Summary: टीनएज संवाद की सच्चाई
यह लेख टीनएजर्स की उन भावनाओं और अपेक्षाओं को उजागर करता है, जिन्हें वे माता-पिता से कहना चाहते हैं लेकिन कह नहीं पाते।
Teenagers and Parents Communication: टीनएज, बच्चों के उम्र का एक ऐसा पड़ाव है जहां बच्चा बदल रहा होता है, शारीरिक और मानसिक रूप से। बदल रहा होता है उसके सोचने और समझने का तरीका। इस उम्र में बच्चा ऐसी बहुत सी बातें है जिन्हें अपने माता-पिता से कहना चाहता है या उनके बारे में जानना चाहता है। यह बातें सिर्फ उनके सवाल नहीं होते, बल्कि जुड़े होते हैं उनके स्वयं की खोज, पहचान से और डर से। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि टीनएजर अपनी बातें पेरेंट्स से नहीं कर पाते। आइए जानते हैं, इस लेख में आखिर वह कौन सी बातें हैं जिसे टीनएजर अपने पेरेंट्स से कहना चाहते हैं।
हर समय समझाने की बजाए मुझे समझो

जब बच्चा बड़ा हो रहा होता है तब वह चाहता है, माता-पिता हर समय उसे छोटे बच्चे की तरह ना देखे। ना ही हर समय उसे निर्देश दे, तुम यह करो, तुम यह मत करो। इसके साथ खेलो, इसके साथ मत खेलो। बच्चा नहीं चाहता कि उसे हर समय माता-पिता उपदेश कि तुम्हारे लिए यह अच्छा है, तुम्हें यह नहीं करना चाहिए। बल्कि इस उम्र में वह अपने माता-पिता से कहना चाहता है, मुझे समझो मुझसे बात करो। मैं ऐसा क्यों कर रहा हूं, इस बात को समझो। टीनएजर चाहता है, वह कह दे अपने माता-पिता से की मेरा मुझ पर पूरा कंट्रोल नहीं हो पा रहा है। मैं इतना क्यों बदल रहा हूं, मैं नहीं समझ पा रहा हूं। बच्चा टीनएज में अपने माता-पिता से खुद को समझने के बारे में कहना चाहता है।
मैं सच बोल रहा हूं, नाटक नहीं कर रहा
टीनएजर के गुस्सा होने या चिड़चिड़ा होने पर या फिर उनके रोने या दुखी होने पर जब माता-पिता उनके भावनाओं को समझने की बजाय नाटक कहते हैं। तब बच्चा अपने पेरेंट्स से कहना चाहता है, मैं सच बोल रहा हूं नाटक नहीं कर रहा। मेरे भाव मेरी भावनाएं सच्ची हैं। मैं दुखी हूं, उदास हूं, आप इस बात को समझो। वह बताना चाहता है, अपने माता-पिता को कि वह नहीं जानता कि वह क्यों दुखी है। क्या कारण है कि वह अब पहले जैसा खुश नहीं रह पा रहा। वह कहना चाहता है कि अब उसे बुरा लगता है, जब उसके भावनाओं को इग्नोर किया जाता है, नहीं समझा जाता है।
मैं, ‘मैं हूं’ मेरी तुलना मत करो
जब भी बच्चा अपने माता-पिता को यह कहते सुनता है, मेरा बच्चा उसकी तरह समझदार नहीं है। मेरा बच्चा उसके जितना अच्छा नहीं खेलता। इसका बच्चा कितना अच्छा कर रहा है और एक हमारा है इसे कुछ नहीं आता। जब भी बच्चा अपने माता-पिता से अपनी तुलना दूसरों से करते देखा है, तो वह कहना चाहता है आप मुझे वैसे ही क्यों नहीं प्यार कर सकते जैसा मैं हूं। वह कहना चाहता है मैं, ‘मैं हूं’ आप मेरी तुलना क्यों दूसरों से करते हो। जब आप मेरी तुलना दूसरे बच्चों से करते हैं, तब मैं खुद को कमजोर महसूस करता हूं। मुझे महसूस होता है कि मैं आपको खुश करने के लिए कुछ नहीं कर सकता। मेरा दूसरे बच्चों के साथ आपका तुलना करना मेरे आत्मविश्वास को कमजोर बनाता है। इस तरह के विचार मुझे अंदर से परेशान करते हैं।
पेरेंट्स के लिए एक संदेश
जब आप अपने बच्चों में बदलाव देखने लगे तो उस पर सवाल खड़ा करने की बजाय उसे समझने की कोशिश करें। बच्चों के मन में बहुत से सवाल हैं। बहुत सी बातें हैं जो वह आपसे कहना चाहते हैं। पर आपसे डर या शर्म जो भी वजह हो नहीं कह पाते। ऐसे में उनकी कही बातों के साथ उनकी चुपी को भी समझे। अपने बच्चों की भावनाओं के साथ-साथ उनकी निजता, स्वतंत्रता और सपनों का भी सम्मान करें।
