Summary : पलामू के पर्यटन स्थल और इसकी ख़ास बात
सर्दियों की हल्की धूप में जब कोयल नदी के किनारे धुंध उतरती है तो यह इलाका किसी पुराने लोकगीत जैसा प्रतीत होता है। हर साल दिसंबर-जनवरी में यहाँ सैलानियों की चहल-पहल बढ़ जाती है।
Palamu Picnic Spots: झारखंड के दक्षिण-पश्चिम में बसा पलामू जिला प्रकृति, इतिहास और रोमांच तीनों का अद्भुत संगम है। साल और सखुआ के गहरे जंगलों, प्राचीन किलों और झरनों की गूंज से यह धरती जीवंत लगती है। सर्दियों की हल्की धूप में जब कोयल नदी के किनारे धुंध उतरती है तो यह इलाका किसी पुराने लोकगीत जैसा प्रतीत होता है। हर साल दिसंबर-जनवरी में यहाँ सैलानियों की चहल-पहल बढ़ जाती है। परिवारों, दोस्तों और यात्रियों के बीच यह अब झारखंड का नया पिकनिक स्वर्ग बन चुका है।
पलामू टाइगर रिज़र्व

पलामू टाइगर रिज़र्व देश के सबसे पुराने अभयारण्यों में एक है। इसे 1974 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के तहत स्थापित किया गया था। 1100 वर्ग किलोमीटर में फैला यह वनक्षेत्र बाघ, हाथी, तेंदुआ, सांभर और असंख्य पक्षियों का घर है। कोयल और औरंगा नदियाँ इसे जीवन देती हैं। पिकनिक के लिए बेतला क्षेत्र सबसे लोकप्रिय है। सुबह की ठंडी हवा, पेड़ों की छाँव में चहकते पंछी और दूर जंगल से आती बाघ की दहाड़। यह सब कुछ किसी रोमांचक कथा जैसा है। कोयल नदी किनारे पिकनिक मनाने या वॉचटावर से जंगल देखने का आनंद कभी नहीं भूलने वाला है।
मलय डैम
मेदिनीनगर से लगभग 20 किलोमीटर दूर नोरी नदी पर बना मलय डैम एक शांत और सुंदर पिकनिक स्थल है। चारों ओर फैले पहाड़ और नीले जल का विस्तार इसे मन को भाने वाला दृश्य बनाते हैं। यहाँ बोटिंग का मज़ा लिया जा सकता है, जबकि किनारों पर फैले घास के मैदान बच्चों और परिवारों के लिए आदर्श हैं। शाम के वक्त जब डूबते सूरज की सुनहरी किरणें पानी पर पड़ती हैं तो लगता है जैसे प्रकृति ने रंगों से खेल रचा दिया हो।
कुंड वॉटरफॉल

लेस्लीगंज के पास, घने जंगलों में छिपा कुंड वॉटरफॉल प्रकृति की गोद में शरण लेने जैसा अनुभव देता है। करीब 100 फीट ऊँचाई से गिरती जलधारा का शोर और उसके नीचे पसरी शांति दोनों मिलकर अद्भुत संतुलन बनाते हैं। यहाँ बैठकर पानी में पैर डालना, पेड़ों की छाँव में सुकून से समय बिताना या ट्रेकिंग पर निकल जाना। हर अनुभव आत्मा को तरोताज़ा करता है। जनवरी के महीने में यहाँ स्थानीय उत्सव का माहौल रहता है, जो इस जगह को और भी आकर्षक बना देता है।
कोयल रिवर फ्रंट
मेदिनीनगर के पास बहती कोयल नदी शहर की रफ्तार से थके लोगों को शांति देती है। किनारों पर बिछी सफेद रेत, हरे मैदान और दूर पहाड़ों की रेखा। यह सब मिलकर एक सुंदर दृश्य रचते हैं। यहाँ सुबह की सैर, फोटोग्राफी या नदी किनारे चाय पीते हुए बातें करना हर किसी को भाता है। पास में स्थित राजा पहाड़ी मंदिर इसे धार्मिक महत्व भी देता है।
पलामू फोर्ट

औरंगा नदी के किनारे स्थित पलामू किला 16वीं शताब्दी में चेरो राजाओं ने बनवाया था। पुराना और नया दो किलों की ये जोड़ी आज भी शौर्य और वैभव की याद दिलाती है। टूटती दीवारों पर उगी काई, धूप की परछाइयाँ और हवा में बसी इतिहास की गंध सब मिलकर इस जगह को रहस्यमय बना देती हैं। यहाँ का वातावरण इतना शांत है कि लगता है जैसे बीते युगों की आवाज़ अब भी हवा में तैर रही हो।
पलामू केवल एक ज़िला नहीं, बल्कि एक जीवंत स्मृति है। जहाँ जंगल बोलते हैं, नदियाँ गाती हैं और इतिहास सांस लेता है। चाहे आप रोमांचक सफ़ारी के प्रेमी हों या प्रकृति के साधक, पलामू हर रूप में आपको कुछ न कुछ दे जाएगा।
