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In-Laws Relationship Tips: ससुरजी का ज्यादा ख्याल रखने से सास तो नहीं परेशान?
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In-Laws Relationship Tips: ससुरजी शब्द सुनने में तो बेहद कठोर और भारी भरकम लगता है। मगर अंदर से उतना ही स्नेह से पूर्ण होता है। पिता को बहू के रूप में एक बेटी मिलती है। जो उनके खाने पीने से लेकर उठने बैठने तक हर चीज़ का बराबर ख्याल रखती है। बहू जब घर की दहलीज़ पर कदम रखती है, तो मानो उसको घर की छत और पति के साथ के अलावा एक पिता का साया भी मिलता है, जो हर कदम पर और मुश्किल वक्त में एक पिता के समान बहू के साथ नज़र आता है। चाहे डॉक्टर का विजिट हो या फिर घर में आने वाला कोई मेहमान, हर काम के प्रति बहू गंभीर दिखाई देती है और उसका यही स्वभाव ससुर जी की नज़रो में उसकी इज्जत को और भी बढ़ाता है। मगर वहीं घर में आई नई नवेली बहू को अधिक मान सम्मान और ज्यादा पूछना कहीं न कहीं सास को थोड़ा सा अटपटा लगता है, जो कई बार उनकी परेशानी का कारण भी साबित होता है।

बात बात पर टोकना

कोई नया सदस्य परिवार में शामिल होता है, तो वो पूरी कोशिश करता है कि किसी प्रकार से सभी सदस्यों को खुश रखा जाए। मगर फिर भी कुछ चीजें ऐसी होती है, जो सास की नज़रो से बच नहीं पातीं। चाहे वो बहू का खानपान हो या पहनावा हर छोटी-बड़ी चीज़ में वो बहू को समझाना नहीं भूलती है। ऐसे में अगर ससुरजी नई दुल्हन के बनाए खाने या फिर उसके पहनावे की तारीफ कर देते हैं, तो ये बात सास के लिए काफी पीड़ादायक होती है।

बहू के खिलाफ भड़काना

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Instigate against daughter-in-law

बुद्धिजीवी बहू अपनी नई और ऊँची सोच के साथ घर में कदम रखती है और वे किसी भी परेशानी का हल चुटकियों से ढूंढ लेती है। मगर उसका ये हुनर जहां ससुरजी को भाता है, तो वहीं ये रवैया सास को रास नहीं आता है। ऐसे में अब सास अपने पति को बहू के खिलाफ किसी न किसी विषय को लेकर भड़काने लगती है, ताकि ससुरजी धीरे धीरे बहू से बात करना बंद कर दें। हालांकि ससुरजी भी अपनी पत्नी की इस सोच से कहीं न कहीं वाकिफ तो होते हैं, मगर अपनी पत्नी के कहे को इंकार भी नहीं कर पाते हैं। 

पति की सहानुभूति हासिल करना

सुर और बहू की आपसी समझ को सास कई बार स्वीकार नहीं कर पाती है। उनके मुताबिक जिस प्रकार वे अपने ससुर से घूंघट में रहती थी। ठीक उसी प्रकार वे नहीं चाहतीं कि उनकी बहू भी ससुरजी से ज्यादा बातचीत करें। ऐसे में अब कईबहु द्वारा किए गए कार्यों में कमियां निकालना बार बहू से छोटी मोटी बहस होने के चलते सास खुद को छोटा और हारा हुआ महसूस करने लगती है। ऐसी स्थिति में वे अपने पति को बहू के खिलाफ भड़काने लगती हैं, ताकि वे अपने पति से सहानुभूति हासिल कर सकें।

बहू द्वारा किए गए कार्यों में कमियां निकालना

घर में बहू के आने के बाद सास की जिम्मेदारियां कम हो जाती है। मगर सास अपने कार्यों में कम करने में जितनी उत्सुक होती है। ठीक उसी प्रकार अपनी जगह पर किसी और को कार्य करता देख उतनी ही व्याकुल भी हो उठती है। चाहे पिताजी का खाना हो या दवा वे बहू के द्वारा हर कार्य में कमियां निकालती हैं। ताकि पूरे घर पर उनका स्वामित्व स्थापित रहे । वे नई पीढ़ी के साथ ढलने के बजाए बहू को भी अपनी ही तरह कार्य करने के लिए मज़बूर करती है और अगर बहू उस प्रकार से कार्य नहीं करती, तो फिर उसके किए कार्यों को गलत बता दिया जाता है।

अपने पति के काम करना

सुर जी की सुबह की चाय की प्याली से लेकर रात की दवा तक बहू हर काम पूरे नियम से करती है। मगर बहू के प्रति ससुरजी का अपार स्नेह देखकर अब वे हर काम को खुद करने का प्रयास करने लगती है। खुद को सर्वोपरि साबित करने के लिए अब सास अपने पति की हर छोटी मोटी जरूरत का सामान खुद जुटाने लगती है, ताकि बहू और ससुरजी आपस में बातचीत न कर पाएं।

घर में होने लगते हैं क्लेश

कई बार जब सास अपनी बाकी योजनाओं में सफल नहीं हो पाती है, तो आंख की किरकिरी बन चुकी बहू को सास चूल्हे चौके से अलग कर देती है। ताकि वे अपने जीवन में व्यस्त रहें और उनकी जिंदगी में न झांके। बेहद जांच पड़ताल और जानकरी हासिल करने के बाद जिस बहू को गृह प्रवेश करवाया था, उसी बहू को घर से निकालने तक की तैयारी कर ली जाती है।

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