Women Success Story: आज की भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं, चाहे मंच सौंदर्य का हो, खेल का या नेतृत्व का। वे सीमाओं को तोड़कर अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से नई पहचान बना रही हैं। ‘हम किसी से कम नहीं’ कॉलम का उद्देश्य ऐसी ही प्रेरक महिलाओं की कहानियां सामने लाना है।
दुबई राजघराने का हीरा
दुबई की राजकुमारी शेखा महरा बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम, संयुक्त अरब अमीरात के प्रधानमंत्री और दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की बेटी हैं। वे सिर्फ एक शाही परिवार की सदस्य ही नहीं, बल्कि आधुनिक युग की स्वतंत्र सोच रखने वाली युवती हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि कैसे परंपरा और आधुनिकता को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सकता है। उनकी लोकप्रियता केवल अमीरी तक सीमित नहीं है- बल्कि उनकी सादगी, मानवीय
दृष्टिकोण और प्रेरणादायक जीवनशैली ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है।
शेखा महरा की शादी साल 2023 में दुबई के राजघराने के सदस्य शेख मनहेल बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम से हुई। इस शादी ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं।
उनकी सगाई की अंगूठी की कीमत लगभग 1 मिलियन डॉलर (करीब 8 करोड़ रुपये) बताई जाती है। शादी की तैयारियां, डिजाइनर ड्रेस, महंगे गहने और सजावट सब कुछ शाही अंदाज में किया गया था। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों ने साबित कर दिया कि शेखा महरा की शादी किसी सपनों के जश्न से कम नहीं थी।
शेखा महरा का घर दुबई के बीचोंबीच स्थित एक शानदार पैलेस है, जिसमें आलीशान सुविधाओं की भरमार है। महंगे झूमर, प्राइवेट जिम, स्विमिंग पूल और विदेशी इंटीरियर से सजा उनका महल किसी शाही स्वर्ग जैसा लगता है। हालांकि उनकी कुल नेट वर्थ का सही आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है, परंतु यह अनुमान लगाया जाता है कि उनकी संपत्ति कई अरब डॉलर में है। वे अपने निवेश, पारिवारिक व्यापार और ब्रांड प्रमोशन से करोड़ों की कमाई करती हैं। शेखा महरा की आमदनी सिर्फ उनके शाही
परिवार से नहीं आती। उन्होंने कई क्षेत्रों में निवेश किया है।
शेखा महरा
(समाज सेविका)
सपनों को रंग देने वाली

फाल्गुनी संजय नायर, यह नाम आज भारतीय कॉर्पोरेट दुनिया में आत्मविश्वास, साहस और दृष्टि का प्रतीक बन चुका है। ब्यूटी और लाइफस्टाइल ब्रांड ‘नायका’ की संस्थापक और सीईओ के रूप में उन्होंने यह साबित किया कि उम्र या लिंग किसी भी सपने की उड़ान को सीमित नहीं कर सकते। अपने अनुभव, समझ और जुनून के बल पर उन्होंने नायका को एक ऐसा ब्रांड बनाया, जो आज
हर भारतीय महिला के ब्यूटी रूटीन का हिस्सा है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
फाल्गुनी नायर का जन्म 19 फरवरी 1963 को मुंबई के एक गुजराती परिवार में हुआ। उनके पिता एक छोटी बियरिंग कंपनी चलाते थे, और मां उस व्यवसाय में उनकी मदद करती थीं। यही पारिवारिक माहौल उनके भीतर व्यापार की समझ और आत्मनिर्भरता की भावना लेकर आया। उन्होंने सिडेनहैम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स, मुंबई से बी.कॉम की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने भारत के प्रतिष्ठित भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद (आईआईएमए) से
1985 में प्रबंधन की पढ़ाई पूरी की। वहीं से उन्होंने अपने जीवन की दिशा तय की- एक ऐसा रास्ता जो उन्हें भारत की सबसे सफल महिला उद्यमियों में शामिल करेगा।
व्यक्तिगत जीवन
फाल्गुनी नायर का निजी जीवन उतना ही प्रेरणादायक है जितनी उनकी व्यावसायिक यात्रा। उन्होंने वर्ष 1987 में संजय नायर से विवाह किया, जो प्राइवेट इक्विटी फर्म केकेआर इंडिया के सीईओ हैं। दोनों की मुलाकात आईआईएम अहमदाबाद में पढ़ाई के दौरान हुई थी, जहां से उनकी साझेदारी ने एक मजबूत रिश्ता और समान सोच की नींव रखी। उनके जुड़वां बच्चे, अद्वैत नायर और अंचित नायर आज उनके साथ नायका की सफलता को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं।
करियर की शुरुआत
फाल्गुनी ने अपने करियर की शुरुआत ए.एफ फेरगुसन एंड को में सलाहकार के रूप में की। कुछ सालों बाद उन्होंने कोटक महिंद्रा ग्रुप जॉइन किया, जहां उन्होंने विलय और अधिग्रहण विभाग की प्रमुख के रूप में शानदार कार्य किया। 2022 में फोर्ब्स इंडिया रिच लिस्ट में उन्होंने 44वां स्थान हासिल किया।
फाल्गुनी नायर
(उद्यमी)
शिक्षा को दी नयी दिशा

डॉ. मुनीरा साहेब दत्तानी एक प्रभावशाली उद्यमी, न्यूरोपेडियाट्रिक विशेषज्ञ और प्रारंभिक बाल विकास सलाहकार हैं। वे ‘टिकल राइट’ की सह-संस्थापक हैं- यह एक ऐसा अभिनव प्रोग्राम है जो छोटे बच्चों के मस्तिष्क के दाहिने हिस्से के विकास पर केंद्रित है। कंपनी में वे शोध और पाठ्यक्रम
विभाग का नेतृत्व करती हैं और बच्चों के सीखने के तरीकों को नए आयाम दे रही हैं।
पृष्ठभूमि और विशेषज्ञता
डॉ. मुनीरा दत्तानी ने अपने करियर की शुरुआत एक प्रमाणित फिजिकल थेरेपिस्ट के रूप में की। उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध नायर हॉस्पिटल में कई वर्षों तक ऐसे बच्चों के साथ कार्य किया जो न्यूरोलॉजिकल और विकास संबंधी विकारों से जूझ रहे थे। इस अनुभव ने उन्हें यह गहराई से समझाया कि बचपन के शुरुआती वर्ष (जन्म से 8 वर्ष तक) बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए
सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यही समझ बाद में के पाठ्यक्रम की नींव बनी। उनके कार्य ने यह सिद्ध किया कि अगर सही दिशा में मस्तिष्क को प्रशिक्षित किया जाए तो हर बच्चा अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच सकता है।
टिकल राइट की स्थापना
डॉ. मुनीरा दत्तानी ने अपने पति प्रणय दत्तानी के साथ मिलकर स्थापना की। यह एक ऐसा
कार्यक्रम है जो 1.5 से 7 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए विशेष रूप से बनाया गया है।
डॉ. मुनीरा साहेब दत्तानी
(उद्यमी)
पहली भारतीय मिसेज यूनिवर्स

शेरी सिंह का नाम अब इतिहास में दर्ज हो गया है, क्योंकि वह पहली भारतीय महिला हैं जिन्होंने मिसेज यूनिवर्स का खिताब जीता है। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने न केवल अपनी खूबसूरती से
बल्कि अपनी बुद्धिमत्ता, विनम्रता और सामाजिक दृष्टिकोण से भी जजों का दिल जीता। उन्होंने मंच पर महिला सशक्तिकरण और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर अपने विचार रखे, जो हर महिला के दिल को छू गए।
महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल
शेरी सिंह की सफलता उन सभी विवाहित महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो विवाह और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को सहेजकर आगे बढ़ना चाहती हैं। उन्होंने यह साबित किया कि शादी या मातृत्व किसी भी महिला की पहचान को सीमित नहीं कर सकता। उनके आत्मविश्वास ने
दिखाया कि अगर नीयत और मेहनत सच्ची हो, तो गांव की बेटी भी दुनिया के सबसे
बड़े मंच पर चमक सकती है।
दबंग राजनीतिक परिवार की बेटी
शेरी सिंह का संबंध ग्रेटर नोएडा के मकौड़ा गांव के एक सम्मानित गुर्जर परिवार से है। उनके दादा स्वर्गीय महेंद्र सिंह भाटी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक प्रभावशाली नेता थे और दादरी विधानसभा से विधायक रह चुके थे।
शेरी सिंह
(मिसेज यूनिवर्स)
