Hindi Poem: गुरू मेरे गुरू, सब से न्यारे हैं,
वो मिनटों में दुख हर लेते हैं,
उनकी महिमा सब से न्यारी है,
वो हम को सब से प्यारे हैं।
गुरू दुख को सहने की शक्ति देते हैं,
सुख को धीरज देते हैं,
खुश रहने की उम्मीद दिलाते हैं,
मेरे गुरू सब से न्यारे हैं।
उनकी महिमा का मैं गुणगान कैसे करूँ,
मेरी वाणी में वो ज्ञान नहीं,
सतसंग से कुछ शब्द सुन कर आती हूँ,
गुनगुनाती हूँ, अन्तरात्मा से खुश हो जाती हूँ।
दर्शन पा कर उनके, आँखें खुशी से भर आती हैं,
कदमों में ताकत आ जाती है,
गुरू द्वार मन में प्रकट हो जाता है,
मैं घर में होती हूँ, लगता है गुरू जी मेरे साथ हैं,
यही तो उनकी महिमा का आभास है,
मेरे गुरू सब से न्यारे हैं।
