Inspiring Women Power Stories: इस बार हम लेकर आए हैं चार अद्भुत भारतीय महिलाओं की प्रेरक कहानियां, जिन्होंने क्रिकेट, बिजनेस, रक्षा-प्रौद्योगिकी और पत्रकारिता जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई। इनकी सफलता साबित करती है कि अगर जज्बा और मेहनत साथ हो, तो कोई भी मंजिल नामुमकिन नहीं।
हार्ड हिटिंग की मिसाल
8 मार्च 1989 को पंजाब के मोगा में जन्मी हरमनप्रीत कौर आज भारतीय महिला क्रिकेट की पहचान बन चुकी हैं। एक साधारण, निम्नमध्यमव र्गीय सिख परिवार से आने वाली हरमनप्रीत बचपन से ही कुछ अलग करने का सपना रखती थीं। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हरमन अपने पिता हरप्रीत सिंह, जो एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में क्लर्क थे और क्लब लेवल क्रिकेट खेलते थे, से प्रेरित हुईं। वह अक्सर मोहल्ले के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलतीं, वह भी हॉकी स्टिक से। लोगों ने उनके पिता को ताने दिए- ‘लड़की को क्रिकेट क्यों खेलने देते हो?’ पर उन्होंने समाज की परवाह किए
बिना बेटी को बेटे की तरह पाला और उसका हौसला बढ़ाया।
पहचान बनाने की शुरुआत
हरमनप्रीत की जिंदगी का मोड़ तब आया जब कोच कमलदीश सिंह सोढ़ी ने उनके हुनर को पहचाना। उन्होंने हरमन के मातापिता को मनाया कि बेटी को क्रिकेट में आगे बढ़ने दें, और उन्होंने खुद उसकी ट्रेनिंग, क्रिकेट किट और खर्चों की जिम्मेदारी उठाई। हरमनप्रीत ने ग्यान ज्योति पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की, जहां स्कूल ने उसकी फीस माफ की और क्रिकेट का सामान भी उपलब्ध कराया। उनकी दमदार बल्लेबाजी ने जल्द ही सबका ध्यान खींचा और 2009 में उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ टी-20 इंटरनेशनल में भारत के लिए डेब्यू करने का मौका मिला।
संघर्ष और सफलता की कहानी
हालांकि शुरुआती सफलता के बावजूद हरमनप्रीत को नौकरी पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। इसी दौरान पूर्व क्रिकेटर डायना एडुल्जी ने आगे बढ़कर मदद की और उन्हें भारतीय रेलवे में नौकरी दिलवाई, जिससे उनकी क्रिकेट यात्रा को स्थिरता मिली।
हेयर फैशन को दी नयी पहचान

ग्लोबल हेयर इनोवेशन अब भारत में
आज के समय में जब हेयर कलर और केयर सिर्फ स्टाइल का नहीं बल्कि पर्सनैलिटी का हिस्सा बन चुके हैं, वहीं २.OH! ने भारत में प्रीमियम हेयर कलर के मानक बदल दिए हैं। यह ब्रांड दो जोशीली बहनों- रितु विजयवर्गीय और रूही विजयवर्गीय- की सोच और मेहनत का नतीजा है। उनका उद्देश्य था कि भारतीय उपभोक्ताओं को भी वही ग्लोबल क्वालिटी और इनोवेशन मिले, जो दुनिया के बेस्ट ब्रांड्स में देखने को मिलती है।
२.OH ! की टैगलाइन-Crafted In Italy Created For India अपने आप में इस ब्रांड की फिलॉसफी को बयां करती है। इटली में तैयार किया गया यह प्रोडक्ट भारतीय बालों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
रंगों की दुनिया में २.OH का जादू
२.OH का सेमी-पर्मानेंट हेयर कलर कलेक्शन अपने 23 शानदार शेड्स के लिए जाना जाता है। ये रंग न सिर्फ जीवंत और लंबे समय तक टिकने वाले हैं, बल्कि इनकी सबसे बड़ी खासियत है कि ये बालों के प्राकृतिक रंग के साथ सहजता से मिल जाते हैं। ब्रांड की हेयर केयर लाइन में ऐसे उच्च-गुणवत्ता वाले इंग्रेडिएंट्स शामिल हैं जो बालों को गहराई से पोषण देते हैं और रंग करने के बाद भी उन्हें चमकदार और मजबूत बनाए रखते हैं।
ऋतु विजयवर्गीय- सौंदर्य और समर्पण की मिसाल
२.OH की सह-संस्थापक ऋतु विजयवर्गीय का सफर प्रेरणादायक है। एक फैशन और ब्यूटी प्रेमी के रूप में उन्होंने अपनी अकादमिक यात्रा सिडनहैम कॉलेज से एमबीए के साथ पूरी की। बीस से अधिक वर्षों तक उन्होंने त्रश्व, सिटीबैंक और ABN AMRO जैसे नामी संस्थानों में काम कर अपनी पहचान एक सशक्त प्रोफेशनल के रूप में बनाई। कॉर्पोरेट सेक्टर में सफलता के बाद उन्होंने अपने परिवार के डिफेंस सप्लाई बिजनेस से जुड़कर बिजनेस मैनेजमेंट का गहरा अनुभव हासिल किया। लेकिन उनके भीतर का क्रिएटिव मन कुछ नया करने की चाह रखता था- यही चाह बनी २.OH! की नींव।
देश-रक्षा में डिजिटल क्रांति की अगुआ

शैक्षणिक पृष्ठभूमि व आरंभिक यात्रा
श्रीमती के. कामिनी महेश्वरी ने अपनी बैचलर डिग्री इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में प्राप्त की थी, जहां उन्होंने तमिलनाडु के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, थिरुनेलवेली से 1993 में स्नातक की उपाधि हासिल की। इसके बाद वे
विशेष इलेक्ट्रॉनिक्स फेलोशिप कोर्स के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी रक्षा संस्थान (Defence Institue
of advanced Technology (DIAT)), पुणे में 1994 में शामिल हुईं जिसने उन्हें रक्षा-उद्योग की तकनीकी बुनियाद मजबूत बनाने में सक्षम बनाया। इस प्रकार, उनके शैक्षणिक सफर ने उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स व कम्युनिकेशन इंजीनियरी के क्षेत्र में विशेष रूप से तैयार किया, जो बाद
में रक्षा तकनीकों में उनके योगदान का आधार बना।
डीआरडीओ में समर्पित करियर
उन्होंने डीआरडीओ से 1994 में जुड़कर अपनी सेवा-यात्रा आरंभ की। इस प्रकार वे तीस वर्ष से भी अधिक समय से भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला हैदराबाद में प्रोजेक्ट डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं, जहां उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण हथियार नियंत्रण प्रणालियों व कमांड नियंत्रित प्रणालियों के विकास में
नेतृत्व किया है।
पत्रकारिता की नई पहचान

पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, और इस स्तंभ को मजबूत बनाए रखने में कुछ पत्रकार अपनी निर्भीकता और निष्पक्षता से इतिहास रच देते हैं। ऐसी ही एक नाम है- पलकी शर्मा उपाध्याय, जो अपनी तीखी, सटीक और बेबाक पत्रकारिता के लिए भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जानी जाती हैं।
करियर की शुरुआत और संघर्ष का दौर
पलकी शर्मा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दूरदर्शन से की, जो भारत का सबसे बड़ा प्रसारण नेटवर्क है। वहां उन्होंने बतौर न्यूज एंकर और रिपोर्टर काम किया और अपनी सधी हुई प्रस्तुति और गंभीर विषयों पर संवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने 2004 में हिंदुस्तान टाइम्स से जुड़कर प्रिंट मीडिया में कदम रखा। फिर उन्होंने सीएनएन-न्यूज-18 (तत्कालीन आईबीएन) में एंकर और सीनियर एडिटर के रूप में काम किया, जहां उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को गहराई से कवर किया।
पुरस्कार और सम्मान
पलकी शर्मा की मेहनत और ईमानदारी को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है
1.2007 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ समाचार वाचक पुरस्कार मिला।
2. ENBA अवॉर्ड (2020) में उनके शो Gravitas को Best International News Shows (English) का खिताब दिया गया।
