Aakhiri Padav
Aakhiri Padav

Hindi Poem: चढ़ने लगीं हूं उम्र की सीढियां
बताओ हाथ थामोगे क्या ?
जब हृदय में उमड़ने लगेंगी असंख्य
भावनाएं, कुछ अनकही दबी हुई संवेदनाएं ,
लड़खड़ाने लगेंगे कदम
और खाने लगेगा अकेलापन ,
उस मौन और एकांत में ,
जब सब साथ छोड़ देंगे
बताओ साथ निभाओगे क्या ?
तर्क विवाद से कोसों दूर ,
अंतर्मन के इस उन्माद को कोने में बांधकर
उम्र के आखिरी पड़ाव पर आकर ,
इस अनपढ़ हृदय को प्रेम का अर्थ
बताओ समझाओगे क्या ?
अंतरिक्ष जैसी प्रतिक्षा
और पृथ्वी जैसी सहनशीलता
अगर खंडित होने लगे
जीवन के मध्य में ही ,
सांसों का वेग रुकने से पहले
बताओ मुझको गले से लगाओगे क्या ?