हर किसी की जिंदगी में दोस्त बहुत जरूरी है। यह वह पहला रिश्ता है जिसे आप खुद चुनते हैं। एक सच्चा दोस्त वही है जो अपने दोस्त के हर सुख दुख में निस्वार्थ भाव से उसका साथ दें। लेकिन कई बार गलत दोस्तों का चुनाव आपके बच्चों के लिए परेशानी का कारण भी बन सकता है। दरअसल, टीनएज में बच्चे अक्सर अपने दोस्तों के प्रभाव में ज्यादा रहते हैं। लेकिन कई बार यही प्रभाव उनके लिए नुकसानदायक बन जाता है।

इसलिए आने लगती है हीन भावना

जिन टीनएजर्स के दोस्त ज्यादा दबंग या बोल्ड होते हैं, सीधे दोस्त उनके दबाव में रहते हैं
Teenagers whose friends are more domineering or bold, direct friends remain under their pressure

अमेरिका की वेन स्टेट यूनिवर्सिटी में हाल ही में की गई एक स्टडी में सामने आया कि जिन टीनएजर्स के दोस्त ज्यादा दबंग या बोल्ड होते हैं, सीधे दोस्त उनके दबाव में रहते हैं या फिर दबाव महसूस करते हैं। ऐसे में टीनएजर्स के अंदर हीन भावना बढ़ जाती है और उनमें मानसिक बीमारी से पीड़ित होने की आशंका बढ़ जाती है। इतना ही नहीं धीरे-धीरे उनका कॉन्फिडेंस कम होने लगता है। जो उनके भविष्य के लिए खतरनाक है।

 होती हैं एंजायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं   

जो दोस्त डोमिनेट करने वाली नेचर के होते हैं वे अक्सर सभी फैसले खुद लेते हैं
Friends who are of dominating nature often make all the decisions themselves

स्टडी में यह भी सामने आया कि ऐसे दोस्तों के साथ ज्यादा समय रहने से टीनएजर्स में एंजायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी हो जाती हैं। रिसर्च का दावा है कि जो दोस्त डोमिनेट करने वाली नेचर के होते हैं वे अक्सर सभी फैसले खुद लेते हैं या फिर फैसले के समय खुद ही आगे आते हैं और अपने सीधे दोस्तों से चर्चा भी नहीं करते। कई बार वे अपने दोस्तों तक के फैसले खुद ही लेने लगते हैं। ऐसे में टीनएजर्स एक अनकहा प्रेशर महसूस करने लगते हैं। क्योंकि उनका डोमिनेटिंग नेचर का दोस्त ही उनके बाकी दोस्तों और व्यवहार को नियंत्रित करने लगता है। जैसे किससे दोस्ती रखनी है, किससे नहीं या फिर किसकी पार्टी में जाना है या नहीं, सोशल मीडिया पर किसी फॉलो करना है और किसे अनफॉलो, ये फैसले भी दोस्त ही लेने लगता है। ऐसे में किशोरों में हीन भावना आने लगती है। रिसर्च में सामने आया कि जिन किशोरों को उनके दोस्त नियंत्रित करते हैं वे एक लेवल पर आकर खुद को शक्तिहीन महसूस करने लगते हैं। उन्हें आत्म सम्मान में कमी महसूस होने लगती है।

सम्मान और समझौते का अंतर बताएं

हर पेरेंट अपने बच्चों को यह बताएं कि उन्हें दोस्त किस तरह के बनाने हैं
Every parent should tell their kids what kind of friends they should make

ऐसे में जरूरी है कि  हर पेरेंट अपने बच्चों को यह बताएं कि उन्हें दोस्त किस तरह के बनाने हैं और कौन सा दोस्त उनके लिए सही है। बच्चों को हमेशा समझाएं कि दोस्त ऐसे बनाएं जो उनके कॉन्फिडेंस को बढ़ाएं, ना कि कम करें। बच्चों को बचपन से ही हेल्दी फ्रेंडशिप और समानता के अधिकार के बारे में सीखने की जरूरत है। उन्हें समझाएं कि दोस्त होने का मतलब आपका बॉस होना नहीं है। उन्हें इस बात की भी सीख देने की आवश्यकता है कि आपका सेल्फ रिस्पेक्ट दोस्ती से ऊपर है।

बचपन से दें बच्चों को सीख

दोस्ती भी दो तरफा रिश्ता है जिसमें दो दोस्तों का बराबर योगदान होना जरूरी है।
Friendship is also a two-way relationship in which equal contribution of two friends is necessary. Credit: grehlaxmi

बच्चों को बचपन से ही छोटी-छोटी बातों का ज्ञान देने से, टीनएज में उन्हें कई परेशानियों का खुद ब खुद सामना करना आ जाएगा। उन्हें बताएं कि दोस्तों को आपस में एक समझ डेवलप करने की जरूरत होती है, जिसके अनुसार एक दूसरे का ध्यान रखें और एक दूसरे की कमजोरियों को पहचान कर उसे स्ट्रेंथ में बदलने की कोशिश करें। दोस्ती भी दो तरफा रिश्ता है जिसमें दो दोस्तों का बराबर योगदान होना जरूरी है।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...

Leave a comment