सेक्स के दौरान क्लाइमेक्स या चरम आनंद को ही आर्गेज्म कहा जाता है। स्त्रियों में यह स्थिति धीरे-धीरे या देर से आती है इसलिए कई स्त्रियों को इसका अहसास भी नहीं होता है। सेक्सोलाजिस्ट मानते हैं कि मनुष्य देह मल्टिपल आर्गेज्म वाली है जबकि स्त्री को प्रकृति ने पुरुष की तुलना में आर्गेज्म पर ज्यादा बार पहुंचने की क्षमता दी है। लेकिन जहां एक ओर पुरुषों का आर्गेज्म महिलाओं की तुलना में अधिक भरोसेमंद होता है वहीं वह महिलाओं से कम समय के लिए भी होता है। महिलाओं में आमतौर पर यह 20 सेकंड का होता है, जबकि पुरुषों को यह आनंद केवल 5 से 20 सेकंड के बीच ही मिलता है।

वूमेन हैल्थ पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक कपल क्लाइमेक्स पाने के लिए कई फंडे और हथकंडे अपनाते हैं। सेक्स के दौरान क्लाइमेक्स यानी आर्गेज्म तक पहुंचने के लिए फोरप्ले का अहम योगदान होता है। इसके लिए महिलाओं की बॉडी में कुछ ऐसे खास अंग होते हैं जिनके माध्यम से आसानी से आर्गेज्म तक पहुंचा जा सकता है जैसे कि-

ब्रेस्ट:- यह ऐसा बॉडी पार्ट है जिस पर फोरप्ले के दौरान उंगलियों से छेड़छाड़ और सहलाने के जरिए आर्गेज्म तक पहुंचा जा सकता।

मान्स:- जेनिटल के आसपास के एरिया को मान्स कहते हैं। इस एरिया को स्टिम्युलेट करने पर आर्गेज्म तक पहुंचने में आसानी होती है।

गर्दन:- गर्दन पर हाथ फेरने, चूमने से इसकी शुरूआत हो सकती है। यह आर्गेज्म तक पहुंचाने में एक अलग भूमिका रखती है।

होंठ:- होंठों पर किस करना सेक्स को अलग ही अनुभव देता है। इससे सेक्स की गति बढ़ती है और आने वाले आनंद के जरिए चरम अवस्था पर भी पहुंचा जा सकता है।

इन तरीकों को अपनाएं

सिडक्शन:- सेक्स के लिए दोनों पार्टनर का मन से एक दूसरे के लिए तैयार होना बहुत जरूरी है, इसलिए पहले अपने पार्टनर में सेक्स की इच्छा जगाएं और उसे सेक्स के लिए तैयार करें।

पार्टनर को सहज करें:- सेक्स करने में जल्दबाजी न करें बल्कि साथी से पूछें कि उन्हें क्या पसंद है। उन्हें सहज होने का अवसर दें। तभी उन्हें आपका छूना अच्छा लगेगा। उन्हें जताएं कि उनका यूं सहज होना और अच्छा लगना भी आपको उत्तेजित करता है।

फीलिंग्स को एक्सप्रेस करें:-शुरूआत में हो सकता है कि आपको लगे कि आप ऐसे नहीं चाहते या कुछ आपको अच्छा नहीं लग रहा। ऐसे में अपनी भावनाओं को दबाने के बजाए समझें और साथी से से चर्चा करते हुए खुलकर उन्हें बताएं कि आपको कैस और क्या अच्छा लगता है।

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पार्टनर की रेस्पेक्ट:- आप सेक्स केवल अपने लिए नहीं करते हैं बल्कि अपने साथी के लिए भी करते हैं इसलिए अपने साथी पर भी ध्यान दें कि क्या उन्हें आनंद मिल रहा है? उनसे पूछें कि कहीं वह परेशान या बेचैन तो नहीं? अगर आपको पता लगे कि आपका साथी अब और आगे नहीं बढऩा चाहता तो उनकी इस बात का सम्मान करें।

हाव-भाव:- अपने साथी के हाव-भाव पर ध्यान दें। क्या आपके साथी सिसकारियां निकालते हैं? क्या वह आपके हाथ को किसी खास स्थान पर ले जाते हैं? यह सब इस बात के संकेत हैं कि आप सही दिशा में बढ़ रहे हैं। इसलिए बातचीत द्वारा एक दूसरे की इच्छा को जानने का प्रयास करें कि आप और वह क्या चाहते हैं और क्या नहीं। कई लोग इस बारे में बात करने में भी उत्तेजना महसूस करते हैं।

सेन्सेशन:- सेक्स का आनंद उठाने के लिए यह जरूरी है कि दोनों पार्टनर के शरीर का हर अंग मस्तिष्क के साथ और यौन उत्तेजना के अनुसार काम करे। इससे सेक्स में गति आती है और आनंद की प्राप्ति होती है।

सरेंडर:- जब आपको लगे कि आपका साथी पूर्ण रूप से आपकी सहमति और समर्पण चाहता है तो उसके सामने अपने को समर्पित कर दें। सच्चे सुख के लिए सम्पूर्ण यौन क्रिया में रुक-रुक कर ड्राइवर सीट बदलते रहें। जब एक ड्राइवर हो तो दूसरा केवल दर्शक बनकर खुद को उसके हाथों में समर्पित कर दे।

क्लिटोरिस से पाएं ऑर्गेज्म:- महिलाओं को उत्तेजित करने वाले अंग क्लिटोरिस के आसपास उंगलियों से बड़े-बड़े सर्कल बनाएं या रब करें। ऐसा फोरप्ले के दौरान किया जा सकता है। जितना धीरे-धीरे आप इसे करेंगे उतना तेजी से अपने पार्टनर को संतुष्ट करने की ओर बढ़ेंगे।

इन बातों का भी रखें ध्यान

महिलाएं मासिक धर्म के दौरान या उससे पहले सुखद चरम का अनुभव करती हैं, इसका कारण है कि इस समय उनके पेल्विक एरिया में रक्त संचार बढ़ जाता है।

– सेक्स के दौरान पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा कल्पनाशील हो जाती हैं। इस तरह की सेक्सुअल फेंटेसी से उन्हें संतुष्टि तो मिलती ही है, आपसी संबंध भी मजबूत बनते हैं।

– अक्सर कहा जाता है कि महिलाओं को सेक्स के लिए उत्तेजित होने में कम से कम 20 मिनट लगते हैं, लेकिन एक शोध में पता चला है कि किसी पुरुष की कल्पना और फोरप्ले से महिलाएं 10 मिनट में ही उतेजित हो जाती हैं।

– अगर किसी महिला में सेक्स उत्तेजना पैदा नहीं होती तो बर्थ कंट्रोल पिल्स को  बदलकर देखें। कई बार अलग-अलग पिल्स में पाए जाने वाले हार्मोन्स उत्तेजना को प्रभावित करते हैं।

– जिन महिलाओं में अपनी भावनाओं के साथ-साथ आसपास रहने वाले लोगों की भावनाओं व जरूरतों की समझ हो तो ऐसी महिलाएं सेक्स में अच्छी पार्टनर साबित होती हैं। 

क्लाइमेक्स से फील गुड हार्मोन:- वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार सेक्सुअल ऑर्गेज्म सिर्फ शरीर को ही आनंद नहीं पहुंचता, शरीर एवं दिमाग को भी तंदुरुस्त बनाता है। फोरप्ले, प्यार भरे स्पर्श, गले मिलने, चरम आनंद से जो फील गुड हार्मोन शरीर में पैदा होता है उससे तन- मन का स्ट्रेस कम हो जाता है और शांति का अनुभव होता है। एक नई रिसर्च में भी पता चला है कि पुरुषों के सीमेन में मौजूद रसायन महिलाओं के शरीर में रासायनिक बदलाव लाता है, जिससे उनका मूड खुशगवार हो जाता है। सेक्स करते समय पुरुषों के शरीर में ओक्सिटोसीन और प्रोलेक्टिन हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है। ओक्सिटोसीन पुरुषों को आराम महसूस कराता है जबकि प्रोलेक्टिन के कारण उन्हें अच्छी नींद आती है।

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जब पुरुषों में ये खूबियां हों:- डेली मेल में प्रकाशित खबर के मुताबिक, यदि महिलाओं को तुरंत और लगातार सेक्सुअल सेटिस्फेक्शन चाहिए तो पार्टनर उनकी पसंद का होना चाहिए। यह रिसर्च यह जानने के लिए की गई थी कि कि महिलाओं को सेक्सुअल सेटिस्फेक्शन किन वजहों से होता है? सर्वे में कालेज की लड़कियों से ऑर्गेज्म के बारे में पूछा गया? रिसर्च में जाना गया कि महिलाएं पार्टनर की तरफ कितना आकर्षित होती हैं, कितनी बार सेक्स करती हैं, लगातार कितनी बार इन्हें आर्गेज्म होता है। रिसर्च में पाया गया कि सेटिस्फेक्शन लुक्स और कंधों की चौड़ाई पर भी निर्भर करता है। पार्टनर का आत्मविश्वास और इनकम भी महिलाओं को ऑर्गेज्म तक ले जाने में भूमिका निभाती है।

महिलाएं करती हैं ऑर्गेज्म का ढोंग:- एक अध्ययन में पता चला है कि अधिकांश महिलाएं ऑर्गेज्म का ढोंग करती हैं। अध्ययनकर्ताओं के अनुसार सेक्स के दौरान 60 फीसदी महिलाएं चरम आनंद यानी ऑर्गेज्म के बारे में झूठ बोलती हैं। पहले हुए शोधों में यह स्पष्ट हो चुका है कि ज्यादातर महिलाएं सेक्स में ऑर्गेज्म प्राप्त नहीं कर पाती इसका कारण सेक्स फोबिया हो सकता है। इस कारण महिलाएं खुलकर सेक्स को एन्जॉय नहीं कर पाती। सेक्स के दौरान चरम आनंद के बारे में वह अपने पार्टनर से झूठ बोलती हैं जबकि उन्हें यौन संबंधों में ऑर्गेज्म प्राप्त होता ही नहीं है। अपने पार्टनर का दिल रखने या उसे बुरा ना लगे, इस कारण महिलाएं ऑर्गेज्म का नाटक करती हैं।

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