Summary: नन्ही आँखों के अनकहे आंसू: बीमारी, ताने और माँ की हिम्मत की कहानी
7 साल के दक्ष की बार-बार होने वाली बीमारी के कारण स्कूल की छुट्टियों को उसकी मजबूरी की बजाय बहाना समझ लिया जाता है, जिससे उसके नन्हे मन पर गहरा असर पड़ता है।
एक संवेदनशील माँ की समझदारी और हिम्मत न सिर्फ अपने बच्चे का आत्मविश्वास लौटाती है, बल्कि एक शिक्षक को भी बच्चों की भावनाओं की अहमियत का एहसास कराती है।
Short Story in Hindi: दक्ष, उठो बेटा स्कूल जाने में लेट हो जाएगा। रागिनी अपने 7 साल के बेटे को किचन से लगातार आवाज़ें दिए जा रही थी। लेकिन आज दक्ष उठने का नाम ही नहीं ले रहा था। वैसे तो रागिनी दक्ष को टाइम से 20 मिनट पहले ही उठा दिया करती थी ताकि वो आराम से तैयार हो सके। रागिनी ने सोचा कल रात दक्ष आठ बजे से पहले ही सो गया था, तो आज उठने में इतनी आनाकानी क्यों कर रहा है। अचानक उसे चिंता हुई कहीं उसे फिर से बुखार तो नहीं आ गया है। दरअसल पिछले 6 महीने के अंदर दक्ष को 6 बार वायरल हो चुका था। वजह थी ”नॉक नीज़” नाम की कंडीशन। जिसमें अक्सर बच्चों के घुटने अंदर की तरफ मुड़े हुए होते हैं।
इसी वजह से दक्ष के घुटनों में हर हफ्ते असहनीय दर्द होता था और साथ ही बुखार भी आता था। डॉक्टर का कहना था 12 साल की उम्र से पहले ये कंडीशन अपने आप ठीक हो जाती है बस कुछ दवाएं लेना जरुरी होता है ताकि दर्द से आराम मिल सके। इस परेशानी से जुड़े सारे डाक्यूमेंट्स रागिनी और उसके पति स्कूल में ईमेल कर चुके थे और दक्ष की क्लास टीचर को भी उन्होंने सब बता दिया था ताकि ज्यादा छुट्टी होने पर वो दक्ष से सवाल ना पूछें।
रागिनी के बार-बार उठाने पर दक्ष ने कहा माँ मैं थकान फील कर रहा हूँ इसलिए मुझे स्कूल नहीं जाना है। रागिनी दक्ष के एक बार बोलने पर ही समझ गयी थी आज दक्ष को किसी तरह की तकलीफ नहीं है, बल्कि वो कुछ डरा हुआ लग रहा है। जरूर स्कूल में कोई बात हुई है। उसने दक्ष से कहा तुम आराम करो , कल स्कूल चले जाना। वो जानती थी दक्ष कभी स्कूल जाने के लिए मना करता ही नहीं है, इसलिए आज उसे बैठाकर उसकी परेशानी समझना बहुत जरुरी है। कुछ है जो उसके मासूम से बच्चे को अंदर तक परेशान कर रहा है।
लंच में रागिनी ने दक्ष की पसंदीदा दाल ढोकली बनायीं और दोनों साथ में खाना खाने बैठे। खाने के बाद बातों-बातों में उसने दक्ष से कहा , मैं जानती हूँ आज सुबह कोई और बात थी जिसकी वजह से तुम स्कूल नहीं गए। तुम मुझे बता सकते हो बेटा, मैं तुम्हारी परेशानी को समझूंगी, कोई भी बात हो मैं तुम्हें कुछ नहीं कहूँगी। अपनी परेशानी तुम माँ के साथ शेयर करोगे तो हम मिल कर उसे सुलझाएंगे।

माँ की बात सुन कर दक्ष के चेहरे का रंग फीका पड़ गया। उसने आँखों में आंसू लिए कहा जब मैं पिछले हफ्ते चार दिन स्कूल नहीं गया था मेरा स्कूल का काम नहीं हो पाया है माँ। अनु टीचर ने कहा है की तुम हर हफ्ते छुट्टी करते हो और काम न करने का बहाना बनाते हो। आज मुझे चार दिन का पूरा काम कर के ले जाना था लेकिन टीचर ने आपके मांगने पर भी काम नहीं भेजा और मेरे दोस्तों की कॉपी से मैं थोड़ा ही काम कर पाया हूँ। आपने स्कूल ग्रुप में काम माँगा वो भी कोई नहीं दे पाया। अगर मैंने काम पूरा नहीं किया तो टीचर मुझे बहुत डाँटेंगी और क्लास में सब बच्चों के सामने मेरी इंसल्ट करेंगी।
रागिनी अपने मासूम बच्चे की बात सुनते हुए मुश्किल से अपनी आँखों से बहते आंसू छुपा रही थी। उसने दक्ष को कस कर गले लगाया और कहा , बेटा आज हम आपके दोस्त का एड्रेस लेते हैं और उनके घर चल कर काम पूरा कर लेते हैं। रागिनी ने दक्ष से पूछा टीचर और भी कुछ कहती है क्या बेटा, तब दक्ष ने बहुत सी बातें बतायीं। इन बातों में एक और बात थी जो रागिनी को चुभ गयी।
टीचर के जन्मदिन वाले दिन जब बच्चों ने उन्हें कपकेक दिया तो उन्होनें दक्ष को ताना मारते हुए कहा तुम सबसे कम छुट्टियां करते हो तो आज तुम ही मुझे कपकेक अपने हाथ से खिलाओगे। मासूम दक्ष ने इस ताने को टीचर का प्यार समझा और कहा माँ आप तो कहती थी आजकल मेरी छुट्टियां ज्यादा हो रहीं है पर टीचर ने तो मुझे बताया की मैं सबसे कम छुट्टियां करता हूँ।

रागिनी को टीचर की ये बात बिल्कुल पसंद नहीं आयी,उसने फैसला कर लिया था दो दिन बाद होने वाली पैरेंट टीचर मीटिंग में इस बार वो उनकी गलती का एहसास करा कर ही रहेगी। मीटिंग वाले दिन रागिनी ने टीचर से बात की और उन्हें इस बात का एहसास दिला दिया की उन्होंने जो दक्ष के साथ किया वो बिल्कुल ठीक नहीं था। उसने टीचर से कहा कोशिश कीजियेगा की आप दक्ष क्या किसी भी बच्चे से इस तरह की बात ना करें।
अगले कुछ महीनों में दक्ष से रागिनी को पता चला की टीचर का स्वभाव काफी बदल गया है। दक्ष ने उस दिन के बाद कभी स्कूल जाने से मन नहीं किया और उसका आत्मविश्वास भी अब कहीं ज्यादा बढ़ गया था। रागिनी के मन में सुकून था की अब दक्ष क्या किसी भी बच्चे को टीचर की तीखी बातों का सामना नहीं करना पड़ेगा। उसने जान लिया था कभी-कभी गलत इंसान को गलत साबित करने के लिए हमें थोड़ी हिम्मत जुटाने की बस जरुरत भर होती है।
