Somvati Amavasya 2024
Somvati Amavasya 2024

Somvati Amavasya 2024 : सोमवती अमावस्या का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ-साथ पवित्र नदियों में स्नान और दान करने का विधान है, जिससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान भी किया जाता है। खास बात यह है कि सोमवती अमावस्या के दिन दीपक जलाने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि घर के मंदिर, तुलसी के पौधे, पीपल के पेड़, नदी के किनारे और पितरों के स्थान पर दीपक जलाने से देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और पितर प्रसन्न होकर परिवार में सुख-समृद्धि और शांति प्रदान करते हैं। शुभ मुहूर्त में दीपक जलाने से इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।

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मुख्य द्वार पर घी का दीपक

सोमवती अमावस्या के दिन घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। यदि घी उपलब्ध न हो, तो सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाया जा सकता है। दीपक जलाने के साथ ही वहां एक लोटा पानी भी रखें और मुख्य द्वार को खुला छोड़ दें। माना जाता है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में समृद्धि का वास होता है। दीपक और जल से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। यह दीपक सूर्यास्त के बाद अंधेरा होने पर जलाना चाहिए, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में खुशहाली आती है।

दक्षिण दिशा सरसों के तेल का दीपक

सोमवती अमावस्या के दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में अपने पितरों के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या की शाम पितर अपने लोक लौटते हैं, और दीपक का प्रकाश उनकी राह को उजाला प्रदान करता है। यह दीपक पितरों को संतोष और प्रसन्नता देता है, जिससे वे अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं। पितरों की कृपा से घर में शांति, समृद्धि और सुख-शांति का वास होता है। यह परंपरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक भी है।

तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध

अमावस्या के दिन पितर अपने वंशजों से तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध की अपेक्षा करते हैं। इन कर्मों के साथ, घर में दक्षिण दिशा में जहां पूर्वजों की तस्वीर रखी हो, वहां सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। यह दीपक पितरों को सम्मान और श्रद्धा अर्पित करने का प्रतीक है। दीपक का प्रकाश पितरों को संतोष और प्रसन्नता देता है, जिससे वे परिवार को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इस परंपरा को निभाने से घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

पीपल के पेड़ के नीचे दीपक

सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीप जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि पीपल को देवी-देवताओं और पितरों का निवास स्थान कहा गया है। इस दिन सरसों के तेल का दीपक जलाने से पितर देव प्रसन्न होते हैं, और तिल के तेल का दीपक देवी-देवताओं को समर्पित किया जाता है। यह परंपरा दुखों को दूर करने और परिवार पर देवताओं की कृपा प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करती है। पीपल के नीचे दीप प्रज्वलित करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

ईशान कोण में घी का दीपक

सोमवती अमावस्या के दिन घर के उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, में घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इस दिशा को देवताओं का निवास स्थान माना जाता है, और यहां दीप प्रज्वलित करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। दीपक की रोशनी से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में शांति बनी रहती है।

सोमवती अमावस्या पर दीपक जलाने का शुभ समय

सोमवती अमावस्या पर दीपक जलाने के लिए प्रदोष काल का समय सबसे शुभ माना गया है। इस दिन सूर्यास्त 05:34 बजे होगा, जिसके बाद से प्रदोष काल आरंभ हो जाएगा। इसी समय दीपक जलाना चाहिए, क्योंकि यह अंधकार को दूर कर सकारात्मकता फैलाता है। मान्यता है कि इस शुभ समय पर जलाए गए दीपक से देवी-देवताओं और पितरों की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।

मैं आयुषी जैन हूं, एक अनुभवी कंटेंट राइटर, जिसने बीते 6 वर्षों में मीडिया इंडस्ट्री के हर पहलू को करीब से जाना और लिखा है। मैंने एम.ए. इन एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया है, और तभी से मेरी कलम ने वेब स्टोरीज़, ब्रांड...