नीलगिरी की पहाड़ियों में बसा ऊटी एक सुंदर पर्यटन स्थल है।
ऊटी का पूरा नाम उदगमंडलम है। यह जगह कोयंबटूर के उत्तर में क़रीब 86 किलोमीटर और मैसूर से तक़रीबन 128 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है।
Places in Ooty: दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में नीलगिरी की पहाड़ियों में बसा ऊटी एक सुंदर पर्यटन स्थल है। यह इतनी ख़ूबसूरत जगह है कि इसे लोग पहाड़ों की रानी कहकर बुलाते हैं। एक ज़रूरी बात जो आपको बताना चाहूँगा वह यह कि ऊटी का पूरा नाम उदगमंडलम है। यह जगह कोयंबटूर के उत्तर में क़रीब 86 किलोमीटर और मैसूर से तक़रीबन 128 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। इस जगह पर कई ऐसे ख़ूबसूरत और लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं, जिन्हें देखने के लिए दुनिया भर से भारी संख्या में पर्यटक आते हैं। इस जगह पर यदि आने का विचार बनाते हैं तो इस बात का ख़्याल रहें कि ऊटी में सर्दियों में देश के बाकी हिस्सों की तुलना में अधिक ठंडी पड़ती है इसलिए सैलानियों को जरूरी सामान और गर्म कपड़ों के साथ यहां घूमने आना चाहिए।
ऊटी की ख़ास बात

इस जगह को हिल स्टेशनों की रानी कहा जाता है। इस जगह पर बहुत बड़े-बड़े घास के मैदान, सुखदायक और शुद्ध वातावरण, शांत और सकूनदेह मौसम और यात्रा करने के लिए कई दर्शनीय स्थलों की विस्तृत श्रृंखला मौजूद है। इस जगह पर आकर प्रकृति के साथ-साथ पर्यटन स्थलों को भी देख और एंजोय कर सकता है। इस जगह पर आकर एक अलग ही तरह की अनुभूति होगी और आपको यात्रा के विविधतापूर्ण अनुभवों से सरोबोर कर देगी। इस जगह पर घूमने और करने के लिए काफ़ी कुछ है। इस जगह पर आने का विचार बने तो इन जगहों पर आपको ज़रूर जाना चाहिए।
नीलगिरि पर्वत रेलवे

ऊटी में यदि आते हैं तो आपको नीलगिरि पर्वत रेलवे ज़रूर देखना चाहिए। ब्रिटिश शासन के द्वारा अंग्रेज़ों के द्वारा बनाया गया यह नीलगिरि पर्वतीय रेलवे एक विश्व धरोहर स्थल के रूप में पूरी दुनिया में प्रचलित है। यह 46 किलोमीटर की एक खूबसूरत टॉय ट्रेन की यात्रा होती है जो मेट्टुपालयम से शुरू होती है और कई सुरंगों, पुलों एवं वादियों से होती हुई ऊटी पहुंचती है। इस पांच घंटे की यात्रा में जो मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं वह कभी नहीं भूलने वाले होते हैं। 1908 में शुरू की गई यह रेल लाइन 300 फीट से शुरू होकर 7200 फीट की हाइट पर जाती है जोकि निश्चित रूप से बहुत ही रोमांचकारी होती है।
ऊटी झील

ऊटी में ही ऊटी झील स्थित जोकि सुंदर और लोकप्रिय है। इस जगह पर लोग पिकनिक मानने, पैडल बोटिंग करने और आराम से ऊटी के मौसम का आनंद लेने के लिए जाते हैं। इस झील का निर्माण क़रीब 1825 के आसपास हुआ था जोकि 2.5 किलोमीटर लंबी है और नीलगिरी की ख़ूबसूरत पहाड़ियों के बीच से होकर गुजरती है। इस जगह पर आप अपने परिवार अथवा दोस्तों के साथ जाकर समय व्यतीत कर सकते हैं। झील के आसपास खाने पीने की कई दुकाने भी हैं जिसकी वजह से इस जगह पर लोगों का आना जाना लगा रहता है। इस झील पर कई फ़िल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है।
डोड्डाबेट्टा चोटी

ऊटी से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित डोड्डाबेट्टा चोटी को दक्षिण भारत का सबसे ऊंचा स्थान होने का दर्जा प्राप्त है। समुद्र तल से तक़रीबन 8,606 फीट की ऊंचाई पर स्थित डोड्डाबेट्टा चोटी से आसपास का बहुत ही मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। जिसकी वजह से इस चोटी को देखने के लिए भारी संख्या में पर्यटक जमा होते हैं। इस जगह पर आकर आप नीलगिरी के लुभावने दृश्य को देख सकते हैं। चोटी का ऊपरी हिस्सा इतना ख़ूबसूरत है कि कोई भी देखकर मंत्रमुग्ध हो सकता है। इसके शिखर पर एक दूरबीन का घर है जिसमें दो दूरबीन लगाए गए हैं, यह घाटी के आसपास का बहुत ही मनोरम दृश्य प्रस्तुत करते हैं। इस जगह पर मौजूद समृद्ध वनस्पति और जीव डोड्डाबेट्टा पीक के समग्र आकर्षण को बढ़ाते हैं।
मुरुगन मंदिर

तमिलनाडु के तमाम शहरों की तरह ऊटी में भी कुछ शानदार वास्तुकला वाले मंदिर हैं। एल्क हिल पर स्थित मुरुगन मंदिर भी एक ऐसा ही भव्य मंदिर है। जिसकी वजह से इस जगह पर हर साल हज़ारों की संख्या में पर्यटक आते हैं। भगवान मुरुगन को समर्पित यह मंदिर ऊटी के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। इस मंदिर में भगवान के भक्तों के द्वारा किया जाने वाला कावड़ी अट्टम नृत्य यहां का मुख्य आकर्षण है।
प्यकारा जलप्रपात

शहर से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्यकारा जलप्रपात ऊटी के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। यह जलप्रपात देवदार के वृक्षों से घिरा एक बहुत ही शानदार पिकनिक स्थल है। इस जगह पर लोग स्पीडबोट सवारी का आनंद ले सकते हैं। यह जगह नेचर वॉक के लिए भी काफ़ी अनुकूल है, चीड़ के पेड़ों के बीच से होकर आप लंबी सैर कर सकते हैं। इस जगह पर बोट हाउस और रेस्तरां आदि भी मौजूद है जहां पर आप तरह तरह के खानपान का भी आनंद ले सकते हैं। इस जगह पर पानी की ख़ूबसूरती देखते ही बनती है। पानी की धाराओं की सुंदरता इस जगह पर आने वाले पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
ऊटी जाने का अच्छा समय

यह एक हिल स्टेशन है जो पूरे साल ठंडा रहता है जिसकी वजह से पर्यटक पूरे साल ऊटी आते हैं। लेकिन अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर के बीच इस जगह पर आने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। मार्च से जून के महीने में जहां पूरे भारत में गर्मी पड़ती है, वहीं ऊटी का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से भी कम रहता है। जुलाई से सितंबर तक यहां भारी वर्षा होती है जिसके कारण पर्यटक कम आते हैं।
ऊटी कैसे पहुंचे
ऊटी जाने के लिए हवाई जहाज, ट्रेन और बस आदि का विकल्प उपलब्ध है। लेकिन ज्यादातर लोग सड़क मार्ग से यात्रा करना पसंद करते हैं क्योंकि ऊटी जाने के लिए सभी मार्ग काफी सुंदर हैं।
हवाई जहाज से ऊटी कैसे पहुंचे

ऊटी का निकटतम हवाई अड्डा कोयम्बटूर एयरपोर्ट है जोकि ऊटी से 85 किमी दूर है। यह हिल स्टेशन देश के बाकी हिस्सों से उड़ानों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से जुड़ा है। नई दिल्ली, मुंबई, कोझीकोड, बैंगलोर, हैदराबाद और अहमदाबाद से नियमित उड़ानें भरती हैं।
बस द्वारा ऊटी कैसे पहुंचे

कई राज्यों की सड़के एवं राष्ट्रीय राजमार्ग ऊटी से अच्छी तरह जुड़े हुए हैं। तमिलनाडु राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें बंगलौर, चेन्नई और मैसूर आदि शहरों से ऊटी के लिए चलते हैं। इसके अलावा बैंगलोर से कई लक्जरी बसें भी चलती हैं, जिससे ऊटी पहुंचने में लगभग 7 से 8 घंटे का समय लगता है।
ट्रेन द्वारा ऊटी कैसे पहुंचे

ऊटी का निकटतम रेलवे स्टेशन मेट्टुपलयम है जो ऊटी से 40 किमी दूर है। इस स्टेशन पर चेन्नई, कोयम्बटूर, मैसूर और बैंगलोर जैसे आसपास के शहरों से कई ट्रेनें आती हैं। रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद आप यहां से निजी टैक्सी या फिर बस द्वारा ऊटी पहुंच सकते हैं।
टॉय ट्रेन द्वारा ऊटी कैसे पहुंचे
इसके अलावा आप टॉय ट्रेन से नीलगिरी पर्वत, घने जंगलों एवं अंधेरी सुरंगों से गुजरते हुए भी ऊटी पहुंच सकते हैं। हालांकि यह यात्रा बेहद धीमी और समय लेने वाली है, लेकिन इसका अनुभव काफी रोमांचकारी होता है।
