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जब बेटी ससुराल से वापिस आ जाए

ऐसे अनेक उदाहरण है, समाज में जब बेटियाँ ससुराल से वापिस आकर घर पर बैठ जाती है। ऐसे में वक्त रहते माँ बाप का सही निर्णय उनका भविष्य संवार या बिगाड़ सकता है। मात्र बेटी की शादी कर देने से ही अभिभावकों का कत्र्तव्य समाप्त नहीं हो जाता।

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गृहलक्ष्मी की कहानियां : जलता हुआ सच

लड़के और उसके घरवालों ने सुमेधा को देखते ही पसंद कर लिया था। लड़का हर तरह से अच्छा था, परिवार भी, लेकिन फिर भी ऐसा क्या था कि सुमेधा की बहन को उसके लिए यह रिश्ता पसंद नहीं आया…

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एक बेटी ने बताई अपनी कहानी इस कविता की जुबानी..

  कोख में आई जब मैं माँ के ..   कोख में आई जब मैं माँ के ..दादी ने दुआ दी पोते के लिए,बुआ ने मन्नत मांगी भतीजे के लिए पापा ने कहा मेरा लाल आ रहा हैं,मेरे वंश का चिराग आ रहा हैं …… तब माँ ने मुझसे हौले से कहाडर मत मेरी रानी […]

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खुशखबरी: हरभजन बने पापा, घर आई नन्ही परी

  टीम इंडिया के अनुभवी ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह पिता बन गए हैं। लंदन में उनकी पत्नी गीता बसरा ने एक बेटी को जन्म दिया है। इस बात का पता चलते ही टीम इंडिया की इस स्टार जोड़ी को दुनियाभर के क्रिकेटर्स से शुभकामनाएं मिल रही हैं।  आपको बता दें गीता ने इस बेटी को जन्म […]

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लड़कियां अनचाही मानी जाती हैं तो इसमें गलती हमारी ही है

लड़कियां शिक्षित होने के बावजूद ससुराल छूटने के डर से घर में ही कैदी बनकर रह जाती हैं, भले ही उनका अपना घर छूट जाए। वह स्वच्छंदता और स्वतंत्रता से डरती हैं।

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