Make Your Children Mentally Strong: एक पैरेंट के रूप में हम सभी अपने बच्चों को स्वस्थ और सफल देखना चाहते हैं और इसके लिए आवश्यक कदम भी उठाते हैं। लेकिन एक बच्चे की परवरिश करते हुए हमें उसे मानसिक रूप से भी मजबूत बनाना चाहिए। जब बच्चा मानसिक रूप से मजबूत होते हैं, तो वह रोजमर्रा की चुनौतियों और असफलताओं से उबरने में सक्षम हो पाते हैं।
हम सभी को जीवन में कई तरह की नकारात्मक स्थितियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन अगर हम मानसिक रूप से मजबूत होते हैं तो ऐसे में उन प्रतिकूल स्थितियों का सामना करने और उस स्थिति में भी सकारात्मक बने रहने का साहस मिलता है। जब बच्चे बचपन से ही मानसिक रूप से मजबूत बनते हैं तो आगे चलकर उन्हें भविष्य में ऐसे निर्णय लेने में मदद मिलती है, जो उनके लिए लाभकारी हों। बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने की जिम्मेदारी कहीं ना कहीं पैरेंट्स की ही होती है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही टिप्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने बच्चों को बचपन से ही मेंटली स्ट्रॉन्ग बना सकते हैं-
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पॉजिटिव सेल्फ टॉक सिखाएं

अगर आप अपने बच्चे को मेंटली स्ट्रॉन्ग बनाना चाहते हैं तो ऐसे में आपको उन्हें पॉजिटिव सेल्फ टॉक करना सिखाना चाहिए। जब बच्चे खुद को व अपनी स्थिति को सकारात्मक तरीके से देखना शुरू करते हैं तो इससे वे नेगेटिव सिचुएशन में भी खुद को बेहतर तरीके से बात कर पाते हैं। इसके लिए आप खुद एक पॉजिटिव लैग्वेंज का मॉडल बनें। मसलन, आप खुद के लिए पॉजिटिव सोचें व बोलें। इससे कहीं ना कहीं बच्चे भी आपको देखकर खुद-ब-खुद इसे सीख जाएंगे। अगर आप बच्चे को पॉजिटिव टॉक करने के लिए कहेंगे तो शायद वे उसे ना समझ पाएं। लेकिन जब वे आपको मुश्किल स्थिति में भी पॉजिटिव रहने की कला देखेंगे तो उन्हें भी मेंटली स्ट्रॉन्ग बनने में मदद मिलेगी।
समस्या का समाधान करना सिखाएं
मेंटली स्ट्रॉन्ग लोगों की खास बात यह होती है कि वे किसी भी स्थिति में परेशानियों की जगह उसके हल पर अधिक ध्यान देते हैं। आपको भी बच्चे में यह गुण बचपन से ही पैदा करना होगा। इसकी शुरुआत करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार फैसले लेने की अनुमति दें, जैसे कि अपने कपड़े चुनना या यह तय करना कि अपना खाली समय कैसे बिताना है। इससे समस्याओं को हल करने की उनकी क्षमता में आत्मविश्वास पैदा होता है। कई बार पैरेंट्स अपने बच्चे की जिन्दगी के हर छोटे-बड़े फैसले लेते हैं, जिससे बच्चे में कॉन्फिडेंस कभी पैदा नहीं हो पाता है। हो सकता है कि बच्चा किसी परेशानी में फंसकर खुद को तनावग्रस्त महसूस करे। ऐसे में आप बच्चे को यह समझाएं कि सिर्फ परेशानी के बारे में सोचकर दुखी होने की जगह उससे निकलने के रास्ते के बारे में सोचें। साथ ही उसे यह भी बताएं कि जिन्दगी में आगे चलकर उसे ऐसी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, इसलिए उसे परेशान होने की जगह शांत दिमाग से हल के बारे में सोचने की आदत डालनी चाहिए।
सोशल कनेक्शन को बनाएं बेहतर

आज के समय में यह देखने में आता है कि बच्चे खुद को घर तक ही सीमित रखते हैं और अपना ज्यादातर समय टीवी और फोन में ही बिताते हैं। लेकिन अगर आप अपने बच्चे को मेंटली स्ट्रॉन्ग बनाना चाहते हैं तो ऐसे में आपको उन्हें सोशल कनेक्शन बनाने पर जोर देना चाहिए। जब बच्चे की दोस्ती का दायरा बढ़ता है और वह ग्रुप एक्टिविटीज में शामिल होता है तो उससे वह सहानुभूति, सहयोग और संघर्ष समाधान सीख पाता है। दोस्तों के बीच रहकर बच्चा ग्रुप में सबके साथ खुद को मैनेज करना भी सीख पाता है।
फिजिकल एक्टिविटी पर दें जोर
अधिकतर लोगों को यह पता ही नहीं होता है कि फिजिकल एक्टिविटी से मेंटल हेल्थ पर किस तरह असर पड़ता है। जबकि फिजिकल एक्टिविटी और मेंटल हेल्थ का गहरा कनेक्शन है। अगर आप अपने बच्चे को मेंटली स्ट्रॉन्ग बनाना चाहते हैं तो ऐसे में आपको उन्हें फिजिकली एक्टिव रहने पर भी जोर देना चाहिए। वह खेल के अलावा डांस व किसी तरह की फिजिकल एक्टिविटी ग्रुप में ज्वॉइन कर सकता है। दरअसल, जब बच्चे फिजिकली एक्टिव रहते हैं तो इससे तनाव को मैनेज करने और मूड को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। इससे उनके ओवर ऑल मेंटल हेल्थ पर अच्छा असर पड़ता है।
करें अनकंडीशनल सपोर्ट

कई बार बच्चे मेंटली स्ट्रॉन्ग इसलिए भी नहीं बन पाते हैं, क्योंकि कहीं ना कहीं उनके मन में यह डर रहता है कि उनके द्वारा लिए गए गलत निर्णयों पर पैरेंट्स उन्हें डाटेंगे या फिर उन्हें वह सपोर्ट नहीं मिलेगा। इसलिए, यह सबसे जरूरी है कि आप बच्चे को अनकंडीशनल सपोर्ट दें। उनके मन में यह विश्वास पैदा करें कि वे बिना किसी जजमेंट के डर के किसी भी समस्या के साथ आपके पास आ सकते हैं। आप हमेशा उनकी बात सुनें, उनकी भावनाओं को मान्य करें और साथ ही साथ सपोर्ट करें। बच्चे में यह विश्वास पैदा करने के लिए आप बच्चे से कम्युनिकेट करें। उसे अपने मन के डर व आंशकाओं को कहने का विश्वास दें। जब बच्चे के मन में यह विश्वास होता है कि उन्हें समझने व सपोर्ट करने वाला कोई है तो वे बिना डरे जीवन के बड़े फैसले लेने में भी सक्षम हो पाते हैं और यही कदम बच्चों को मेंंटली स्ट्रॉन्ग बनाता है।
