ध्यानाभ्यास में मन को समस्त इन्द्रिय विषयों से हटा लिया जाता है। मन पर अंकुश रखने वाली बुद्धि उसे आदेश देती है कि वह अपने समस्त विचारों को समाप्त कर केवल सर्वव्यापी चेतना के बारे में ही सोचे। कठिन साधना के उपरान्त मन एक समय पर एक ही विषय का चिन्तन करने योग्य बन जाता है।
Tag: स्वामी चिन्मयानंद का जीवन परिचय
जप का माहात्म्य और विधि – स्वामी चिन्मयानंद
एक ही विचार-बिन्दु पर मन को केंद्रित करने के अभ्यास को जप कहते हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि हम किसी शब्द का उच्चारण करें और उसका वैचारिक रूप हमारे मस्तिष्क में न उदय हो अथवा वैचारिक रूप तो आये, किंतु नाम न आये। नाम और रूप के इसी सिद्वांत पर जप की प्रक्रिया टिकी है।
दिव्य जीवन, चिरस्थायी अनुभव है – स्वामी चिन्मयानंद
दिव्य जीवन स्वयं ही एक चिरस्थायी अनुभव है जिसमें जीवन को सदा सुख मिलता है और वह सच्चिदानन्द की परम सत्ता में विलीन होने के लिए आगे बढ़ता है। यही परम सत्ता है और जीवन का परम लक्ष्य है।
दिव्य जीवन कैसे जियें? – स्वामी चिन्मयानंद
दिव्य जीवन पर तुम्हारा अधिकार अवश्य होगा, भले ही तुम अनेक गलतियों के बीच भी इस जीवन का श्रीगणेश कर देते हो तथा प्रत्येक पतन के पश्चात् पुन: प्रयास जारी रखते हो।
