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वाह – गृहलक्ष्मी लघुकथा

एक विक्षिप्त वृद्ध तीन दिनों से गायब। दुनियादारी की बेमिसाल तस्वीर अपनी पत्नी की आज्ञा बेटे ने मान ली। थाने में रपट तक नहीं लिखाई। चौथे दिन घर के निकट चौराहे पर वे अचानक मिल गए।

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शायद – गृहलक्ष्मी कहानियां

जहाज़ की बत्तियाँ जलीं तो लगा, जैसे पानी में बिछी अँधेरे की चादर में अनेक दरारें पड़ गई हों। चारों ओर बल्बों की झूलती बंदनवार देखकर ही राखाल को खयाल आया कि इस बार वह दीवाली घर पर ही मनाएगा। कितना अच्छा होता, किसी तरह वह पूजा पर ही पहुँच पाता।

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एक बार और – गृहलक्ष्मी कहानियां

सारा सामान बस पर लद चुका है। बस छूटने में पाँच मिनट बाकी है। ड्राइवर अपनी सीट पर आकर बैठ गया है। सामान को ठीक से जमाकर कुली नीचे उतर आया है और खड़ा-खड़ा बीड़ी फेंक रहा है। अधिकतर यात्री बस में बैठ चुके हैं, पर कुछ लोग अभी बाहर खड़े विदाई की रस्म अदा कर रहे हैं। अड्डे पर फैली इस हल्की -सी चहल-पहल से अनछुई-सी बिन्नी चुप-चुप कुंज के पास खड़ी है। मन में कहीं गहरा सन्नाटा खिंच आया है। इस समय कोई भी बात उसके मन में नहीं आ रही है, सिवाय इस बोध के कि समय बहुत लंबा ही नहीं, बोझिल भी होता जा रहा है। लग रहा है जैसे पाँच मिनट समाप्त होने की प्रतीक्षा में वह कब से यहाँ खड़ी है। कुंज के साथ रहने पर भी समय यों भारी लगे, यह एक नयी अनुभूति है, जिसे महसूस करते हुए भी स्वीकार करने में मन टीस रहा है।

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असामयिक मृत्यु – – गृहलक्ष्मी कहानियां

सब-कुछ जहाँ का तहाँ थम गया।
गति महेश बाबू के हृदय की बंद हुई थी, पर चाल जैसे सारे घर की ठप्प हो गई। अधूरा बना हुआ मकान और अधकचरी उम्र के तीन बच्चे।

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खोटे सिक्के – गृहलक्ष्मी कहानियां

‘जी, इन्हें कहाँ रक्खूँ?’
एक सहमी-सी आवाज़ पर सब घूम पड़े। देखा, एक छोटा लड़का थैली हाथ में लिए भयभीत-सा खड़ा है।

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सुलतान और अंधा भिखारी – अलिफ़ लैला की कहानियाँ

एक समय की बात है, बगदाद पर एक बुद्धिमान सुलतान का शासन था। उसका नाम हारून-अल-रशीद था। वह बहुत दयालु था। वह बगदाद की सड़कों पर वेष बदलकर घूमता। इस तरह उसे अपनी प्रजा के दुख-दर्द का पता चल जाता। एक दिन उसने एक अंधा भिखारी देखा। वह राहगीरों के आगे गिड़गिड़ा रहा था।

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ब्यूटी पार्लर शरणम् गच्छामि…!! – गृहलक्ष्मी कहानियां

पहले महिलायें घर में चूल्हा-चौका देखती थी आज उन्हें खुद ऐसा बनना होता है कि वह दूसरो को अपने लुक से चौंका दे। पहले उसे अबला माना जाता था लेकिन अब उसे बला की खूबसूरत कहलाने में यकीन है।

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बूढ़ा गिद्ध – हितोपदेश की रोचक कहानियां

गंगा नदी के किनारे एक बहुत बड़ा पेड़ था। इस पेड़ पर बहुत से पक्षी रहा करते थे। एक दिन एक बूढ़ा गिद्ध वहाँ आया और पक्षियों से बोला कि “क्या वह इस वृक्ष के खोल में रह सकता है।” सभी पक्षियों ने बूढ़े गिद्ध की आयु को देखते हुए, उसे वहाँ रहने की इजाजत दे दी। वे अपने हिस्से के भोजन में से भी कुछ भोजन उसे खाने को दे देते।

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