googlenews
expectations vs reality
1ar night after marriage expectations vs reality

Marriage 1st Night: जैसे ही दो लोगों की शादी सम्पन्न होती है वैसे ही उनके मन में अपनी पहली रात को ले कर ख्याल आने लगते हैं। यह हर किसी के लिए एक खास और अनोखा अनुभव होता है इसलिए हम अपने मन में ही बहुत सारी उम्मीदें जगा लेते हैं। हर चीज को लेकर एक्साइटमेंट होती है चाहे वह घूंघट उठाने को लेकर हो या हल्दी वाले दूध को लेकर। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्मों ने हमारे दिमाग में इस चीज को लेकर बहुत सी अलग धारणा बना दी है जो शायद असल जिंदगी में नहीं होती है और जैसा हम सोच लेते हैं वैसा अगर सच में नहीं होता है तो हमें एक प्रकार का धोखा महसूस होता है। यह धोखा नहीं है बल्कि आपने उम्मीदें ही गलत बना कर रखी थी। आज हम आपकी उम्मीदों और हकीकत के बीच जो अंतर है उसे बताने वाले हैं ताकि आप सच्ची और पूरी होने वाली उम्मीद ही लगा कर रखें।

फिल्मों में कैसे दिखाया जाता है?

फिल्मों में पहली रात के कांसेप्ट को बहुत ही अधिक बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जाता है। वह हर चीज को बहुत एक्साइटमेंट से भर देते हैं ताकि दर्शकों को देखने को मजा आ सके। लेकिन असल में ऐसा नहीं होता है। शादी वाले दिन कपल इतने थक जाते हैं कि उन्हें यह सब करने का मन ही नहीं करता है। अगर अरेंज मैरिज है तो कपल्स इस रात को किसी और रात में भी शिफ्ट कर सकते हैं ताकि वह पहले एक दूसरे को अच्छे से जान सकें। लेकिन फिल्मों जैसे ही अपनी उम्मीदें न जगाएं।

ग्लेमरस सेटिंग 

फिल्मों में दिखाया जाता है कि कपल एक दूसरे को शरमाते हुए देखते हैं और एक दूसरे को हाथों से खाना खिलाते हैं जबकि असलियत कुछ और ही होती है। कपल को फेरे से लेकर सारी रस्में पूरी होने तक का इंतजार करना होता है और जब सारी रस्में पूरी हो जाती हैं तब तक अच्छा खाना बचता ही नहीं है और आपको हो सकता है रात थोड़ा बहुत खा कर या भूखे ही सो कर गुजारनी पड़े जिससे आपका मूड भी खराब हो सकता है।

सजा हुआ कमरा

बहुत बार फिल्मों में देख देख कर दुल्हन के मन में यह धारणा बन जाती है कि उसका कमरा सजा हुआ होगा। उसके बेड पर गुलाब की पंखुड़ियां सजी होंगी और उसके स्वागत में बहुत सारे फूल आदि बिछे हुए होंगे लेकिन असल में ऐसा कुछ नहीं होता हैं। यह केवल एक साधारण कमरा मिलता है जो अच्छे से सामान से भरा हुआ होता है और उसे थोड़ा अच्छा फील करवाने के लिए कई बार रूम फ्रेशनर का प्रयोग किया जाता है।

कपड़े उतारने का संघर्ष

फिल्मों में सब कुछ बहुत सेंशुअल तरीके से होता है लेकिन असल में भारतीय दुल्हन के कपड़े बहुत भारी होते हैं और उसकी ज्वैलरी और कपड़े निकालने में बहुत संघर्ष और समय लगता है। अगर दूल्हा चाहे भी तो भी उसकी कोई मदद नहीं कर पाता है क्योंकि उसे पता ही नहीं होता है कि कौन सी चीज कहां से हटानी है इसलिए दुल्हन को अपने ज्वैलरी और हेयर पिन निकालने में बहुत समय लगता है।

थोड़ी अटपटी स्थिति हो जाना

नई शादी हुए जोड़े के कमरे के बाहर बहुत सारे मेहमान और छोटे बच्चे होते हैं जो बहुत अजीब अजीब से आवाजें करते रहते हैं। शादी के दो दिन तक घर में मेहमानों का आना जाना लगा रहता है जो कपल के लिए सभी चीजों को मुश्किल बना देता है।

निष्कर्ष

अगर आप की भी शादी होने जा रही है तो आज आप इस आर्टिकल के माध्यम से केवल वैसी ही इच्छाएं रखें जो सच में पूरी हो सकती है।

यह भी पढ़ें- शादियों में बुजुर्गो की देखभाल कैसे करें