पुरुषों की भांति महिलाएं भी करती हैं डिस्चार्ज: Female Ejaculation
Female Ejaculation

Female Ejaculation: हमारे यहां ऑर्गेज्म को हमेशा रहस्य के परदों में छिपा कर रखा जाता है, जबकि सच तो यह है कि ऑर्गेज्म हमारी सेक्सुअल जिंदगी का एक अहम हिस्सा है। इन दिनों एक खास किस्म के ऑर्गेज्म की बहुत चर्चा हो रही है, जिसे स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म कहा जाता है। हालांकि, कई लोगों ने इसका नाम तो सुना ही होगा लेकिन यह जरूर है कि उनके अंदर इसे लेकर भ्रम जरूर होगा कि क्या यह असल में कोई खास तरह का ऑर्गेज्म है या यूं ही इसकी चर्चा है। आज इस लेख में हम स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म के बारे में सब कुछ जानते हैं। 

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स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म की परिभाषा

Female Ejaculation
Female Ejaculation Defination

स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म को फीमेल इजैकुलेशन भी कहा जाता है। यह एक सेक्सुअल अनुभव है, जिसमें एक महिला ऑर्गेज्म के समय अपने मूत्र मार्ग से तरल पदार्थ छोड़ती है। इससे जुड़ी कई तरह की मिथक और गलत धारणाएं भी हैं, जबकि वैज्ञानिक शोध फीमेल इजैकुलेशन यानी महिला स्खलन को मानते हैं।

महिला के शरीर को समझना

स्क्वॄटग ऑर्गेज्मको समझने के लिए महिला के शरीर की रचना को समझना जरूरी है। महिला प्रजनन प्रणाली में योनि, गर्भाशय ग्रीवा, गर्भाशय और स्केन ग्रंथियों की जोड़ी शामिल होती है, जिसे महिला प्रोस्टेट भी कहा जाता है। ये ग्रंथियां पेशाब मार्ग के आसपास योनि की पूर्वकाल की दीवार पर स्थित होती हैं। स्केन की ग्रंथियां तरल पदार्थ के उत्पादन के लिए जिम्मेदार होती हैं, जो रिलीज होने पर संभोग के दौरान स्क्वॄटग का अहसास दिलाने में योगदान कर सकती है। यह तरल पदार्थ पुरुष प्रोस्टेट तरल पदार्थ की तरह होता है और इसमें प्रोस्टेटिक-स्पेसिफिक एंटीजेन (पीएसए), ग्लूकोज और फ्रूक्टोज जैसे पदार्थ होते हैं।

स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म के पीछे का विज्ञान 

वैज्ञानिक अध्ययनों में स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म को समझने की कोशिश की गई है। 2011 में जर्नल ऑफ सेक्सुअल मेडिसिन में प्रकाशित शोध में उन महिलाओं पर अल्ट्रासाउंड परीक्षण किया गया, जिन्होंने महिला स्खलन का अनुभव किया था। इसके नतीजों में यह बताया गया कि पेल्विस यानी श्रोणि के अंदर एक खास तरह की संरचना है, जिसे महिला प्रोस्टेट या स्केन ग्रंथियों के रूप में जाना जाता है।
सेक्सुअल अराउजल यानी यौन उत्तेजना के समय ये ग्रंथियां तरल पदार्थ से भर जाती हैं और उत्तेजित होने पर संभोग के दौरान पेशाब के मार्ग के जरिए तरल पदार्थ छोड़ती हैं। इस तरल पदार्थ की मात्रा अलग अलग हो सकती है, कुछ महिलाओं को सिर्फ कुछ बूंदों का अनुभव होता है, जबकि अन्य को अधिक मात्रा में स्राव हो सकता है। इस तरल पदार्थ की संरचना भी व्यक्तियों में अलग-अलग होती है, जिसमें पुरुष स्खलन की तरह ही तरल पदार्थ होते हैं।

स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म को लेकर भ्रम 

स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म को लेकर वैज्ञानिक समर्थन प्राप्त है, बावजूद इसके इसे लेकर कई गलत सोच और धारणाएं बनी हुई हैं। इनमें से एक मिथक तो यह है कि महिला स्खलन को अमूमन पेशाब समझ लिया जाता है जबकि सच तो यह है कि स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म के दौरान निकलने वाले तरल पदार्थ में पेशाब की थोड़ी मात्रा हो सकती है। शोध यह कहते हैं कि ज्यादातर तरल पदार्थ स्केन ग्रंथियों से आता है, पेशाब मार्ग से नहीं।

एक अन्य गलत धारणा यह है कि स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म इंटेन्स जी स्पॉट स्टिमूलेशन का परिणाम है जबकि जी स्पॉट अनुभव में योगदान दे सकता है लेकिन यह अकेला कारण नहीं है। कई शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कारकों के इंटरैक्शन से स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म का अनुभव पाने में मदद मिलती है।

बातचीत का महत्व

स्वस्थ संबंधों को बढ़ावा देने के लिए सेक्सुअल अनुभवों को समझना और अपनाना जरूरी है। जब स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म की बात आती है, तो बातचीत जरूरी है। जीवनसाथी को अपनी इच्छाओं और सीमाओं के बारे में खुलकर और ईमानदार रूप से बातचीत करना चाहिए। इस तरह से दोनों को एक सुरक्षित स्थान मिलता है और दोनों खुलकर बात कर पाते हैं, जिससे व्यक्ति डर के बिना अपनी प्राथमिकताएं बताने में मुक्त महसूस करता है।

स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म से जुड़े टिप्स 

जो लोग स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म को लेकर गहराई से जानना और करना चाहते हैं, उनके लिए बातचीत और सहमति जरूरी है। सेक्सुअल रिश्ते में स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म को जानने और पहचानने के लिए यहां कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं- 

खुली बातचीत: एक-दूसरे से अपनी इच्छाओं, बाउंड्री और उम्मीदों के बारे में बात करने से कतराएं नहीं। एक ऐसी जगह बनाएं, जिसमें दोनों पार्टनर अपनी जरूरतों और इच्छाओं को जाहिर करने में सहज महसूस करें।
सहजता है जरूरी: स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म अमूमन तभी होता है, जब व्यक्ति आरामदायक महसूस करता है। ऐसी गतिविधियां करें, जो अच्छा महसूस कराएं, जैसे सेंसुअल मालिश या फिर फोरप्ले के लिए अलग से समय निकालें।
सौम्य स्टिमूलेशन: स्टिमूलेशन के विभिन्न तरीके जैसे जी स्पॉट स्टिमूलेशन और क्लिटोरल स्टिमूलेशन के साथ एक्सपेरिमेंट करें। कुछ लोगों को दोनों करके अधिक आनंददायक महसूस होता है। 
धैर्य और अभ्यास: स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म तुरंत नहीं होता है, इसमें समय लग सकता है। इसके लिए धैर्य और अभ्यास जरूरी है, जिससे महिला का सेक्सुअल अनुभव शानदार होता है। 

निष्कर्ष

स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म एक असल और प्राकृतिक सेक्सुअल चीज है, जिस पर कई शोध और अध्ययन हुए हैं। हालांकि, इसे लेकर कई तरह के भ्रम और धारणाएं हैं लेकिन वैज्ञानिक शोध महिला स्खलन को सहमति देते हैं और इसे ह्यूमन सेक्सुअलिटी का अनोखा पक्ष मानते हैं। स्क्वार्टिंग ऑर्गेज्म के पीछे की रचना और तकनीक को समझने से सेक्सुअल आनंद के इर्द-गिर्द जुड़े बातचीत को अधिक बेहतरी से समझा और बात किया जा सकता है।

स्पर्धा रानी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज ने हिन्दी में एमए और वाईएमसीए से जर्नलिज़्म की पढ़ाई की है। बीते 20 वर्षों से वे लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट लेखन में सक्रिय हैं। अपने करियर में कई प्रमुख सेलिब्रिटीज़ के इंटरव्यू...