोई भी रिश्ता और इंसान परफेक्ट नहीं होता है लेकिन अक्सर सास बहू के रिश्ते को ही परफेक्शन की कमी देकर बदनाम कर दिया जाता है। लेकिन इसके बाद भी हमेशा होने वाली बहू अपनी सास से कुछ ख़ास तरह की उम्मीदें रखती है। चलिए अब हम आपको बताते है कि एक बहू अपनी सास के क्या उम्मीदें रखती है।
माँ की तरह हर फैसले में दें साथ

हर घर की होने वाली बहू कभी भी खुद को एक बहू के रूप में नहीं देखना चाहती है। वो सास को माँ के बराबर ही समझती है ऐसे में सास को दिए जाने वाला प्यार के साथ साथ बहू सास से ये उम्मीद रखती है कि सास भी बेटी की तरह उसके हर काम और फैसले में साथ दें।
सास बहू पर करें भरोसा

ज्यादातर बहुओं को इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ता ही है कि सास बहुओं पर भरोसा कम कर पाती है। वैसे तो बहू के आते ही उस पर भरोसा कर सारी जिम्मेदारियां दे देना सही नहीं है लेकिन फिर भी छोटे छोटे फैसलों में बहू के राय लेना बहू के साथ रिश्ते को मजबूत बनाता है।
बहू के लिए अलग न हो कायदे

ज्यादातर घरों में बहू और परिवार के बाकि सदस्यों के मुकाबले अलग कायदे बना दिए जाते है जिससे बहू को अलग थलग कर दिया जाता है। बहू हमेशा सास से ये उम्मीद करती है कि उससे परिवार के सदस्यों की तरह ही व्यवहार किया जाए उनके लिए अलग कायदे न बनाये जाये।
बहू की सोच के साथ बदलाव

ज्यादातर घरों में कलेश का कारण दो औरतों की सोच का न मिलने की वजह से ही होता है। वक्त के साथ सास को बहू की सोच की तरह घर और परिवार में बदलाव लाना चाहिए। हर मुद्दे पर साथ बैठकर बात कर, सुलाह के साथ ही काम करना चाहिए।
बेटी की तरह करें ट्रीट

हर बहू अपनी सास से ये उम्मीद करती है कि उसे सास से माँ जैसा ही प्यार मिले। बहुओं को माँ जैसा प्यार तो मिल जाता है लेकिन बेटी के जैसे ट्रीट नहीं किया जाता है। सास को ये समझने की जरूरत है कि बहू को भी बेटी जैसे कुछ आराम और समय देना जरूरी है। अगर सास इस बात का ध्यान रखती है तो बहू के लिए सास हमेशा माँ बनती है सास नहीं।
बच्चों को संभालने में करें मदद

बच्चों की जिम्मेदारी ज्यादातर माँ को ही दे दी जाती है, माँ चाहे वर्किंग हो या हाउसवाइफ। अगर सास बहू के साथ मिलाकर बच्चों को सँभालने का काम करती है तो बहुओं को काफी हद तक आराम मिलता है। जो हर बहू अपनी सास से उम्मीद करती है। सास को समझना चाहिए कि दिनभर की भागदौड़ और काम के बाद बचा हुआ समय खुद और पति के साथ बिताना जरुरी है। ऐसे में बहू को आराम देकर उसे ये समय देने का प्रयास करें।
सास बहू का रिश्ता मेलजोल और प्यार का रिश्ता है अगर दोनों तरफ से बराबर का प्रयास हो तो कभी भी घर में सास बहू वाली नोकझोक नहीं होगी। परिवार और घर का माहौल भी खुशहाल होगा।
