Lord Shiva Lesson: भगवान शिव को देवों के देव कहा जाता है हिंदू धर्म में भगवान शिव को त्रिलोक स्वामी माना जाता है। भगवान शिव का पूरा जीवन कई बेहतरीन जीवन मंत्रों से भरा हुआ खजाना है। आज के विकट समय में भी मन की स्थिरता और शांति के लिए हम भगवान शिव से ज्ञान और जीवन जीने के सबक सीख सकते हैं। आजकल की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल या दिनचर्या में व्यक्ति अक्सर अपने मन की स्थिरता और शांति को भूल जाता है। और जीवन की व्यर्थ भागदौड़ में सारी जिंदगी लगा रहता है। आज हम आपके लिए भगवान शिव के जीवन से जुड़े कुछ खास और बेहद सरल मंत्र लेकर आए हैं। इस आर्टिकल में आप भगवान शिव के जीवन से जुड़ी कुछ सीख जानेंगे।
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भगवान शिव के जीवन से सिख सकते हैं, जीवन जीने का सही मंत्र और कला: Lord Shiva Lesson

त्याग और संन्यास
भगवान शिव के जीवन और जीवन व्यतीत करने के तरीके से हम जानते हैं, कि भगवान शिव ने अपना सारा जीवन एक संन्यासी की तरह व्यतीत किया है। भगवान शिव के जीवन से हमें सीखने को मिलता है, कि व्यक्ति को सांसारिक मोह माया जैसे भौतिक इच्छाओं या लालच में नहीं पड़ना चाहिए। और अपने जीवन में एक संन्यासी की तरह मन की शांति और भक्ति आस्था को प्राथमिकता देनी चाहिए।
विनाश और सृजन
हिंदू धर्म में महादेव शिव तीनों लोकों के स्वामी कहे जाते हैं, जिन्हें पूरा संसार विनाशक और संसार के रचयिता के रूप में जानता है। भगवान शिव की इस अद्भुत दोहरी भूमिका से हमें सीखने को मिलता है कि नई शुरुआत और विकास के लिए पुरानी चीजों का विनाश होना जरूरी है। और जीवन में कभी-कभी पुरानी चीजों को भूल कर आगे बढ़ना ही जीवन में सही विकास लेकर आता है।
योग और ध्यान
भगवान शिव की अधिकतर प्रतिमाओं में हम अधिकतर उन्हें एक योगी की तरह गहरे ध्यान या ध्यान मुद्रा में देखते हैं। भगवान शिव को आदियोगी कहा जाता है, उनके जीवन से हमें सीखने को मिलता है कि योग और ध्यान यानी मेडिटेशन आज के कठिन डिजिटल जीवन में बेहद जरूरी है। नियमित योग और ध्यान करने से व्यक्ति के दिमाग में शांति और स्थिरता बनी रहती है। आज के लाइफस्टाइल को देखते हुए मेंटल हेल्थ और इमोशनल बैलेंस और स्पिरिचुअलिटी के लिए योगी की तरह जीवन जीना सीखना चाहिए।
उग्र करुणा भाव
रूद्र रूप धारी भगवान शिव जब गुस्से में तांडव करते हैं, तो तीनों लोग थरथर कांपने लगते हैं। लेकिन हमें उनके जीवन से सीखने को मिलता है, कि रूद्र रूपी होने के बावजूद भी सदेव करुणामई रहते हैं। भगवान शिव का उग्र करुणा भाव हमें सिखाता है, कि जीवन में सदा दूसरों के प्रति करुणा भाव रखने के साथ-साथ गलत और अन्याय के प्रति आवाज उठाने की हिम्मत भी रखनी जरूरी है। आप भी जीवन में भगवान शिव की तरह समाज में सही लोगों के प्रति करुणा भाव रखें और गलत के खिलाफ आवाज उठाएं।
समानता और बराबरी
भगवान शिव प्रत्येक व्यक्ति को समान रूप से देखते हैं, भले ही वह अमीर या गरीब हो और किसी भी जाति या लिंग का हो। महादेव से हमें यह सीखने को मिलता है कि हमें समाज के हर व्यक्ति के साथ समानता और बराबरी से बर्ताव करना चाहिए। हमें हर एक व्यक्ति का समानता से सम्मान और आदर सत्कार करना चाहिए। तभी समाज से जातिवाद और भेदभाव मिट सकता है।
आत्म नियंत्रण और संयम
देवों के देव महादेव शिव के जीवन से हमें सीखने को मिलता है उनके जैसा आत्म संयम और आत्म नियंत्रण। हर व्यक्ति के जीवन में आत्म संयम बेहद जरूरी होता है आत्म नियंत्रण करने से व्यक्ति का मन एकाग्र होता है और मन को शक्ति, स्थिरता और स्पष्टता मिलती है। जिससे जीवन का महत्वपूर्ण लक्ष्य प्राप्त करने में आसानी होती है। जीवन में बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आत्म नियंत्रण और संयम बरतना जरूरी है।
