क्या आपने देखा है इंडियन रेलवे का कोंकण रेलवे रीजन: Konkan Railway Region
Konkan Railway Region

Konkan Railway Region: ट्रेन से यात्रा करने का अपना एक अलग ही अनुभव है। चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट भी बच्चों के अंदर रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए पेरेंट्स को सलाह देते हैं कि बच्चों को रेल की यात्रा कराई जाए। रेल के अंदर देखें तो यह अपने आप में एक चलती-फिरती दुनिया है और जब आप इसकी खिड़की से बाहर झांकते हैं तो यह अपने साथ सड़क, हवा, बादल और प्रकृति को भी अपने साथ लेकर सरपट भागती चली जाती है। अगर आप भी रेल यात्रा के जरिए कुछ अलग एक्सप्लोर करने की तलाश में हैं तो इस बार इंडियन रेलवे का कोंकण रेलवे रीजन आपको जरुर देखना चाहिए। यह रीजन देश ही नहीं दुनिया के खूबसूरत रेलवे सफर के लिए जाना जाता है। यहां से गुजरने वाली ट्रेन से आप प्रकृति का भरपूर आनंद ले सकते हैं।

कोंकण रेलवे मुंबई और मंगलोर को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है| 736 किमी लंबी यह लाइन महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक राज्यों को जोड़ती है जो एक ऐसा क्षेत्र है जहां आर-पार बहती नदियां, गहरी घाटियां और आसमान छूते हुए पहाड़ हैं। इस यात्रा में आपको कुल 59 स्टेशन मिलेंगे। कोंकण रेलवे पश्चिमी घाट में अरब सागर के समानांतर चलती है। पूरे सफर के दौरान यह कई नदियों, पहाड़ों और अरब सागर को पार करते हुए गुजरती है।

नजर आते हैं पुल, सुरंगे और समुद्र की लहरें

ट्रेन जब पुल से गुजरती है तो उस समय उसकी आवाज में एक जाूद आ जाता है। अगर आप भी इस मोहपाश में बंधना चाहते हैं तो यह रेल रुट आपका स्वागत कर रहा है। इस पर 2 हजार पुल, 92 सुरंगे हैं। ऐसे में आप सोच सकते हैं कि 18 घंटे का यह सफर कितना रोमांचक रहने वाला है। इस रेल रुट का निमार्ण 1998 में हुआ। जाहिर है कि 92 सुरंगे हैं तो ऐसा लगता है जैसे रेल एक सुरंग में घुसती है और निकलने के बाद दूसरे सुरंग में घुस जाती है। पहाड़ों को काटकर कोंकण रेल के लिए रास्ते बनाए गए हैं। यह रेल गोवा में 105 किलोमीटर का बड़ा इलाका तय करती है। ऐसे में समुंद्र भी काफी दूर तक इस ट्रेन के साथ होता है। इसमें जुआरी नदी पर बना पुल सबसे अलग है। बात गर सुरंग की करें तो कारबुडे सुरंग 6.5 किलोमीटर के दायरे में होने के कारण सबसे लंबी है। इस सुरंग को पार करने में ट्रेन 12 मिनट का समय लेती है।

तो कैसे करना होगा प्लान

अगर आपने कोंकण रूट को देखना का मन बना लिया है तो आप आराम से अपने दो दिन इस रुट को समर्पित कर दें। सुबह मुंबई से चलने वाली किसी ट्रेन में बैठ जाइए और गोवा के एंट्री स्टेशन मडगांव पहुंच जाइए। इस मार्ग पर लंबी-लंबी सुरंगें आपको देखने मिलेंगी। मडगांव से मंगलौर तक किसी भी ट्रेन को बुक करें और कभी न भूलने वाले एक अनुभव के लिए तैयार हो जाएं। बारिश का मौसम इस रुट के लिए परफैक्ट है। इस समय झरने भी उफान पर होते हैं और हरियाली उसका तो कहना ही क्या?