How To Manage Relationship After The Death Of Spouse- मृत्यु जीवन की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है लेकिन किसी प्रियजन को खोना आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर प्रभाव डालता है। खासकर आपके पार्टनर या जीवनसाथी की मृत्यु के बाद जीवन को पहले की तरह सुचारू रूप से चलाना काफी मुश्किल हो जाता है। जीवनसाथी के जाने के बाद आपकी लाइफ में एक खालीपन आ जाता है, जिसे भरना असंभव लगता है। ऐसे में आपके करीबी रिश्ते आपका साथ दे सकते हैं। हालांकि जीवनसाथी के जाने के बाद पूरे परिवार को एक डोर में बांधे रखना काफी चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि छोटी-छोटी चीजों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ा जाए तो स्वयं को और रिश्तों को संभालना आसान बनाया जा सकता है।
मृत्यु कैसे रिश्तों को प्रभावित करती है

जीवनसाथी की मृत्यु के बाद आगे बढ़ना मुश्किल और कष्टकारी लगने लगता है। पति या पत्नी के खोने के बाद रिश्ते तनावपूर्ण या मजबूत हो सकते हैं। जीवनसाथी की मृत्यु के बाद आप हमेशा अकेला महसूस करते हैं और प्रियजनों से अधिक स्नेह की इच्छा रखते हैं। आप जिन चीजों को करना पसंद करते हैं, उन पर हंसना या उनका आनंद लेना आपके लिए मुश्किल हो जाता है। आप दूसरों से अलग महसूस करते हैं। कई बार परिवार के सदस्यों को एक जुट कर पाना आपको चुनौतीपूर्ण लग सकता है।
ऐसे संभालें खुद को और रिश्तों को
खुद को समय दें- पति या पत्नी के बिछुड़ने के बाद खुद को इस दुख से उबारने का समय दें। रातोंरात इस दुख को कम करने का प्रयास न करें। एक पार्टनर शारीरिक रूप की अपेक्षा भावनात्मक रूप से अधिक जुड़े होते हैं। कई बार आप नॉर्मल महसूस कर सकते हैं लेकिन कई बार पुरानी यादें आपके दुख को अधिक बढ़ा सकती हैं। अपने जीवनसाथी की मृत्यु के बाद स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने का प्रयास करें।
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प्रियजनों के साथ रहें- जीवनसाथी की मृत्यु के बाद मन में कई तरह के सवाल आते हैं जैसे पति के निधन के बाद मेरा क्या होगा या पत्नी चली गई अब जीवन कैसे चलेगा आदि। जब भी आपके मन में ऐसे विचार आते हैं तो आप खुद को अकेला न महसूस करें। बच्चे, बहन या परिवार के अन्य सदस्यों के इर्द-गिर्द रहें। इससे आपके मन में अच्छे विचार आएंगे और परिवार को संभालने में भी मदद कर सकेंगे।

बड़े फैसले लेने से बचें- पति या पत्नी की मृत्यु आपके निर्णय लेने के कौशल को कमजोर कर सकती है। अपने जीवन में अचानक से कोई बड़ा परिवर्तन करने से बचें। जैसे अपनी नौकरी, धर्म बदलना, मित्रता समाप्त करना, बहुत जल्दी डेटिंग शुरू करना या मूव ऑन करना। कोई भी बड़ा फैसला सोच समझकर करें जिसमें परिवारजनों की सहमति हो।
खुद को न करें नजरअंदाज- जीवनसाथी की मृत्यु को स्वीकार करने में वर्षों लग सकते हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आपको अपनी व्यक्तिगत जरूरतों को नजरअंदाज कर देना चाहिए। जब आप दुखी होते हैं तो डिप्रेशन आपको अपनी आवश्यकताओं को किनारे करने के लिए प्रेरित कर सकता है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि पर्याप्त नींद लें, भोजन करें और सामाजिक जीवन बनाए रखें। परिवारजनों से अपने दुख और अनुभवों के बारे में बात करें।
