Summary: प्रकृति और संस्कृति का संगम महाराष्ट्र का कोंकण तट
महाराष्ट्र का कोंकण तट अरब सागर और सह्याद्रि की पहाड़ियों के बीच फैला हुआ एक अनोखा प्राकृतिक खज़ाना है। लगभग 720 किमी लंबाई वाला यह इलाका समुद्र की लहरों, नारियल-सुपारी के पेड़ों, लाल मिट्टी और शांत गाँवों से मिलकर ऐसा दृश्य रचता है जो हर यात्री को मोहित कर देता है।
Konkan Trip: महाराष्ट्र का कोंकण तट अरब सागर और सह्याद्रि की पहाड़ियों के बीच लगभग 720 किमी लंबाई में फैला है। इसे महाराष्ट्र की प्राकृतिक धरोहर कहा जाता है। यहाँ समुद्र की गूँज, नारियल और सुपारी के पेड़ों की कतारें, लाल मिट्टी और शांत गाँव मिलकर ऐसा दृश्य प्रस्तुत करते हैं जो यात्री को बार-बार लौटने के लिए मजबूर कर देता है। कोंकण रेलवे से यात्रा करते समय जब एक ओर नीला समुद्र और दूसरी ओर हरे-भरे पर्वत दिखाई देते हैं, तब यह क्षेत्र और भी मनमोहक लगता है। इस लेख में हम ऐसी जानकारी दे रहे हैं ताकि कम समय में ज्यादा घूम पाएं।
प्राकृतिक छटा से भरपूर स्थल
कोंकण की पहचान इसके निर्मल समुद्र तटों, प्राचीन किलों, बैकवॉटर, और समृद्ध समुद्री भोजन से है। रत्नागिरी का हापुस आम, गणपतिपुले का समुद्र तट और मंदिर, मालवन का सिंधुदुर्ग किला, तर्कर्ली का स्वच्छ पानी और डॉल्फ़िन सफ़ारी, देवबाग का सैंडबार और दापोली-हरनई का डॉल्फ़िन प्वाइंट इस क्षेत्र को अद्वितीय बनाते हैं। जिसकी वजह से देश विदेश से सैलानी आते हैं।
पहला दिन: रत्नागिरी – गणपतिपुले

यात्रा की शुरुआत रत्नागिरी से करें। यहाँ से 25 किमी दूर स्थित गणपतिपुले अपने समुद्र किनारे बने प्राचीन गणपति मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर का देवता स्वयंभू माने जाते हैं। इसके सामने का बीच साफ़ और शांत है। दोपहर में समुद्र किनारे बने स्थानीय रेस्टोरेंट में मालवणी थाली का स्वाद लें, जिसमें नारियल आधारित करी, ताज़ी मछली और सोलकढ़ी अनिवार्य रूप से परोसी जाती है। शाम के समय आरे-वारे बीच रोड पर ड्राइव करें, यहाँ से सूर्यास्त का नज़ारा अविस्मरणीय होता है।
दूसरा दिन: मालवन – सिंधुदुर्ग – तर्कर्ली

सुबह जल्दी मालवन की ओर निकलें। यहाँ समुद्र के बीच स्थित सिंधुदुर्ग किला शिवाजी महाराज की अद्भुत समुद्री रणनीति का प्रमाण है। नाव से पहुँचकर किले की प्राचीर पर चलते हुए आप इतिहास की गूँज महसूस कर सकते हैं। दोपहर बाद पास के तर्कर्ली बीच पर जाएँ, जो अपने स्वच्छ और पारदर्शी पानी के लिए जाना जाता है। यहाँ स्नॉर्कलिंग, स्कूबा डाइविंग और ग्लास-बॉटम बोट राइड जैसी गतिविधियाँ पर्यटकों को समुद्री जीव-जंतुओं से करीब से रूबरू कराती हैं। शाम को करली नदी के बैकवॉटर में नौकायन करें। यहाँ की शांति और हरियाली मन को सुकून देती है। ठहरने के लिए तर्कर्ली व देवबाग में एमटीडीसी के कॉटेज और निजी होमस्टे आरामदायक विकल्प हैं।
तीसरा दिन: देवबाग – डॉल्फ़िन सफ़ारी

सुबह-सुबह देवबाग सैंडबार पर जाएँ, जहाँ करली नदी और अरब सागर का संगम होता है। यहाँ का दृश्य बेहद मनोहारी है। इच्छुक यात्री डॉल्फ़िन सफ़ारी या कायकिंग का भी आनंद ले सकते हैं। दोपहर के भोजन में उकडीचे मोदक और समुद्री पकवानों का स्वाद लेकर वापसी की तैयारी करें।
कुछ और महत्वपूर्ण जानकारी
कोंकण तक पहुँचना अपने आप में सफ़र का आनंद है। रेल मार्ग से रत्नागिरी, कुदाल और सावंतवाड़ी रोड जैसे स्टेशन इस तटीय पट्टी को सीधा जोड़ते हैं, जहाँ ट्रेन की खिड़की से सह्याद्रि और समुद्र की झलक दिल को छू लेती है। हवाई मार्ग से आने वालों के लिए सिंधुदुर्ग का चिपी एयरपोर्ट और गोवा का मोपा एयरपोर्ट सुविधाजनक विकल्प हैं। सड़क मार्ग पर मुंबई और पुणे से गुजरता हुआ एनएच–66 यानी मुंबई–गोवा हाईवे यात्रियों को कोंकण की ओर खींच ले जाता है।
खानपान की बात करें तो यहाँ कोकम और नारियल की महक हर व्यंजन में बसती है। सोलकढ़ी की ताज़गी, फिश थाली का स्वाद, मसालेदार मालवणी चिकन और मौसम में हापुस आम, ये सब कोंकण को खास बनाते हैं। ठहरने के लिए समुद्र किनारे बने बीच–रिसॉर्ट लक्ज़री अनुभव देते हैं, जबकि सादगी चाहने वालों के लिए स्थानीय होमस्टे आत्मीयता से भरे विकल्प हैं।
