बॉलीवुड एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित से लेकर हेमा मालिनी तक ने अपनी फिटनेस का राज डांस को बताया है। दुनियाभर की कई स्टडीज यह दावा करती हैं कि डांस सिर्फ हॉबी या कला नहीं बेहतरीन एक्सरसाइज है। यह न सिर्फ आपके शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत ही अच्छा है। डांस के इसी महत्व को दुनिया को बताने के लिए हर साल 29 अप्रैल को इंटरनेशनल डांस डे मनाया जाता है। डांस के लाभ को देखते हुए यूनेस्को भी इसका हिस्सा है। चलिए हम आज आपको बताते हैं डांस के कुछ ऐसे फायदे, जिन्हें शायद आप नहीं जानते हैं।
दिल को जवां रखता है डांस

डांस हमारे दिल को जवां रखता है। जी हां, डांस और एरोबिक डांस दिल को हेल्दी रखने के लिए बहुत ही फायदेमंद है। डांस से कार्डियोवैस्कुलर फंक्शन में सुधार होता है। अमेरिकन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन की एक रिपोर्ट के अनुसार जो लोग ऐसा डांस करते हैं जिसमें पसीना ज्यादा आता है, उनको हार्ट अटैक की आशंका 46 प्रतिशत कम होती है। स्टडी में 40 साल और उससे अधिक आयु के वयस्कों का अध्ययन करने पर पता चला कि जो लोग पिछले दस साल से डांस प्रैक्टिस कर रहे थे, वे डांस न करने वाले लोगों से ज्यादा स्वस्थ थे। उनमें हार्ट संबंधी परेशानियां 25 प्रतिशत तक कम थीं। डांस उन्हें सामाजिक तौर पर भी एक्टिव रखता है, जिससे वे खुश रहते हैं।
आपकी मांसपेशियों को करता है मजबूत

डांस से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं यानी यह आपकी कोर स्ट्रेंथ को बढ़ाता है। डांस के माध्यम से आप शरीर का संतुलन बनाते हैं, जिससे शरीर की अंदरूनी ताकत बढ़ती है। आप पीठ दर्द, पैरों के दर्द आदी से बचते हैं। इससे आपका बॉडी पॉश्चर भी बेहतर होता है। कुछ डांस फॉर्म्स में हम एक पैर पर खड़े होते हैं, किसी में पैरों की थाप जमीन पर देते हैं, तो किसी में पैरों को जल्दी जल्दी चलाते हैं, जिससे हमारी मांसपेशियां ऐसा करने के लिए प्रशिक्षित हो जाती हैं और उन्हें मजबूती मिलती है। मजबूत मांसपेशियों के कारण आप बढ़ती उम्र के साथ पैरों में होने वाले दर्द, जकड़न, सूजन आती से बच सकते हैं।
शरीर में बना रहा है लचीलापन

मांसपेशियों और शरीर की ताकत को बढ़ाने के अलावा, डांस के कई रूप शरीर के अंगों के लचीलेपन में सुधार करता है। यह लचीलापन शरीर को एक्टिव रखने में मदद करता है। येल स्कूल ऑफ मेडिसिन की प्रोफेसर एलिजाबेथ सी ग्रेंजर के अनुसार शरीर की बेहतर ताकत और लचीलेपन दोनों के लिए डांस जरूरी है। लचीलेपन का मतलब बेहतर गतिशीलता है। जो लोग नियमित रूप से डांस करते हैं, वे अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में भी आगे होते हैं। अपने दैनिक काम पूरे करने में उन्हें परेशानी नहीं होती। उनको उठने बैठने में आलस नहीं आता। प्रोफेसर के अनुसार डांस करने वाले लोग अन्य के मुकाबले हमेशा ही ज्यादा एक्टिव रहते हैं।
वेट लॉस के लिए बेस्ट है डांस

डांस एरोबिक एक्सरसाइज का ही एक रूप है। इससे कैलोरी बहुत जल्दी बर्न होती हैं। जब हम डांस करते समय घूमते हैं, कूदते हैं, उठते हैं, बैठते हैं तो इन सबका संतुलन बैठाने में शरीर की अवायवीय ऊर्जा प्रणाली चालू हो जाती है, जिससे कैलोरी बर्न होती हैं। डांस की शैली जितनी तेज होगी आपकी कैलोरीज उतनी ही घटेंगी। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के अनुसार, नृत्य की शैली और आपके शरीर के वजन के आधार पर, 30 मिनट डांस करने से आपकी 90 से 252 कैलोरी बर्न होती है। अगर आप इससे तेज कैलोरी बर्न करना चाहते हैं तो फास्ट डांस मददगार होगा। सालसा और एरोबिक डांस को जॉगिंग और स्विमिंग जितना ही असरदार माना गया है। एक घंटे सालसा या एरोबिक डांस करने से आप 500 कैलोरी बर्न कर सकते हैं।
हड्डियां होती हैं मजबूत

स्टडी बताती हैं कि डांस स्विमिंग के मुकाबले हड्डियों को ज्यादा मजबूत बनाता है। नेशनल ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन के अनुसार डांस से बोन मास यानी हड्डियों का अस्थि द्रव्यमान बनता है, जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं। फाउंडेशन के विशेषज्ञों के अनुसार जो बच्चे तीन साल की उम्र से डांस करना शुरू कर देते हैं, उनमें बोन मिनरल्स अन्य बच्चों के मुकाबले अधिक होता है। इतना ही नहीं वयस्कों के लिए भी डांस करना अच्छा विकल्प है, जिससे उन्हें हड्डियों से संबंधित कई परेशानियों से आराम मिल सकता है।
मेमोरी लॉस को रोकने में मददगार

डांस न सिर्फ आपकी याददाश्त बढ़ाता है, बल्कि यह आपको मेमोरी लॉस जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाता है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार जो लोग नियमित रूप से डांस करते हैं, उनकी आयु अधिक होती है। वे मानसिक रूप से ज्यादा स्वस्थ रहते हैं। येल मेडिसिन के न्यूरोलॉजिस्ट एमडी कैरोलिन फ्रेडरिक्स की ओर से 75 साल तक के बुजुर्गों पर किए गए एक अध्ययन से साफ हुआ कि पैदल चलना, साइकिल चलाना, सीढ़ियां चढ़ना, तैरना और जिम एक्सरसाइज सहित सभी शारीरिक गतिविधियों में से केवल डांस ही मेमोरी लॉस और डिमेंशिया के जोखिम को कम करता है। स्टडी में सामने आया कि बड़े बुजुर्ग हमेशा स्वस्थ रहने के साथ सामाजिक जुड़ाव की तलाश में रहते हैं और डांस इन दोनों को पूरा करता है। डांस एक ऐसी हॉबी है, जिसके लिए लोग अपनी दिनचर्या से निश्चित समय निकालते हैं। ऐसे में उनका रूटीन सेट होता है। वे बिजी महसूस करते हैं।
टेंशन कम करता है डांस
भागदौड़ भरी जिंदगी में आज हर कोई टेंशन में है। ऐसे में डांस इस टेंशन को ठीक करने की दवा हो सकता है। दुनियाभर में हुई स्टडीज ये साबित करती हैं कि डांस से टेंशन कम होता है। इससे हमारा कॉन्फिडेंस बढ़ता है और मेंटल हेल्थ में सुधार होता है। इतना ही नहीं डिप्रेशन को दूर करने में यह एक उपचार का काम करता है। फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार डांस मूवमेंट थेरेपी बेहद कारगर है। यह व्यक्ति को भावनात्मक, सामाजिक, संज्ञानात्मक और शारीरिक हर तरीके से सुरक्षित करती है। यह आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ रखती है, इससे टेंशन व डिप्रेशन अपने आप बिना दवा कम होते हैं। डांस करने से आप अपने अंदर की फीलिंग्स बाहर निकाल पाते हैं, ऐसे में आपका मूड भी अच्छा होता है।
