जब एक महिलाओं को कोई संपत्ति या तो खुद की मर्जी के अनुसार या गिफ्ट आदि में मिलती है तो वह पूरी तरह या संपत्ति या जमीन की मालकिन हो जाती है।

हिंदू लॉ के मुताबिक मां की संपत्ति हिंदू सक्सेशन एक्ट के अंतर्गत आती है।

इस एक्ट के सेक्शन 15 के अनुसार एक महिला की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति के हकदार निम्न व्यक्ति हो सकते हैं

उसके बच्चे

महिला से पहले मरने वाले बच्चों के बच्चे

उसका पति

महिला के माता या पिता

पति के उत्तराधिकारी

माता या पिता के वारिस

सबसे पहला हकदार कौन होता है?

सबसे पहला अधिकारी बच्चे या पूर्ववर्ती बच्चों के बच्चे

दूसरे पति के वारिस

तीसरे उसके माता या पिता

चौथे उसके पिता के वारिस

अंत में उसकी माता के वारिस

  1. इस प्रकार जब कोई महिला अपनी संपत्ति का बंटवारा किए बिना ही गुजर जाती है तो उसकी संपत्ति पर उसके बच्चों का, पहले ही मरे हुए बच्चे के बच्चों का और पति का बराबरी का हक होता है। अगर इनमें से कोई अनुपस्थित होता है तो फिर बाकी के हकदारों को उनकी प्राथमिकता के हिसाब से हक मिलता है।
  2. मां के हक में उसके पिता की संपत्ति में भी हिस्सा मिलने का हक शामिल है और अगर इस महिला का कोई बच्चा इससे पहले मर जाता है तो उसके बच्चों का भी महिला के पिता की संपत्ति में हक होता है।
  3. 2005 में 1956 एक्ट में होने वाले संशोधन के मुताबिक, पिता की संपत्ति में बेटी का भी उतना ही हक है जितना उनके बेटे का। इसलिए अगर कोई बेटी उसके पिता की संपत्ति के बंटवारे होने से पहले ही मर जाती है तो उसके बच्चों का अपने नाना की संपत्ति में अधिकार होता है।
  4. वैसे तो अपने जीवन काल में केवल वह महिला ही अपने पिता की संपत्ति में हिस्सा पाने के लिए क्लेम कर सकती है लेकिन अगर उसका बेटा या बेटी अपने नाना की संपत्ति में क्लेम करना चाहते हैं तो वह केवल अपनी मां के द्वारा एग्जीक्यूट की गई पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से ही ऐसा कर सकते हैं।
  5. अगर उनकी मां के पिता भी मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं तो इस केस में उनके नाती इस संपत्ति के क्लास एक वारिस में शामिल होते है। वह 1956 एक्ट के अनुसार अपनी भागीदारी को क्लेम कर सकते हैं।
  6. अगर महिला को बंटवारे में उसके हक की संपत्ति मिल जाती है तो वह उसकी मालकिन बन जाती है। अगर महिला अपनी मर्जी से इस संपत्ति को किसी को देना चाहती है तो वह दे सकती है लेकिन अगर उसकी पहले ही मृत्यु हो जाती है तो उस संपत्ति का बंटवारा 1956 एक्ट के मुताबिक होता है।
  7. शादीशुदा बेटी का भी अपनी मां की संपत्ति में उतना ही हक होता है जितना बेटे का और अगर मां की मृत्यु हो जाती है तो उसकी बेटी भी उसकी संपत्ति में अपना हिस्सा क्लेम कर सकती है।
  8. मुस्लिम लॉ के अनुसार, चूंकि लॉ कोडिफाइड नहीं है इसलिए संपत्ति का वितरण व्यक्तिगत नियमों के अनुसार होता है। हिंदू, बुद्ध, सिख जैन और मुस्लिम के अलावा मां की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति के वितरण का जिक्र इंडिया सक्सेशन एक्ट 1925 में है।

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