husband and wife Responsibilities: आधुनिक और तेज़ रफ्तार जीवन में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहीं हैं। लेकिन बात जब घरेलू कामों की आती है, तो ऐसे में महिलाओं और पुरुषों के बीच असमानता आज भी बनी हुई है। एक तरफ महिलाएं ऑफिस से लेकर बच्चों की देखभाल में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं। वहीं दूसरी तरफ ज्यादातर पुरुष अब भी घर के कामों से दूरी बनाए रखते हैं। इस तरह महिलाओं पर अतिरिक्त मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ जाता है। सही मायने में महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता लाने की शुरुआत हमें अपने घर से ही करनी होगी। जब पति-पत्नी दोनों मिलकर घर चलाएँगे, तभी दोनों सुखहाल दांपत्य जीवन संभव का अनुभव कर पाएंगे। घर से जुड़ा कोई भी काम किसी एक का नहीं, बल्कि दोनों की जिम्मेदारी है।
आइये जानते हैं क्या कारण है जो अधिकतर पुरुष घर का काम करने से कतराते हैं।
पारंपरिक और सामाजिक सोच

हमारे समाज में सदियों से यह माना जाता रहा है कि घर की जिम्मेदारी महिलाओं की होती हैं, और पुरुषों का काम केवल बाहर जाकर नौकरी करना होता है। इस सोच के चलते अक्सर लड़कियों को बचपन से ही खाना बनाना, सफाई करना और घर के सभी काम सिखाए जाते हैं। इसी वजह से पुरुष घरेलू कामों को अपनी जिम्मेदारी मानने से परहेज़ करने लगते हैं।
परिवार और समाज का नज़रिया
जब कभी पुरुष घर के कामों में रूचि दिखाते है, तो अक्सर उन्हें अपने परिवार, रिश्तेदारों या दोस्तों से ताने सुनने पड़ते हैं। उन्हें पत्नी का गुलाम आदि तक कह दिया जाता है। इस तरह के व्यवहार के कारण पुरुष घरेलू कामों से दूरी बना लेते हैं। कई बार पत्नी भी पति के इस सहयोग को हस्तक्षेप का रूप समझ लेती हैं। इस तरह पुरुषों को जाने-अनजाने ही से इन कामों से हटा दिया जाता है।
जागरूकता की कमी
अधिकांश पुरुषों यह समझना ही नहीं चाहतें हैं कि घर का काम भी एक लम्बा समय लेता है और इसमें काफी मेहनत भी लगती है। उन्हें लगता है यह सब पत्नी की जिम्मेदारी है। इस सोच के पीछे ख़ास वजह है बचपन से ही समानता की शिक्षा का अभाव होना । बचपन से अगर उन्हें यह सिखाया जाए कि घर के काम सबकी जिम्मेदारी हैं, तो भविष्य में यह भेदभाव अपने आप खत्म हो जाएगा। शिक्षा और माता-पिता की भूमिका इसमें काफी महत्वपूर्ण है।
महिलाओं का व्यवहार

कई बार पुरुष मदद करने की कोशिश करते है, लेकिन घर की महिलाएं उनके किए काम की आलोचना करने से पीछे नहीं हटती हैं। काम की आलोचना करने की जगह मिल कर काम करें। इस तरह आप साथ समय भी बिता पाएंगे और काम भी ठीक तरह से समय पर खत्म हो जाएगा। साथ मिलकर काम करने से आप आपस में बातचीत करने का समय भी आसानी से निकाल पाएंगे।
समय या थकावट का बहाना
कुछ पुरुष मानते हैं की महिलाओं की अपेक्षा उन्हें ऑफिस में अधिक काम करना पड़ता है, इसलिए घरेलू काम करने का समय और ताकत उनके पास नहीं बचती है। ये तर्क किसी काम का नहीं है। ऑफिस में बेशक महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनका ऑफिस खत्म होने का समय कई बार एक या दो घंटा पीछे कर दिया जाता है, लेकिन काम में कोई फर्क नहीं होता है।
