Intricate marble-carved Eklingji Temple complex amid green Aravalli hills.
Hidden historical gems scattered across the Aravalli range

Summary : अरावली पर्वतमाला की सबसे ख़ास बात

माउंट आबू की हरियाली से लेकर सरिस्का के घने जंगलों तक फैले ये पहाड़ राजाओं, साधुओं, व्यापार मार्गों और युद्ध कथाओं के साक्षी रहे हैं।

Aravalli Historical Sites: अरावली पर्वतमाला केवल पहाड़ों की एक श्रृंखला नहीं है, यह भारत के इतिहास की जीवित स्मृति भी है। माउंट आबू की हरियाली से लेकर सरिस्का के घने जंगलों तक फैले ये पहाड़ राजाओं, साधुओं, व्यापार मार्गों और युद्ध कथाओं के साक्षी रहे हैं। इस भूभाग में बिखरे किले, मंदिर और प्राचीन नगर आज भी समय से संवाद करते हैं। अरावली के ये पाँच रत्न आपको प्रकृति के साथ-साथ इतिहास की गहरी यात्रा पर ले जाते हैं। जिसकी वजह से इनके बारे में जानने की चाह हर किसी के दिल में होती है।

Marble poetry carved in spiritual silence of hills
Marble poetry carved in spiritual silence of hills

माउंट आबू की ठंडी पहाड़ियों में बसे दिलवाड़ा जैन मंदिर भारतीय स्थापत्य का एक अद्वितीय और ख़ूबसूरत उदाहरण हैं। 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच बने इन संगमरमर मंदिरों की नक्काशी इतनी सूक्ष्म है कि पत्थर जीवंत प्रतीत होता है। यहाँ इतिहास शोर नहीं करता, वह शांति से सामने आता है। ये मंदिर बताते हैं कि अरावली केवल राजनैतिक शक्ति का केंद्र नहीं बल्कि आध्यात्मिक साधना की उर्वर भूमि भी रही है।

माउंट आबू से कुछ दूरी पर स्थित अचलगढ़ किला परमार वंश और बाद में मेवाड़ शासकों की सैन्य रणनीति का प्रतीक रहा है। ऊँचाई पर बना यह किला अरावली की रक्षा-रेखा जैसा लगता है। यहाँ से पहाड़ियों का विस्तार देखकर यह समझ आता है कि क्यों अरावली सदियों तक प्राकृतिक किले का काम करती रही। किले के अवशेष इतिहास की कठोर लेकिन सधी हुई भाषा बोलते हैं।

Colorful stepped hillside palace with arched balconies and green vegetation.
Hidden historical gems scattered across the Aravalli range

अरावली की गोद में स्थित रणकपुर जैन मंदिर स्थापत्य संतुलन का अद्भुत उदाहरण है। 1444 स्तंभों पर टिका यह मंदिर इस तरह निर्मित है कि कोई भी दो स्तंभ एक जैसे नहीं हैं। यह स्थान मध्यकालीन भारत में व्यापार, धर्म और कला के संगम को दर्शाता है। रणकपुर यह साबित करता है कि अरावली केवल युद्धों की नहीं, सृजन की भी साक्षी रही है।

दिल्ली–जयपुर मार्ग पर स्थित नीमराना किला अरावली की तलहटी में इतिहास को आधुनिकता से जोड़ता है। 15वीं शताब्दी में बना यह किला चौहान शासकों की विरासत रहा है। इसकी सीढ़ीनुमा संरचना पहाड़ी भूगोल के अनुसार विकसित स्थापत्य को दर्शाती है। आज यह किला यह बताता है कि इतिहास को संजोते हुए भी वर्तमान से जोड़ा जा सकता है।

Ruins whisper legends amid Aravalli’s haunting wilderness
Ruins whisper legends amid Aravalli’s haunting wilderness

सरिस्का के निकट स्थित भानगढ़ किला अपनी रहस्यमय कथाओं के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इसके पीछे ठोस ऐतिहासिक संरचना भी है। 17वीं शताब्दी का यह किला आमेर रियासत के विस्तार का प्रतीक था। अरावली के जंगलों के बीच खड़ा यह किला इतिहास, लोककथा और प्रकृति—तीनों को एक साथ अनुभव करने का अवसर देता है।

माउंट आबू से सरिस्का तक फैले अरावली के ये रत्न हमें यह समझाते हैं कि इतिहास केवल पुस्तकों में नहीं, बल्कि पहाड़ों, पत्थरों और रास्तों में भी बसता है। इन स्थानों की यात्रा समय की सीढ़ियाँ चढ़ने जैसी है—जहाँ हर मोड़ पर अतीत अपनी कहानी सुनाता है।

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...