Urinary Tract Infection in Children
Urinary Tract Infection in Children

Overview:

बारिश के मौसम में बच्चों में यूटीआई होना बहुत आम परेशानी है। हालांकि पेरेंट्स को आमतौर पर इसकी जानकारी नहीं होती है।

Urinary Tract Infection in Children: मानसून का मौसम जहां बारिश की ठंडक और मस्ती लेकर आता है, वहीं बीमारियों की झड़ी भी लगा देता है। इस मौसम में बच्चे सबसे ज्यादा बीमार पड़ते हैं। क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। आमतौर पर पेरेंट्स डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार को लेकर कई सावधानियां रखते हैं। लेकिन एक और बीमारी है जो इस मौसम में बच्चों को चुपचाप जकड़ लेती है, वो है यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन। बड़ों के साथ ही बच्चे भी यूटीआई के शिकार होते हैं।

इसलिए शिकार होते हैं बच्चे

Urinary Tract Infection in Children-बारिश के मौसम में बच्चों में यूटीआई होना बहुत आम परेशानी है।
UTI is a very common problem in children during the rainy season. Credit: Istock

बारिश के मौसम में बच्चों में यूटीआई होना बहुत आम परेशानी है। हालांकि पेरेंट्स को आमतौर पर इसकी जानकारी नहीं होती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 30 प्रतिशत बच्चे अपने जीवनकाल में कभी न कभी यूटीआई का शिकार जरूर होते हैं। मानसून में गीले कपड़े, नमी और साफ-सफाई की कमी से इसका खतरा बढ़ जाता है।

छोटे बच्चों को दोहरी समस्या

यूटीआई तब होता है, जब बैक्टीरिया मूत्रमार्ग में प्रवेश करके मूत्राशय तक पहुंच जाते हैं। कई बार ये बैक्टीरिया गुर्दे तक भी पहुंच सकते हैं और गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं। वहीं छोटे बच्चों में कब्ज और पेट साफ न होने की समस्या भी यूटीआई को बढ़ावा देती है। कई बार ब्लैडर और किडनी इंफेक्शन भी यूटीआई का कारण बनते हैं।

समय पर पहचानें लक्षण

बच्चों में यूटीआई के लक्षणों को समय पर पहचानना जरूरी है। इसके कारण शिशु चिड़चिड़े होने लगते हैं। छोटे बच्चे दूध पीना छोड़ देते हैं। साथ ही उन्हें बुखार और उल्टी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। वहीं बड़े बच्चों में इसके लक्षण थोड़े अलग हैं। जैसे बार-बार यूरिन आना, यूरिन करते समय जलन होना, पेट के निचले हिस्से में दर्द आदि होना। कई बार तेज बुखार और बार-बार उल्टी आने की समस्या भी हो सकती है।

बच्चों को ऐसे बचाएं यूटीआई से

बच्चों को यूटीआई से बचाने के कई आसान तरीके हैं। हालांकि उनकी उम्र के अनुसार इनमें बदलाव करना जरूरी है। दो साल तक के बच्चों में यूटीआई होने का एक बड़ा कारण है डायपर। इसलिए बच्चों के डायपर समय-समय पर बदलें। साथ ही साफ-सफाई का ध्यान रखें। पोंछते समय हमेशा आगे से पीछे की ओर साफ करें। वहीं 2 से 3 साल के बच्चों को टॉयलेट ट्रेनिंग दें। इससे यूटीआई का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।

डालें पानी पीने की आदत

4 साल से बड़े बच्चों को यूटीआई सेे बचाव के लिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। इसके साथ ही बच्चे को समय पर टॉयलेट जाने की आदत डालें। फाइबर वाला खाना दें ताकि कब्ज से बचाव हो सके। अगर बच्चों को यूटीआई है तो उन्हें बबल बाथ देने से बचें। साथ ही उन्हें बहुत ज्यादा टाइट अंडर गारमेंट्स न पहनाएं। क्योंकि इससे संक्रमण बढ़ सकता है।

बच्चियों के लिए ज्यादा खतरा

विभिन्न शोध बताते हैं बच्चियों को यूटीआई होने का खतरा बच्चों से कहीं ज्यादा होता है। खासतौर पर टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान वह इसका ज्यादा शिकार हो सकती हैं। ऐसे में इस समय बच्चियों का खास ध्यान रखें। उन्हें सही उम्र में टॉयलेट ट्रेनिंग देना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...