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आखिरी पड़ाव-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: चढ़ने लगीं हूं उम्र की सीढियांबताओ हाथ थामोगे क्या ?जब हृदय में उमड़ने लगेंगी असंख्यभावनाएं, कुछ अनकही दबी हुई संवेदनाएं ,लड़खड़ाने लगेंगे कदमऔर खाने लगेगा अकेलापन ,उस मौन और एकांत में ,जब सब साथ छोड़ देंगेबताओ साथ निभाओगे क्या ?तर्क विवाद से कोसों दूर ,अंतर्मन के इस उन्माद को कोने में बांधकरउम्र के आखिरी […]

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सुनो सखी-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: सुनो सखी ! तुम कैसी हो ?जैसी पहले थी क्या अब भी वैसी हो ?या मेरी तरह आंसू झुर्रियों में छिपा लेती हो ,कोई हाल पूछता है तो मुस्कुरा लेती हो ।मैं नहीं देख पाती दीवार के उस पार तुम्हें ,मगर  मैं हर रोज सुनती हूं ,तुम पर कसते हुए उन तानों को […]

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