बिहार और घुमक्कड़ी...हममें से ज्यादातर लोग बिहार को घूमने के नजरिए से तो बिलकुल नहीं देखते हैं। लेकिन बिहार की राजधानी पटना के बारे में भी आपकी ऐसी सोच है तो आप बिलकुल गलत हैं। ये शहर कई सारे ऐसे ठिकानों को खुद में समेटे हुए है जो घूमने के नजरिए से बहुत अच्छे हैं। इस शहर को नए और पुराने के फ्यूजन के तौर पर देखा जाना चाहिए। आपको इस शहर में आकार परम्पराओं का मिश्रण देखने को मिलेगा। इतिहास मानो आपके सामने ही खड़ा हो जाएगा और आप अपनी इस यात्रा को कभी भूल नहीं पाएंगे। इस यात्रा को यादगार बनाने के लिए कुछ खास जघों पर आपको जरूर जाना चाहिए। चलिए एक दिन में इस शहर में घूमे जाने वाले ठिकानों को पहचान लेते हैं।

पहले का नाम-

बिहार जैसे पहले बोध गया और नालंदा विश्वविद्यालय के लिए जाना गया ठीक वैसे ही पटना को पहले पाटलीपुत्र कहा गया। इसे मगध के राजाओं ने 490 बीसीई में बनाया था।

105फिट का अनाजघर-

 

 

आप सोच रही होंगी कि अनाजघर भला कौन देखने जाता है?यकीन मानिए आप जाएंगी जब आप इसके पीछे का इतिहास जान लेंगी। इसको गोल घर कहते हैं और इसे 1786 में ब्रिटिश आर्मी के लिए बनवाया था। यहां पर लोग सिर्फ व्यू देखने भी आते हैं क्योंकि इसकी 141 सीढ़ियां चढ़ने के बाद पूरे शहर का नजारा दिखता है और साथ में नदी का भी। गोलघर की दीवार 3.6 मीटर मोटी हैं और दिखने से ही सॉलिड लगती हैं। फिलहाल यहां का अनाज घर बंद है लेकिन स्ट्रक्चर देखने आज भी लोग आ जाते हैं।

पटना का सिग्नेचर ब्रिज-

 

 

जी हां,आपने सही पढ़ा है जैसे दिल्ली का सिग्नेचर ब्रिज आपका दिल खुश कर देता है ठीक वैसे ही पटना का महात्मा गांधी सेतु भी आपको खुश कर देगा। ये पुल पटना और हाजीपुर को जोड़ता है। अक्सर लोग यहां अच्छा और यादगार समय बिताने आ जाते हैं। इस पुल की लंबाई 5750 मीटर है और इसे बनने में पूरे 10 साल का समय लगा था। इस पुल का अपना एक अलग इतिहास है। इसको बने हुए 39 साल हो चुके हैं। इसका उद्घाटन 1982 में तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। अक्सर लोग यहां पर सूर्यास्त देखने भी आते हैं। ये नजारा ना भूलने वाला होता है।

अगम कुआं,पटना की शान-

 

 

अब अप सोच रही होंगी कि कुआं भी कौन घूमने जाता है तो हमारा जवाब वही है। इतिहास जानेंगी तो यहां एक बार तो जरूर ही आएंगी। इस कुएं को सम्राट अशोक ने304-232ईसा पूर्वके बीच बनवाया था। ये कुआं 43 फीट यक ईंटों से बना है तो बाकी का 62 फीट लकड़ी के छल्लों से। इस कुएं में ही सम्राट अशोक लोगों को सजा दिया करता है। माना जाता है उसने अपने 99 भाइयों को यहीं पर मारा था ताकि वो अकेले राज कर सके।इस वक्त इसे बहुत पवित्र जगह माना जाता है।

पटना म्यूजियम है खास-

 

 

 

ये म्यूजियम पटना की खासियतों को समेटे हुए है। ये शहर का सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली जगह है। आप यहां पर मुगल और राजपूत दोनों सभ्यताओं का असर देखेंगे। यहां पर अचंभित करने वाले करीब 45000 आर्टिकल हैं। जिन लोगों को इतिहास में रुचि है उनके लिए ये जगह किसी मंदिर से कम नहीं है। यहां पर आपको गुप्ता और मौर्य साम्राज्य के मेटल और पत्थरों से बने स्कल्पचर भी मिलेंगे। यहां पर 200 मिलियन साल पुराना जीवाश्म वाला पेड़ भी सबको बहुत आकर्षित करता है। यहां पर बुद्ध से जुड़ी कई पेंटिंग और स्कल्पचर भी हैं। ये जगह जरूर आपके लिए यादगार बन जाएगा।

गांधी मैदान की अहमियत-

ये एक ऐसा मैदान है जहां ज्यादातर राजनीतिक इवेंट होते हैं। लेकिन इससे इतने ऐतिहासिक मौके जुड़े हैं कि आप यहां आए बिना और उन मौकों की कल्पना किए बिना लौट ही नहीं पाएंगे। 63 एकड़ में फैले इस मैदान में महात्मा गांधी की सबसे ऊंची मूर्तियों में से एक लगी हुई है। गांधी जी के नाम पर ही इस मैदान का नाम भी रखा गया था। इस मैदान के बाहर की ओर अब कई शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और रेस्टोरेन्ट भी खुल चुके हैं। मतलब यहां आने के बाद आपको खाने-पीने की चिंता भी नहीं करनी है।

पटना साहिब का दर्शन हैं जरूरी-

 

 

पटना साहिब पटना का तीर्थ है,जहां दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इसकी अपनी अलग ही आध्यात्मिक अहमियत है। सिख समुदाय के 10वें गुरु गोबिन्द सिंह जी को समर्पित ये गुरुद्वारा सन 1837 से 1839 के बीच बनवाया गया था। इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे को महाराजा रंजीत सिंह ने बनवाया था। ये जगह इसलिए भी खास है क्योंकि गुरु गोबिन्द सिंह जी का जन्म पटना में ही 1666 में हुआ था। अगर आप पटना आते हैं तो इस जगह आए बिना वापस बिलकुल ना जाइएगा।

 

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One reply on “पटना में गुजारिए 24घंटे,ये जगह निराश नहीं करेगी आपको”

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