1-बांधवगढ़ नेशनल पार्क (मध्य प्रदेश)

अगर आपको दिलचस्पी है शेरों को नज़दीक से देखने की तो बांधवगढ़ आएं। मध्य प्रदेश के उमारिया जिले में स्थित ये पार्क एक जमाने में रीवा के राजा का शिकार की फेवरेट जगह हुआ करती थी। ये नेशनल पार्क 1964 में स्थापित हुआ, जो 1536 स्कॉयर किमी में फैला है। यह अपने जैव विविधता की वजह से जाना और पहचाना जाता है।

कब जाएं: यहां जाने का अनूकूल समय है अक्टूबर से मार्च तक।
कैसे पहुंचे: नजदीकी एयरपोर्ट है जबलपुर, जो बांधवगढ़ से 169 किमी की दूरी पर है। यहां नजदीकी रेलवे स्टेशन है उमारिया।
रोमांच: जीप सफारी, एलिफैंट सफारी, बांधवगढ़ फोर्ट, खजुराहो का मंदिर।

ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (हिमाचल प्रदेश)

कुल्लू जिले में स्थित ये पार्क 1984 में नेशनल पार्क घोषित किया गया जो 1,171 स्कॉयर किमी में फैला है, जिसकी ऊंचाई 1500 से 6000 मीटर की है। ये पार्क यूनेस्को वल्र्ड हेरिटेज का भी हिस्सा है। ये पार्क अद्भूत और अनोखे वन्य जीव-जंतुओं के लिए जाना जाता है, जहां 375 तरह के प्रजाति पाए जाते हैं जिसमें स्तनधारी, 204 चिडिय़ों की प्रजातियां, 3 तरह के रेप्टाइल्स, 127 तरह के कीड़े शामिल हैं। ये पार्क विलुप्त हो रहे प्राणियों की सुरक्षा के लिए भी जाना जाता है।

कब जाएं: अक्टूबर से मई तक
कैसे पहुंचे: नजदीकी एयरपोर्ट है कुल्लू मनाली और बड़ा एयरपोर्ट चंडीगढ़ है।
रोमांच: यहां आप ट्रैकिंग और कैंपिंग कर सकते हैं।

काजीरंगा नेशनल पार्क (असम)

ये पार्क राइनोसोर्स यानी भारतीय गैंडों के लिए जाना जाता है, जो असम के गोलाघाट और नागौन में स्थित है। ये पार्क यूनेस्को वर्ड हेरिटेज के अंतर्गत आता है जहां दुनिया के सबसे ज्यादा राइनोसोर्स पाए जाते हैं। इसके अलावा यहां हाथी, जंगली भैंसा, हिरन और चिडिय़ों की कई खूबसूरत और मनमोहक प्रजातियां पाई जाती हैं। ये पार्क भी अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है।

कब जाएं: नवंबर से अप्रैल
कैसे पहुंचे: नजदीकी एयरपोर्ट है गुवाहाटी और नजदीकी रेलवे स्टेशन है हेलम।
रोमांच: जीप सफारी, पक्षी विहार, एलिफैंट सफारी के अलावा मजोली आइलैंड में ट्रिप ले सकते हैं।

 

कंचनजंगा नेशनल पार्क (सिक्किम)

1977 में सिक्किम में इसकी स्थापना हुई और 2016 में इसे यूनेस्को वर्ड हैरिटेज और बायोस्फीयर रिजर्व भी घोषित किया गया। इस पार्क में ढेर सारे ग्लेशियर्स हैं जिसमें एक जीमू ग्लेशियर के हैं। यह हिरण, विभिन्न प्रकार के जीवजंतुओं का निवास स्थल है, जिनमें से प्रमुख जंतु हैं स्नोलैपर्ड, हिमालयन तहर, रेड पांडा। इसके अलावा यहां 550 के करीब बर्ड की प्रजातियां भी शामिल हैं।

कब जाएं: अप्रैल से मई तक अगस्त से अक्टूबर तक।
कैसे पहुंचें: नजदीकी एयरपोर्ट है बागडोगरा और रेलवे स्टेशन है न्यू जलपाईगुड़ी।
रोमांच: कई ट्रैकिंग ऑपशंस

मानस नेशनल पार्क (असम)

घने जंगलों से घिरा ये पार्क असम में स्थित होने के साथ-साथ भूटान बॉर्डर से भी जुड़ा है। यह पार्क कई विलुप्तप्राय प्राणियों का निवासस्थल है जिनमें से जंगली भैंसा, बारहसिंहा, राइनोज, हिरण और चीतल हैं।
कब जाएं : अक्टूबर से मई।
कैसे पहुंचे: नजदीकी हवाई अड्डा गुवाहाटी और नजदीकी रेलवे स्टेशन गुवाहाटी है।
रोमांच: एलीफैंट सफारी, जीप सफारी के अलावा यहां विलेज टूअर भी कर सकते हैं।

 

नागरहोल नेशनल पार्क (कर्नाटक)

कर्नाटक के कोट्टागू और मैसूर जिले में मौजूद नागरहोल नेशनल पार्क 1988 में स्थापित किया गया। यह पार्क 642 स्कॉयर किमी में फैला है और यह टाइगर रिजर्व पार्क है और नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व में भी आता है। ये अलौकिक जीव जंतुओं के लिए प्रसिद्ध है। इसके घने जंगलों में सागौन, शीशम और चंदन पाए जाते हैं। यहां हाथी, गौर, सांभर, चीतल, जंगली सुअर, काले भालू, तेंदुए और नीलगिरी लंगूर आसानी से देखे जा सकते हैं।
कब जाएं: सितंबर से मई।
कैसे पहुंचे: नजदीकी एयरपोर्ट बंगलोर और नजदीकी रेलवे स्टेशन मैसूर है।
रोमांच: मिनी बस सफारी, एलिफैंट सफारी

 

पेरियार नेशनल एंड वाइल्ड लाइफ सेंचुरी (केरल)

वेस्टर्न घाट की हरी भरी वादियों के बीच ये पार्क केरल के इडुक्की, कोट्यम, पथानामथिट्टा के राज्य में आते हैं। यहां एलीफैंट, टाइगर्स देखे जा सकते हैं। यह 925 स्कॉयर किमी तक फैला है, जहां अलौकिक प्राणी मौजूद हैं। इनमें कई विलुप्त होने की कगार पर हैं। इस पार्क में गौर, सांभर, जंगली सुअर, नीलीगिरी तहर, भालू, मकाक बंदर, नीलीगिरी लंगूर के अलावा 266 बर्ड की प्रजातियां भी शामिल हैं।

कब जाएं: सितंबर से दिसंबर तक।

कैसे पहुंचे: नजदीकी एयरपोर्ट कोचीन है और नजदीकी रेलवे स्टेशन है पेरियार।

रोमांच: वाइल्ड लाइफ साइट सीन, बोटिंग,बैंबू राफ्टिंग। 

वाइल्ड लाइफ ट्रैवल एक्सपर्ट टिप्स

किसी भी वन्य जीव टूर जाने से पहले रिसर्च जरूर करें। मतलब आपको सबसे अच्छा मौसम और सफारी का उचित समय पता होना चाहिए। इसके अलावा यात्रा के दौरान जब भी आप जंगल में वन्य जीवों को देखने के लिए जाएं तो जरूरी है कि आप बिना आवाज के शांति से घूमें, क्योंकि अक्सर पशु आपकी आवाज से डर जाते हैं।

‘ट्रैकीन’ (trekeen.com)  की को-फाउंडर अपर्णा त्रिपाठी
से बातचीत पर आधारित)

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