बेशक यह सुनने या पढ़ने में अजीब लगाता होगा लेकिन कभी ना कभी इंसान कल्पनाओं में बहुत कुछ देखता भी है और महसूस भी करता है। वह अपने दिमाग में एक इमेज बना लेता है और और उसी को केंद्रित कर एक आभास होने जैसी स्थिति को अपनी कल्पना में सोचने लगता है। आज इंटरनेट के द्वारा कई रूपों में जैसे कि फेसबुक, व्हाट्सअप या अन्य एप्लीकेशन के द्वारा अपने पारिवारिक सदस्यों, दोस्तों और रिश्तेदारों से ऑनलाइन जुड़े रहना आज की व्यस्त और भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारी जरूरत बन चुका है और यह बहुत फायदेमंद भी है।

इसी श्रेणी में नए दोस्त बनाने और उनसे एक रिश्ता बनाने के लिए ऑनलाइन डेटिंग का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। आपके सामने दोस्ती के लिए चुनाव करने को एक विस्तृत आसमान होता है। आप अपने लिए सही दोस्त चुनकर उससे कुछ अपनी बातें करते हैं और कुछ उसकी सुनते हैं। ऐसे में अगर दोस्ती से बढ़कर कुछ लगे तो आप चाहे लड़का हों या लड़की, ऑनलाईन डेटिंग भी शुरु हो जाती है और आप दोनों में प्यार की शुरुआत भी हो सकती है। ऐसा प्यार ‘वर्चुअल लव’ कहलाता है जहां हमें ऑनलाईन डेटिंग करनी है। हमें कभी भी मिलना नहीं है तो यहां हमारी उम्र, हमारा रहन-सहन या शक्ल कैसी है, इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती। वर्चुअल यानि आभास होने जैसा लगना, प्यार की एक आभास भरी दुनिया जहां हमें अपने प्यार को लेकर जो भी आभास होता है वह हमारे वास्तविक जीवन से जुड़ा होता है। दो लोगों के बीच में वर्चुअल लव के अंतर्गत अपनी भावनाओं को व्यक्त करना इसका उदाहरण है।

कहा जाए तो वर्चुअल लव आभासी दुनिया में प्रकट किया जाने वाला प्यार है जहां आप अपने साथी से प्यार की ढेरों बातें कर सकते हैं लेकिन एक-दूसरे को छू या देख नहीं सकते हैं। वे ऐसी बातें कर सकते हैं, जो वास्तविकता में कभी नहीं कहेंगे। आजकल तो मोबाईल फोन पर भी रोमांस को अनुभव करना एक आम बात है। एक ऐसा इंसान जिससे कभी मिले ना हों, कभी बात ना की हो लेकिन फिर भी दिन का अधिकांश समय उसीके साथ बिताना, यह सब आसामान्य नहीं है। आभासी प्रेम जिस सहजता से होता है, वास्तविक जीवन में वह उसके विपरीत होता है। वास्तविक संबंध देखा जाए तो ऐसे प्यार में बंधक की भूमिका निभाता है।

वर्चुअल लव के चक्कर में सिर्फ युवा ही नहीं बल्कि पचास या उससे अधिक उम्र का इंसान भी फंस सकता है। इन्हें यह इसलिए अच्छा लगने लगता है, क्योंकि वे सामने वाले से अपने रोज के विचार, बाते और भावनाएं शेयर कर सकते हैं। अगर वे अपने असली जीवन में अपने प्यार से मिलते हैं तो उन्हें वह बातचीत सीमित सीमा तक सभ्यता के साथ करनी पड़ती है जबकि आभासी प्यार में किसी तरह का कोई बंधन नहीं है। दूसरी तरफ यह भी जानना जरूरी है कि वर्चुअल लव का अस्तित्व क्या है? इसके चक्कर में इंसान कहीं वास्तविक जीवन संबंधों से दूर तो नहीं हो रहा? क्या प्यार में हम जो वास्तविकता में महसूस करते हैं, जो सुख महसूस करते हैं, वह सब वर्चुअल लव में होता है? दरअसल हम जो चीजें अपने जीवन में बदल पाने में असमर्थ होते हैं वह आभासी प्यार के रिश्ते में आसानी से परिवर्तित कर सकते हैं अपना मनचाहा पा सकते हैं।

आज कोरोना और लॉकडाउन के चलते लोग घरों से बाहर निकलने को मजबूर हैं। ऐसे में दो प्यार करने वाले मिले भी तो कहां मिले! ऐसे में वर्चुअल लव की दुनिया तो है ही ना। प्रेमियों ने तरह-तरह की एप्स की सहायता लेकर एक-दूसरे से स्वयं को कनेक्ट कर लिया है। घरों में रहते हुए बिना किसी फिजिकली आकर्षण के आपस में गहरी मित्रता और प्यार करने का विकल्प है वर्चुअल लव। अपने पार्टनर से आभासी प्यार भरे रिश्ते को लेकर उन्हें यह भी लगता है कि सोशल डिस्टेंसिंग के चलते बेशक उनमें अधिक बाते होती हैं लेकिन एक-दूसरे को समझने में भी उन्हें मदद मिल रही है।

 वर्चुअल लव का अस्तित्व क्या है? इसके चक्कर में इंसान कहीं वास्तविक जीवन संबंधों से दूर तो नहीं हो रहा? क्या प्यार में हम जो वास्तविकता में महसूस करते हैं, जो सुख महसूस करते हैं, वह सब वर्चुअल लव में होता है?

आभासी प्यार की कमी यह है कि संसार के किसी भी माध्यम से पार्टनर के साथ बात करके उसकी एक ऐसी छवि अपनी कल्पना में बना लेते हैं जिसे हम पसंद करते हैं। यह इंटरनेट का प्यार है, जहां आप आपस में मिल नहीं सकते, केवल उस व्यक्ति के लिए सोच सकते हैं, जो हमारी पसंद के अनुरूप हैं। कुल मिलाकर कहा जाए तो आपको एक ऐसे इंसान की जरूरत होती है, जो आपकी प्रशंसा करे नाकि आपके रूतबे की। आपको अपना प्यार साबित करने की जरूरत नहीं होती व आपका पार्टनर भी आपको कबूल करता है। वर्चुअल प्यार खतरनाक भी हो सकता है क्योंकि आप अपने पार्टनर पर पूरी तरह से निर्भर हो जाते हैं। हमें सोशल साइट्स पर कई ऐसे दोस्त मिल जाते हैं जिन्हें बिना जाने-पहचाने ही हम एक अटूट रिश्ते में बंध जाते हैं। जो सावधानी हम वास्तविक जीवन में रखते हैं वही हमें वहां भी रखनी पड़ती है।

हमारे देश में वर्चुअल लव को लेकर कई लोग तैयार नहीं हैं। उन्हें इस रास्ते पर जाना सही नहीं लगता। आभासी प्यार के चक्कर में युवक-युवतियां कई बार धोखे की चपेट में भी आ जाते हैं। इसके बाद सिवाय पछतावे के उन्हें कुछ नहीं मिलता। मेरी एक कजिन की बेटी भी इसका शिकार हो चुकी है लेकिन समय रहते ही उसे सब पता चल गया। हुआ यूं कि इंटरनेट के जरिए अपनी स्टडी से रिलेटिड कुछ जानकारी के लिए उसने किसी प्रोफेसर से सलाह ली। धीरे-धीरे दोनों में बातचीत होने लगी और एक-दूसरे को पसंद करने लगे। प्यार भरी बातें होती, यहां तक दोनों ने मिलने और शादी का भी सोच लिया। इसी बीच लड़की को यह पता चला कि वो टीचर शादीशुदा है व दो बच्चों का पिता भी है। उस लड़की ने जब जांच की तो सब सही निकला। उसके बाद उसने बिना कुछ कहे सब खत्म कर दिया और वर्चुअल लव के चक्कर से बाहर निकल आई। बहुत समय लगा गया उसे संभलने में और इस आभासी प्यार की दुनिया से बाहर आने में।

क्यों आज प्यार की परिभाष एक अंगूठे तक सिमट कर रह गई है? ना कोई जान-पहचान, एक मायावी प्रेम के चक्कर में घंटों फोन में उलझे रहना और अपनी जिंदगी को अंजान को सौंप देना, कहां की समझदारी है। जरूरी है कि इस आभासी प्रेम की दुनिया से बाहर आओ और वास्तविकता से नाता जोड़ो। 

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