Pooja Bedi
Pooja Bedi

Summary: पूजा ने देखा शादी के बाद एक मुश्किल दौर

पूजा बेदी का जीवन बिल्कुल बदल गया क्योंकि वे एक बेहद ही रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार में शादी करके गई थीं। वे जानती थीं कि उनके पति फ़रहान फर्नीचरवाला का परिवार उनकी बोल्ड, ग्लैमरस छवि को स्वीकार नहीं कर सकता था।

Pooja Bedi Bollywood Exit: जब एक्ट्रेस पूजा बेदी ने विषकन्या (1991) और जो जीता वही सिकंदर (1992) से फिल्मों में कदम रखा, तो वे रातों-रात सनसनी बन गईं। भारतीय मर्लिन मुनरो कहलाई जाने वाली पूजा ने कुछ ही सालों में बड़ी लोकप्रियता हासिल की। लेकिन इसी ऊंचाई के समय उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली। हाल ही में एक इंटरव्यू में पूजा ने अपने जीवन के उस कठिन दौर को याद करते हुए बताया कि उन्होंने एक्टिंग क्यों छोड़ दी थी।

पूजा बेदी ने एक पॉडकास्ट में अपने बचपन, करियर और पत्नी-मां बनने के बाद की जिंदगी पर बात की। जब उनसे बॉलीवुड छोड़ने के कारण पूछे गए, तो उन्होंने बताया कि शादी के बाद उनका जीवन बिल्कुल बदल गया क्योंकि वे एक बेहद ही रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार में शादी करके गई थीं। उन्होंने कहा कि उनके पति फ़रहान फर्नीचरवाला का परिवार उनकी बोल्ड, ग्लैमरस छवि को स्वीकार नहीं कर सकता था।

पूजा ने कहा, “मैं हर काम 100% देती हूं। जब मेरी शादी होने वाली थी, तो मुझे साफ महसूस हुआ कि मेरे पति एक बेहद रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार से आते हैं। उनकी बहू एक ‘सेक्सी एक्ट्रेस’ नहीं हो सकती थी। दोनों परिवारों में पहले ही शादी को लेकर बहस और असहमति थी। मैं नहीं चाहती थी कि मेरी शादी शुरू ही झगड़ों के माहौल में हो, इसलिए मैंने एक्टिंग छोड़ दी और कुछ और करने का फैसला किया।”

Pooja Bedi in a Still
Pooja Bedi in a Still

पूजा और फ़रहान ने तमाम मुश्किलें झेलकर शादी की। दो बच्चों की परवरिश की लेकिन साल 2003 में यानी 9 साल बाद वे अलग हो गए। यह समय पूजा की जिंदगी का सबसे दर्दनाक दौर था। इस दौरान उन्होंने एक के बाद एक कई अपनों को खो दिया। पूजा बताती हैं, “जब मैं 27 साल की थी, दुखों का सिलसिला शुरू हुआ। मेरी दादी कैंसर से चल बसीं, मेरा कुत्ता मर गया और वो शख्स जिसकी गोद में मैं बचपन से पली-बढ़ी थी, वो भी गुजर गए। मेरी मां लैंडस्लाइड में मारी गईं और मेरे भाई ने आत्महत्या कर ली। इसके बीच मेरी शादी टूट गई, और मेरे दो बच्चे भी थे। मुझे बिना कोई भरण-पोषण दिए तलाक मिला। मैं 32 साल की थी और खूब डरी हुई थी।” उन्होंने कहा कि हर छह महीने में उनकी जिंदगी से कोई न कोई बहुत करीबी व्यक्ति चला जाता था। वे बताती हैं, “मैंने आसमान की तरफ देखकर कहा – भगवान, क्या थोड़ा धीरे-धीरे नहीं हो सकता?”

इसी कठिन दौर में पूजा ने लिखना शुरू किया। वे बताती हैं, “मैंने कॉलम लिखने शुरू किए। देखते-देखते एक साल के भीतर मैं वैसी ही मर्सिडीज चला रही थी जो मेरा पति चलाता था।” पूजा बताती हैं कि तलाक में उन्हें कुछ भी नहीं मिला, जबकि वे अपने पति का बिज़नेस खड़ा करने में साथ थीं। उनका कहना है, “मैं चाहती तो लड़ाई करती, अपना हिस्सा मांगती, पर मैंने ऐसा नहीं किया। मुझे आगे बढ़ना था।” पूजा कहती हैं, “अगर आप किसी के साथ 12 साल खुश रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि अगले 50 साल दुख सहते रहें। कभी-कभी छोड़ देना ही सही होता है।”

ढाई दशक से पत्रकारिता में हैं। दैनिक भास्कर, नई दुनिया और जागरण में कई वर्षों तक काम किया। हर हफ्ते 'पहले दिन पहले शो' का अगर कोई रिकॉर्ड होता तो शायद इनके नाम होता। 2001 से अभी तक यह क्रम जारी है और विभिन्न प्लेटफॉर्म के लिए फिल्म समीक्षा...