Maha Shivaratri 2025
Maha Shivaratri 2025

Sawan 2024 Date: हिमालय की पवित्र चोटियों से निकलकर गंगा मैदानी इलाकों में प्रवाहित होती है, तो वहीं श्रावण का पवित्र महीना धरती पर मानो भगवान शिव का आशीर्वाद बरसाता है। इस मास को भोलेनाथ का प्रिय माना जाता है, जहाँ प्रकृति भी हरियाली और ठंडी पवन से शिव की जटाओं का स्पर्श देती है। श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व होता है। इन दिनों शिवभक्त भक्तिभाव से सराबोर होकर उनका जलाभिषेक करते हैं, बेलपत्र चढ़ाते हैं और “ॐ नमः शिवय” मंत्र का जाप करते हैं। आइए, इस साल 2024 के श्रावण मास में पड़ने वाले प्रमुख व्रतों और त्योहारों, जैसे सोमवार व्रत, मंगला गौरी व्रत और श्रावण शिवरात्रि के बारे में विस्तार से जानते हैं। साथ ही यह भी जानेंगे कि इस पावन महीने में भगवान शिव को कैसे प्रसन्न किया जा सकता है।

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कब से कब तक चलेगा सावन

सावन का पावन महीना आ गया है, जो भगवान शिव की आराधना और आध्यात्मिक उन्नति का उत्तम समय माना जाता है। इस साल 2024 में, सावन मास का प्रारंभ 22 जुलाई, सोमवार से हो रहा है और 19 अगस्त, सोमवार को इसका समापन होगा। पंचांग के अनुसार, सावन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 21 जुलाई, रविवार को दोपहर 03:46 बजे से शुरू होगी और 22 जुलाई, सोमवार को दोपहर 01:11 बजे तक मान्य रहेगी। उदयातिथि के आधार पर सावन मास 22 जुलाई से आरंभ हो जाएगा। सावन के पहले दिन प्रीति योग और श्रवण नक्षत्र का योग बन रहा है। प्रीति योग प्रातःकाल से लेकर शाम 05:58 बजे तक रहेगा, वहीं श्रवण नक्षत्र प्रातःकाल से लेकर रात 10:21 बजे तक रहेगा। सावन मास में सोमवार का व्रत रखना विशेष फलदायी माना जाता है। इस साल सावन में पांच सोमवार पड़ेंगे।

कब है मंगला गौरी व्रत

मंगला गौरी व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन माता गौरी की पूजा करने से सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन में खुशियां और पति की दीर्घायु का वरदान प्राप्त होता है।

व्रत की तिथियां

पहला मंगला गौरी व्रत: 23 जुलाई, 2024 (सोमवार)
दूसरा मंगला गौरी व्रत: 30 जुलाई, 2024 (सोमवार)
तीसरा मंगला गौरी व्रत: 6 अगस्त, 2024 (सोमवार)
चौथा मंगला गौरी व्रत: 13 अगस्त, 2024 (सोमवार)

व्रत के कुछ खास नियम

व्रत की पूर्व संध्या पर स्नान कर घर की साफ-सफाई करनी चाहिए। व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर माता गौरी की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए।
माता गौरी को फल, फूल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। व्रत के दिन निर्जला या सांवित्रीक व्रत रखा जा सकता है। पूजा के बाद कथा का श्रवण करना चाहिए। रात में जागरण कर भजन और कीर्तन गाना चाहिए। अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करना चाहिए।

मंगला गौरी व्रत का महत्व

सुहागिन महिलाओं के लिए वैवाहिक जीवन में खुशियां लाता है। पति की दीर्घायु का वरदान देता है। संतान प्राप्ति में सहायक होता है। पापों का नाश करता है।
मनोकामनाएं पूरी करता है। सुख-समृद्धि प्रदान करता है।

कब है सावन शिवरात्रि

इस साल 2024 में सावन शिवरात्रि का पावन पर्व 2 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 अगस्त को दोपहर 03:26 बजे से शुरू होगी और 3 अगस्त को दोपहर 03:50 बजे तक रहेगी। निशिता मुहूर्त के आधार पर सावन शिवरात्रि की पूजा 2 अगस्त को ही की जाएगी। सावन शिवरात्रि भगवान शिव के भक्तों के लिए वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह शिव-पार्वती के विवाह का प्रतीक भी माना जाता है।

इस पावन अवसर पर शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना का विशेष आयोजन होता है। भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, घी, शहद और बेलपत्र चढ़ाते हैं। निशिता काल में विशेष पूजा की जाती है। व्रत रखा जाता है। भजन और कीर्तन गाए जाते हैं। सावन शिवरात्रि का व्रत रखने से पापों का नाश होता है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

मैं आयुषी जैन हूं, एक अनुभवी कंटेंट राइटर, जिसने बीते 6 वर्षों में मीडिया इंडस्ट्री के हर पहलू को करीब से जाना और लिखा है। मैंने एम.ए. इन एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया है, और तभी से मेरी कलम ने वेब स्टोरीज़, ब्रांड...