आदर्श, करुणा, दया, त्याग, शौर्य और साहस इन सारे गुणों का प्रतिबिम्ब है एक नाम, ‘श्री राम’, जिनका सम्पूर्ण जीवन ही जनमानस के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत करता है तथा हमें प्रतिपल कुछ नई सीख अवश्य देता है। कौन हैं श्री राम, क्यों कहलाए वह मर्यादा पुरुषोत्तम राम व जनता के आदर्श? जानते हैं इस लेख के माध्यम से।
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मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम का जीवन क्यों है एक मार्गदर्शन
भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और संयम का नाम राम है। असीम ताकत अहंकार को जन्म देती है। लेकिन अपार शक्ति के बावजूद राम संयमित हैं। राम के आदर्श लक्ष्मण रेखा की उस मर्यादा के समान है जो लांघी तो अनर्थ ही अनर्थ और सीमा की मर्यादा में रहे तो खुशहाल और सुरक्षित जीवन।
