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भारत का राष्ट्रीयपर्व गणतंत्र दिवस: Republic Day 2023
Republic Day 2023 Celebration

Republic Day 2023: भारतीयों का राष्ट्रीयपर्व पर्व गणतंत्र दिवस प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। प्रत्येक भारतवासी के लिए यह दिन किसी उत्सव से कम नहीं होता। हो भी क्यों न, इसी दिन भारत का संविधान जो लागू हुआ था।

हमारा देश विश्व का सबसे अनोखा देश है। विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के रूप में मान्यता प्राप्त भारत में भाषाएं, बोलियां, खानपान, वेशभूषा भले ही अलग हो लेकिन जब राष्ट्रध्वज फहराया जाता है तो सभी एक साथ मिलकर जब राष्ट्रगान गाते हैं तो सच्चे गणतंत्र का दृश्य उभरकर सामने आ जाता है। राष्ट्रगान गाते वक्त सिर्फ एक ही बात सामने आती है और वह है अपना प्यारा देश। 26 जनवरी, 1950 को भारत को एक गणतांत्रिक राष्ट्र के रूप में मान्यता मिली थी और तब से लेकर अब तक और आने वाले अनंत वर्षों तक भारत विश्व पटल पर अपना यह स्वरूप पेश करता रहेगा कि अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की विशेषता।
गणतंत्र दिवस मनाते समय हम सभी के मुख से यही स्वर गूंजना चाहिए कि इंसान का इंसान से हो भाईचारा यही गणतंत्र हमारा। ‘सर्वेभवन्तुसुखिन:, सर्वेसन्तुनिरामया:’ की अवधारणा को पूरी तरह से अंगीकार करने का अर्थ है गणतंत्र दिवस के भाव को पूरी तरह से समझना। दूसरे शब्दों में कहें तो जहां सभी समृद्ध और खुशहाल हों, सभी रोगों से मुक्त हों, वही राज्य गणतांत्रिक राष्ट्र की परिकल्पना को पूरी तरह से स्वीकार करता है। भारत को अकूत प्राकृतिक सम्पदा और अकल्पनीय मानवीय शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त है। जब-जब ज्ञान की प्रधानता हुई है, भारत ने विश्व को मार्ग दिखाया है। वर्तमान दौर में जब 21 वीं सदी सूचना और ज्ञान की सदी में तब्दील हो रही है, समूचा विश्व एक बार फिर भारत की ओर निगाहें लगाए हुए है।

Republic Day 2023: आने वाली सदी की संरचना बुद्धि से होगी

सच तो यह है कि आने वाली सदी की सरंचना मिसाइलों से नहीं अपितु मानव की प्रखर बुद्धि से निर्मित होगी, अत: शिक्षा भारत की अवधारणा के मूल में है। शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है जो हमें अज्ञान के अंधकार से निकाल कर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती है, इसीलिए तो कहा गया है कि ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय।’ 68 वर्षीय गणतांत्रिक भारत ने अब तक हर क्षेत्र में प्रगति की है, लेकिन इस देश की नारी ने जो प्रगति की है, वह सबसे ज्यादा प्रशंसनीय मानी जाएगी। किसी भी समाज का विकास महिला-सशक्तिकरण के बगैर अधूरा है। महिलाओं पर अत्याचार करने से अधिक शर्मनाक शायद ही कुछ हो। अगर हम अपने देश को ‘भारत मां’ या ‘मां भारती’ का दर्जा देते हैं, अगर हमारे पूर्वज सदियों से नारी के ‘देवी’ रूप की पूजा करते रहे हैं तो हमें महिलाओं के प्रति होने वाले किसी भी अपराध के खिलाफ खुलकर बोलना चाहिए।

न कोई बड़ा और न कोई छोटा

भारत का विकास एक मजबूत संघ राज्य के बिना संभव नहीं है। हमारे संविधान निर्माताओं ने एक मजबूत संघीय ढांचे का स्वपन देखा था, जहां सभी राज्य और केंद्र विकास की यात्रा में बराबर के सहभागी हों। जहां कोई बड़ा न हो, कोई छोटा न हो। यह सच है कि विगत वर्षों में बहुत सी बाधाएं आयीं हैं और हमें कई बड़ी और गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, यह भी सच है कि हमें बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। फिर भी भारत की अवधारणा अक्षुण है और संदेह से परे है। हमारे संविधान में देश के हर व्यक्ति को अपने अधिकार दिए गए हैं, जिसके बल पर हर नागरिक पूरी आजादी के साथ अपनी जिंदगी जी सकता है, बावजूद इसके एक कड़वा सच यह है कि देश में अभी भी अपराध, भष्टाचार, हिंसा, आंतकवाद के कारण देश के नागरिक परेशान हैं, इस स्थिति से निपटने के लिए एकता रूपी अस्त्र सबसे ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

महान क्रांतिकारियों को याद करने का दिन

गणतंत्र दिवस तो सच्चे अर्थों में उन महान क्रांतिकारियों-महिलाओं और पुरुषों, को याद करने का है, जिन्होंने स्वतंत्रता संघर्ष में अपने जीवन का अंत कर दिया। इस दिन संविधान सभा के उन सम्मानित सदस्यों को याद करना भी जरूरी है, जिन्होंने हमें अपने संविधान के माध्यम से एक ऐसा बुनियादी संबल प्रदान किया, जिसके बूते पर हम अपने अधिकारों के साथ मजबूती से जीवन जी रहे हैं। गणतंत्र के आशय को जो लोग अच्छी तरह से समझते हैं, वे देश की गरिमा को बढ़ाते हैं। धर्म, जाति, लिंग भेद, अमीरी, गरीबी से ऊपर हैं देश प्रेम। यह देश प्रेम उसी अर्थ में सच साबित होगा, जब सबसे पहले हम देश में रहने वाले सभी समुदाय के लोगों के साथ स्नेह पूर्ण व्यवहार रखेंगे। विविधता से परिपूर्ण भारत देश में गणतंत्र की मूल भावना तभी फलफूल सकती है, जब सबको बराबरी का दर्जा मिले। देश को आजादी दिलाने में हर जाति धर्म के लोगों ने अपना योगदान दिया, इस लिहाज से देश में रहने का अधिकार सभी को है। भारतीय संस्कृति में रचे बसे लोग भारत की प्रगति चाहते हैं, उनकी नजर में जो महत्त्व हिंदू को है, वहीं महत्त्व मुसलमान, सिख, ईसाई या और किसी अन्य धर्म के लोगों को भी है। जब हर धर्म के अनुसार उनके उनके धार्मिक केंद्रों का निर्माण हर शहर, गांव, कस्बे, मुहल्ले, गली में किया गया है, फिर टकराव क्यों?

टकराव से खंडित होती है गणतंत्र की परिकल्पना

Republic Day 2023
Republic Day 2023

अगर किसी मुद्दे को लेकर लोगों के बीच आए दिन टकराव होता हो तो इसका सीधा अर्थ यह है कि हम गणतंत्र की अवधारणा को अंगीकार नहीं कर रहे हैं। हर व्यक्ति का चिंतन, विचार, सोच अलग-अलग हो सकती है, लेकिन जब देश हित से जोड़ा कोई मुद्दा सामने आए तो फिर एकजुटता दिखनी ही चाहिए। एकता ही गणतंत्र का दूसरा नाम है। अगर हम एक साथ हैं तो इसका अर्थ यह हुआ कि हमारे दिल में हर दिन गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। लोकतंत्र, एकता भी गणतंत्र के ही दूसरे नाम हैं, इसलिए लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास रखना एक तरह से गणतंत्र का सम्मान करने जैसा ही है। सार रूप में कहें तो गणतंत्र समूह, एकता का परिचायक है और गणतंत्र तभी बलशाली होगा जब सभी एक साथ रहेंगे और तिरंगा विश्व विजयी तभी होगा जब सभी ओर से यही गूंज होगी कि हम सब साथ-साथ हैं। मानव मानव के बीच एकता ही गणतंत्र का मूलाधार है और इस मूलाधार को जितनी मजबूती मिलेगी भारत की प्रगति उतनी ही तेजी से होगी, इसीलिए गणतंत्र दिवस का मूल मंत्र यही होना चाहे कि इंसान का इंसान से हो भाई चारा यही गणतंत्र हमारा।

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