Hindi Love Story: दिसंबर की एक धुंधली सुबह थी। कोलकाता के पुराने मोहल्ले की गलियों में सूरज की किरने धीरे-धीरे उतर रही थीं। घर की छत पर मम्मी धूप सेंक रही थीं और नीचे किचन में बाबूजी चाय के लिए आवाज़ लगा रहे थे। इसी हलचल में, आरोही की ज़िंदगी बदलने जा रही थी। 28 […]
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होटल के कमरे की वो एक रात: गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Romantic Story: रात के दो बजे थे। बारिश अपनी धुन में बरस रही थी और एक आलीशान होटल की ऊपरी मंज़िल पर, नीली रोशनी में नहाया एक कमरा अपनी कहानी कहने को बेताब था। शीशों पर गिरती बूंदें उस कहानी का हिस्सा लग रही थीं, जो अंदर रची जा रही थी। रिद्धिमा खिड़की के […]
गांव की बयार में पला सच्चा इश्क – गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Love Story: बाड़मेर के पास एक छोटा-सा गांव था – बालोतरा। वहां की कच्ची गलियों में धूल से सने पांव लिए दौड़ते दो बच्चे, सूरज और गौरी। दोनों की मांओं की गहरी सखियों जैसी दोस्ती थी, तो इनके दिन भी साथ ही बीतते। कभी खेतों में बकरियां चराते, कभी पीळू के पेड़ के नीचे […]
बोझिल पलकें, भाग-13
अंशु ने अपनी जान और चन्दानी की नौकरी खतरे में डालकर अंशु की इज्जत तो लुटने से बचा ली, लेकिन अपने दिल के चैन को लुटने से नहीं बचा पाया। अपराध की इस दुनिया से निकलने के लिए अंशु उसकी ज़िंदगी में एक वजह और उम्मीद की तरह दाखिल हुई थी। कितनी दूर रह पाएगी ये उजाले की सुबह उससे?
क्यों नहीं मिल सके मिर्जा और साहिबा, जानने के लिए देखें ये फिल्म
जब राकेश ओमप्रकाश मेहरा, गुल्ज़ार, शंकर-एहसान-लॉय जैसे नाम मिर्जा-साहिबा की सदियों से सुनी जा रही प्रेम कहानी के साथ जुड़ जाएं, तो दर्शकों की उम्मीदें भी बढ़ जाती हैं। फिर भी ये फिल्म कई मापदंडो पर खरी नहीं उतरती। क्यों, पढ़े रिव्यू-
सूनापन
कान उल्टे ढोलों की आवाज से सुन्न पड़ गए थे। वो ऑंखें हमेशा के लिए बंद हो चुकी थी। सारा दोष तो आखिर इन्हीं ऑंखों का था। अब खुली ऑंखों के अन्दर बन्द ऑंखें समा गई थी।
