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late marriage - लेट मैरिज का बढ़ता चलन

Increasing trend of late marriage

प्यार-मोहब्बत में बढ़ते जुनून एवं हादसों के कारण भले ही आज एक तरफ शादी की उम्र को घटाने की बात चल रही है, लेकिन सच तो यह है कि आज का पढ़ा-लिखा, समझदार युवा वर्ग लेट मैरिज के पक्ष में है। न तो उन्हें विवाह की जल्दी है न ही उनके मां-बाप को।

एक समय था जब मां-बाप बच्चों के पैदा होते ही उनका रिश्ता तय कर देते थे और एक-दूसरे को जुबान भी दे देते थे कि बड़े होकर हम इनकी शादी फलां इन्सान के बेटे या बेटी से करेंगे। फिर एक ऐसा समय आया कि बच्चे सयाने हुए नहीं कि मां-बाप को उनकी शादी की चिंता सताने लगती थी, जिसके चलते एक ऐसा दौर भी आया कि मां-बाप को 23-24 साल के बच्चों की शादी लेट लगने लगी और यदि इस उम्र में भी उनके बच्चे अविवाहित रह जाते, तो वह घोर चिंता से घिर जाते।

लेकिन आज ऐसा नहीं है, न तो मां-बाप को जल्दी है न ही बच्चों को। 27-28 साल में जाकर आज की पीढ़ी विवाह के बारे में सोच रही है, जिसको न तो वह खुद लेट मानती है न ही घरवाले। सच तो यह है कि हालात एवं जिम्मेदारियों को देखते हुए 20-22 साल में शादी की उम्र को आजकल के न केवल बच्चे जल्दी मानते हैं, बल्कि इस उम्र को मां-बाप भी शादी के लिहाज से कमजोर मानते हैं।

इस बारे में मनोवैज्ञानिक डॉ. सुनील त्यागी का कहना है कि ‘आज की पीढ़ी कॅरियर कॉन्शियस ज्यादा है। वह संबंधों से ज्यादा अपने काम-धंधे एवं सपने आदि को ज्यादा तवज्जो देती है और जो युवा वर्ग यदि संबंधों को महत्त्व देता भी है तो वह विवाह नाम के रिश्ते में या तो बंधना नहीं चाहता या फिर एक लांग टर्म रिलेशन के बाद एक मैच्योरिटी लेवल क्रॉस करके ही शादी करना चाहता है।

इसी बात की पुष्टी करती है 28 वर्षीया राधिका। राधिका का कहना है जीवन में विवाह जरूरी नहीं, जरूरी है तो अच्छी तालीम और अच्छी नौकरी। समय रहते अच्छी नौकरी जरूरी है, शादी का क्या है, वह तो हो ही जाएगी। अपने हिसाब से, अपनी पसंद का मैच्योर लड़का भी तो मिलना चाहिए।

अधिकतर लड़कियों का मानना है कि 25-26 साल तक के लड़के उतने मैच्योर नहीं होते जितना होना चाहिए। वह एक अच्छी नौकरी तो संभाल सकते हैं, लेकिन गृहस्थी की जिम्मेदारियां नहीं निभा सकते। रुपये-पैसे के मामले में लड़के भले ही इस उम्र में आत्मनिर्भर व आत्मविश्वासी हो जाते हों, परंतु निजी जिंदगी में उनके अंदर कहीं न कहीं बचपना होता है। वह जीवन एवं रिश्तों को संजीदगी से कम ही लेते हैं, जिसके कारण विवाह को लेकर मन में एक असुरक्षा का भाव बना रहता है।

चयन के साथ-साथ लेट मैरिज का कारण कई बार मजबूरी भी होती है। यानी अपने स्टेट्स एवं ऊंची पसंद के कारण जीवनसाथी का न मिलना और कई वर्षों तक अविवाहित रह जाना। आज-कल के बच्चे अपने जीवनसाथी में सिर्फ लुक्स ही नहीं ब्रेन एवं उनका स्टेट्स भी चाहते हैं ताकि भविष्य में दिक्कतें न आए। भविष्य का भय एवं असुरक्षा ही आज-कल के युवाओं को ‘ओवर चूजी बना देता है, जिसके चलते विवाह करने में वर्षों लग जाते हैं और उम्र आगे बढ़ जाती है।

मनोविशेषज्ञों का कहना है कि आज का जमाना प्रतियोगिता का जमाना है। हर कोई एक-दूसरे से आगे निकलना चाहता है, फिर पढ़ाई हो या कमाई। पहले की तरह नहीं कि 12वीं या कॉलेज तक की शिक्षा काफी होती थी। आज-कल पढ़ाई के साथ-साथ कई कोर्सेस एवं ट्रेनिंग भी हैं जिन्हें पूरा करते-करते 24-25 साल तक की उम्र हो जाती है तथा इच्छानुसार कॅरियर को सेट करने में 3-4 साल लग जाते हैं, जिसके चलते शादी की उम्र अपने आप 27-28 तक पहुंच जाती है। ऐसे में मां-बाप हों या उनके बच्चे दोनों ही शादी के उम्र की चिंता नहीं करते।

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