सुबह के छह बज रहे थे। सारी रात कुर्सी पर बैठे बैठे हो गयी थी।सुषमा को बार-बार नींद के झोंके आ रहे थे।
यह समीर भी जाने कहां रह गया ।वैसे छह बजते न बजते वो आ ही जाता था । शायद क्रॉसिंग पर फंस गया हो। दो दिन पहले जब अम्मा जी का टेस्ट कराया था ,तब यह उम्मीद नहीं थी ,कि बात इतनी सीरियस हो जाएगी ।माना की अम्मा जी अस्सी से ऊपर हो रही थीं और उन्हें ब्लड प्रेशर और डायबिटीज भी थी, लेकिन छोटे-मोटे बुखार खांसी के अलावा उन्हें कोई और बीमारी हुई हो और वह दो दिन बिस्तर पर पड़ी रही हों ऐसा तो कभी नहीं हुआ।
