Overview: अमिताभ बच्चन ने क्यों छोड़ी राजनीति खुद किया खुलासा
राजनीति से मोहभंग पर अमिताभ बच्चन ने हाल ही में खुलासा किया। उन्होंने बताया कि सांसद के रूप में राजनीति उन्हें बहुत मुश्किल लगी। हालांकि, बोफोर्स घोटाले में उनका नाम आने और उनके पिता के सवाल ने उन्हें बहुत परेशान किया, जिसके बाद उन्होंने हमेशा के लिए राजनीति को अलविदा कह दिया।
Why Did Amitabh Bachchan Leave Politics: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने हाल ही में एक शो के दौरान राजनीति में अपने छोटे से कार्यकाल और इसे छोड़ने के अपने फैसले के बारे में खुलकर बात की है। 1984 में, उन्होंने अपने बचपन के दोस्त राजीव गांधी के कहने पर राजनीति में कदम रखा था और प्रयागराज से लोकसभा चुनाव लड़ा था।
ऐतिहासिक जीत और फिर मोहभंग
अमिताभ बच्चन ने राजनीति में धमाकेदार एंट्री की थी। उन्होंने दिग्गज नेता हेमवती नंदन बहुगुणा को 1.87 लाख से ज्यादा वोटों के रिकॉर्ड अंतर से हराया था। यह भारतीय राजनीति के इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक थी। हालांकि, उनकी राजनीतिक यात्रा केवल तीन साल ही चली। उन्होंने 1987 में अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया।
राजनीति छोड़ने की असली वजह
अमिताभ बच्चन ने बताया कि उन्होंने राजनीति एक “भावनात्मक अवस्था” में प्रवेश किया था, लेकिन कुछ ही दिनों में उन्हें एहसास हो गया कि यह उनके लिए नहीं है। अमिताभ ने कहा, “मैंने बहुत कम समय के लिए राजनीति की, और मैंने पाया कि यह बहुत मुश्किल काम है। यहाँ आपको हर तरफ देखना पड़ता है, सबकी बातें सुननी पड़ती हैं और हर सवाल का जवाब देना पड़ता है। यह बहुत, बहुत मुश्किल है।” उन्होंने कहा कि यह काम उनके स्वभाव के अनुकूल नहीं था।
बोफोर्स घोटाला

हालांकि, राजनीति छोड़ने का एक और बड़ा कारण बोफोर्स घोटाला था, जिसमें उनका नाम सामने आया था। इस विवाद से वह इतने आहत हुए कि उन्होंने राजनीति से हमेशा के लिए दूरी बना ली। बाद में, उन्हें इस मामले में क्लीन चिट मिल गई, लेकिन तब तक उनका राजनीति से मोहभंग हो चुका था।
राजनीति से मिले अनुभव
अमिताभ बच्चन ने यह भी स्वीकार किया कि राजनीति में बिताए दो साल उनके लिए बहुत मूल्यवान थे। उन्होंने कहा, “यह अनुभव मेरे लिए बहुत कीमती था, क्योंकि मैंने भारत के असली जीवन को गाँवों में देखा।” उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें देश के आम लोगों के जीवन को समझने का मौका दिया।
राजीव गांधी और अमिताभ की दोस्ती का इतिहास
अमिताभ बच्चन और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का रिश्ता सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि बचपन का था। दोनों की दोस्ती इलाहाबाद से शुरू हुई थी। जब अमिताभ 4 साल के थे और राजीव 2 साल के, तब वे एक फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में मिले थे। अमिताभ के पिता, हरिवंश राय बच्चन, और जवाहरलाल नेहरू के बीच भी अच्छे संबंध थे। इसी वजह से दोनों परिवारों का अक्सर मिलना-जुलना होता था, जिससे राजीव और अमिताभ की दोस्ती गहरी होती गई।
दोस्ती में दरार
बोफोर्स घोटाले के बाद, जब अमिताभ का नाम इसमें घसीटा गया, तब उनकी दोस्ती में दरार आ गई थी। अमिताभ ने इस मुद्दे पर राजीव गांधी से दूरी बना ली थी। हालांकि, बाद में उन्हें इस मामले में क्लीन चिट मिल गई, लेकिन तब तक उनका राजनीति से मोहभंग हो चुका था।
राजनीति छोड़ने का एक और अनकहा कारण
बोफोर्स घोटाले के अलावा, राजनीति छोड़ने का एक और भावनात्मक कारण भी था, जिसका जिक्र अमिताभ ने खुद अपने ब्लॉग में किया था। असम की घटना 1987 में असम में चुनाव प्रचार के दौरान उनके हेलीकॉप्टर को गलत जगह पर उतार दिया गया था। वहाँ एक युवा छात्र उनके पास आया और उन्हें एक नोट दिया, जिस पर लिखा था, “मिस्टर बच्चन, मैं आपका बहुत बड़ा फैन हूं, लेकिन मैं अपोजिट पार्टी के साथ हूं। प्लीज आप स्टेट छोड़ दें। आप मेरे लिए लाइफ को बहुत कठिन बना रहे हैं। “अमिताभ ने कहा कि इस नोट ने उन्हें अंदर तक हिला दिया। उन्हें एहसास हुआ कि उनकी मौजूदगी लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है। यह घटना भी उनके राजनीति छोड़ने के फैसले का एक बड़ा कारण बनी।
पिता हरिवंश राय बच्चन का सवाल
बोफोर्स घोटाले के दौरान जब अखबारों में हर दिन उनका नाम छपता था, तब उनके पिता हरिवंश राय बच्चन ने उनसे एक सीधा सवाल पूछा था, जिसने उन्हें बेचैन कर दिया। “बेटा, तुम कुछ गलत काम तो नहीं कर रहे? “इस सवाल ने अमिताभ को बहुत परेशान किया। वह अपने पिता की नजरों में अपनी छवि खराब नहीं करना चाहते थे। इस घटना ने उन्हें राजनीति से पूरी तरह से अलग होने का अंतिम फैसला लेने पर मजबूर कर दिया। यह सारी जानकारी यह बताती है कि राजनीति से अमिताभ बच्चन का मोहभंग सिर्फ एक कारण से नहीं, बल्कि कई व्यक्तिगत और भावनात्मक कारणों से हुआ था।
