Hindi Poem
Hindi Poem

Hindi Poem: ये जो तुम शहद में डूबे हुए शब्दों से
प्रेम परोसते हो, न
ये तुम पुरुष ही कर सकते हो
और शायद इसीलिए
नही समझ पाते स्त्री का प्रेम

 स्त्री के लिए तो प्रेम
एक एहसास है
 जिसे वह जीती है
हृदय की धड़कन से
साँसो की सरगम तक !

इस बार आना
तो इंतजार व मिलन के
सपनों के
अनगिनत बिम्ब उकेरे  हुए
मेरी गहरी आँखों में देखना

 देखना,तुम्हारी बातों की स्मृतियों  को,
स्पर्श की कल्पना की सिहरन को
और देखना,
तुम्हारी यादों की सुखद अनुभूति के घरौंदे में
मेरे प्रेम के असीम  विस्तार को
 जिसे तुम्हारे शब्द कभी नही नाप पाएंगे

इस एहसास को जीने के लिए
 साथ होना या पास होना आवश्यक नही
 इसके लिए तो बस पर्याप्त है
वो जिसके लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दी
उस पुरुष का प्रेम सिर्फ उसके लिए है,

वह पुरुष जो उसके सौभाग्य का सिंदूर है
और उसके हृदय में उसका स्थान ही
उसके जीवन की पूर्णता है

सोचती हूँ कभी -कभी
इसबार करवाचौथ के उपहार के बदले
माँग लूँ तुमसे
कैकेयी की तरह
तुम्हारे सभी प्रियजनों के लिए
वनवास
और हो जाऊँ मैं
तुम्हारे हृदय की एक मात्र सम्राग्यी

किन्तु,तुम्हारे प्रियजनों की
विलगता के दुःख का कारण
 भला प्रेम कैसे हो सकता है?

और यदि न दे सके मुझे वरदान
तो कही अपूर्ण न रह जाये
प्रेम का अस्तित्व
तुम्हारे अधूरे समर्पण से!