बाई के बिना ज्यादातर परिवार मानो अधूरे होते हैं। कुल मिलाकर बाई ने हमारी जिंदगी में कई सारी दिक्कतों को अपने कंधों पर उठाकर रखा है। लेकिन बाई सिर्फ खुशियां नहीं देती है। इसकी वजह से कई दिक्कतें भी हो सकती हैं। बहस करना, छुट्टी करना और रोज खाना खाने के लिए कहना। जी हां, अक्सर ही घर पर काम करने वाली बाई खाना खाने के लिए कह देती हैं। खाना देने में खराबी नहीं है लेकिन हर दफा ये संभव नहीं होता कि आप परिवार के लिए बने सीमित भोजन में से बाई को भी कुछ दे पाएं। अलग बना पाना भी हर बार संभव नहीं है। कभी आप व्यस्त होती हैं तो कभी तुरंत बना देने के लिए कुछ होता नहीं है। अब ऐसे में ये जरूरी है कि बाई को ये बात पहले ही समझा दी जाए कि जब भी खाना देने की स्थिति होगी आप देंगी लेकिन हमेशा ये संभव नहीं होगा। ये सबकुछ समझाने के लिए जरूरी होगा कि आप कुछ बातें ध्यान रखें। कौन-कौन सी हैं वो बातें, जान लीजिए-

खाना खिलाने में हर्ज नहीं

आपको अपनी बात रखते हुए ये बात ध्यान रखनी होगी कि खाना खिलाने में कोई हर्ज नहीं है। जब-जब ऐसी स्थिति आए, खुद से पूछिए बाई को खाना न देने की वजह कहीं नाकारात्मक सोच तो नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं कि आप वो बाई है इसलिए उसे खाना देने से बचती हैं। अगर ऐसा है तो खुद को समझाइए कि किसी का पेट भरना ही सबसे बड़ा पुण्य है। फिर सामने मेहमान हों या बाई, उन्हें खाना खिलाकर खुद को बेहतर इंसान बनाने की कोशिश जरूर कीजिए। 

मकसद कैसा है

बाई जब-जब खाना मांगे या भूखे होने की बात कहे तो एक बात जरूर जज कीजिए, ऐसा तो नहीं वो सिर्फ आपका फायदा उठाने के लिए ऐसा कहती हो। अगर ऐसा आपको लगता है तो आपको उसे बात करनी होगी। समझाना होगा कि आप कभी भी खाना देने में पीछे नहीं हटती हैं अब ऐसे में अगर सिर्फ फायदा उठाने के लिए बाई खाना खाने के लिए कह रही है तो वो गलत है। उसे बताइए कि जब आप किसी तरह का भेदभाव नहीं कर रही हैं तो फिर वो भी ऐसा न करे। वो सच्चे मन से आपको दिल की बात कहे और उसे निराशा कभी भी नहीं मिलेगी। बस सच्चाई से उसको अपने दिल की बात कहनी होगी। 

कर्मों का फल

हम सभी कर्मों के फल की बात मानते ही हैं। बाई से जुड़े इस मुद्दे में भी आपको ये बात याद रखनी होगी कि आप अगर गलत करेंगी तो आपको इसका फल जरूर मिलेगा। वहीं बाई अगर गलत मकसद से आपका फायदा उठाने की कोशिश करेगी तो भी उसको इसका फल जरूर मिलेगा। इसलिए कई बार सिर्फ दूसरों की बेहतरी के लिए सोचते रहना ही अच्छा होता है। इसमें खुद को सोचने पर मजबूर करना खुद को परेशान करने से ज्यादा कुछ नहीं है। इस वक्त आप जिसने जो किया उसको वो मिला वाली सोच को फॉलो कीजिए। देखिएगा समय के साथ आपके सामने सबकुछ आ जाएगा। 

ना नुकुर वाली बाई

कई बाई ऐसी होती हैं, जो अपने स्वाद की बात आपके सामने जरूर रखती हैं। फिर भले ही आप उनको होटल का खाना ही क्यों ना सर्व कर दें, वो अपनी पसंद के हिसाब से ही खाएंगी। वो कह देंगी कि ‘मुझे ये पसंद नहीं’ खाने की बर्बादी या फिर अन्न के अपमान से जुड़ी बातें उन्हें समझ ही नहीं आती हैं। ऐसी बाई को खाना सर्व करना बंद ही कर दीजिए। उन्हें बता दीजिए कि आप स्वाद से पहले अन्न ग्रहण करने को तरजीह देती हैं। इसके बाद देखिएगा या तो वो खाने के लिए कहना बंद कर देंगी या फिर खाने का अपमान करना बंद कर देंगी। 

बासी खानानो या यस

कई परिवारों में ऐसा होता है कि लोग बासी खाना रखते ही बाई को देने के लिए हैं। ये मानवीयता बिलकुल नहीं है। लेकिन वहीं पर अगर आप खुद बासी खा रही हैं और इसके बाद यही खाना बाई से खा लेने की अपेक्षा कर रही हैं तो गलत नहीं हैं। क्योंकि आप खुद भी खा रही हैं तो खाना खाने लायक जरूर है। मगर यहां पर भी कुछ बाई बिलकुल अनोखा व्यवहार करती हैं कि वो बासी नहीं खा सकती हैं। अगर ऐसी स्थिति में आएं तो भी आपको बाई से सख्त रवैया अपनाना होगा। आपको बाई से खाने से जुड़ी किसी भी बात को आगे नहीं बढ़ाना है, ये बात खुद को समझा लीजिए। 

नाराजगी को करें इग्नोर

कई घरों में ऐसा देखा गया है कि बाई खाना मांगने और न दे पाने की स्थिति में नाराज हो जाती हैं। वो आपकी स्थिति को समझने की कोशिश ही नहीं करती हैं। उनको लगता है बाई होने की वजह से उनकी बात को समझा नहीं गया। या अपने चालाकी दिखा दी है। ऐसी बाई को भी आपको सही रास्ता दिखा देना होगा। उन्हें बता दीजिए कि आप उनका ख्याल रखने के लिए ही नहीं हैं। आपका परिवार है और आपको उनका ख्याल पहले रखना होता है। 

 

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