Short Funny Story
Short Funny Story

Short Funny Story: ”होली है”.. बाहर बच्चे अपने दोस्तों के साथ रंग-गुलाल खेलने निकल चुके थे। उनके साथ-साथ आँगन और गली भी रंगो में नहा गई थी, उनकी मस्ती देखकर ज़हन में एक स्मृति की लहर उठी और मैं अनायास ही मुस्कुरा दी। रंगों भरा ये त्योहार हर बार जीवन में कुछ नए रंग बिखेर जाता है रंगीन यादों को पुनर्जीवित कर जाता है.. शादी के बाद की दूसरी होली का अवसर था।
मैं अपने पति के कार्यस्थल हज़ीरा (सूरत) में थी। हमारे एक परम मित्र का परिवार भी बगल में रहता था। हम सब त्योहार मिलजुल कर मनाते थे। होली के दिन हम दोनों परिवार होली खेलने निकले.. कॉलोनी में अगल बगल सबसे मिलते रंग-गुलाल खेलते हम आगे बढ़ रहे थे।
सबके यहाँ कुछ न कुछ मीठा—नमकीन खाते हुए, हँसी ठिठोली करते एक बज गए, अब सब घर की तरह चल पड़े, इतना सब खाने के कारण मेरे पेट में दर्द होने लगा, त्योहार का दिन था। बहुत काम था इसलिए मैंने सोचा आयुर्वेदिक चूरन की गोली खा लेती हूँ, दर्द चला जाएगा, संध्या को हमारे यहाँ होली मिलन का आयोजन भी था। इसलिए मैंने दो गोलियां खा ली, मैं इस बात से अनभिज्ञ थी कि जो मैंने चूरन समझ कर खाया है वो भांग की गोली थी जो मेरे पति ठंडई में डालने के लिए लाए थे।
स्नान करके मैं आराम करने चली गई, भाँग का असर धीरे-धीरे हो रहा था। शाम को मित्र का परिवार हमारे घर मिलने आया, इन्होंने मुझे आवाज़ दी, मैं भाँग के नशे में सराबोर थी और वो इस बात से अंजान थे।


उन्होंने सबके लिए नाश्ता लाने को कहा..मैंने हँसते हुए ट्रे में कई प्लेट में कच्चे चावल, दाल, आटा इत्यादि लगाया और कप में तेल भर के ले आई और हंस—हंस कर सबको परोसने लगी, मुझे तनिक भी आभास नहीं था कि मैं क्या कर रही हूँ
मेरे पति शर्मिंदा होकर सबको कहने लगे कि इनकी तबियत ठीक नहीं है और जबरन मुझे अंदर ले गए। बाहर उन्होंने किसी तरह परिस्थिति को संभाला और मिठाई इत्यादि खिलाकर सबको जल्द विदा किया । सब मंद मंद मुस्कुरा रहे थे मेरी हालत पर ..।
अगले दिन मैं जब उठी तब मुझे पतिदेव ने विगत दिन की पूरी जानकारी दी ..मैं आश्चर्यचकित होकर इनको देखती रह गई और सोचा ..हाय,ये मैंने क्या कर डाला ,तभी कॉलबेल बजी, हमारे मित्र अपनी पत्नी के साथ सामने खड़े थे ,उनको देख मैं बुरी तरह झेंप गई ।
उन्होंने कहा भाभी जी ,आपका हाल पूछने आया हूँ ..आशा है आप अब स्वस्थ होंगी और आज आपके हाथ की बनी हुई गुझिया और दहीबड़े खाने को मिलेंगे ।
कल की तरह दाल-चावल नहीं, उनकी बात सुनकर सब खिलखिलाकर हँस पड़े और मैं शर्म से लाल हो मुंह हथेली में छिपाकर सोफ़े पर धँस गई ,आज भी जब ये वाकया याद आता है तो मन को गुदगुदा जाता है ।
मस्ती ,मज़ाक और प्यार भरे इस रंगीन पर्व की आप सबको हार्दिक शुभकामनाएँ .

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